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प्रेरणा: कैंसर के चलते छात्र को कटवाना पड़ा दाहिना हाथ, बाएं हाथ से लिखी 10वीं की बोर्ड परीक्षा
Wed, 07 Feb 2024 06:16 PM IST
आकाश कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकाश कुमार
Updated Wed, 07 Feb 2024 06:16 PM IST
सार
जज्बा: पश्चिम बंगाल में कक्षा 10 का एक छात्र दुनियाभर के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गया है। कैंसर के कारण छात्र को दाहिना हाथ कटवाना पड़ा। इसके बाद भी छात्र ने बिना किसी लेखक की सहायता के बाएं हाथ से बोर्ड की परीक्षा लिखी।
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writing
विस्तार
Bengal Board Exams: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के एक 16 वर्षीय लड़के ने कैंसर को बढ़ने से रोकने के लिए अपना दाहिना हाथ कटवा लिया। लड़का इसके बाद अपने बाएं हाथ से 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दे रहा है। शांतिपुर इलाके के हरिपुर नारापतिपारा गांव के रहने वाले शुबजीत बिस्वास ने परीक्षा के लिए पिछले दो महीनों में ही बाएं हाथ से लिखना सीखा है।
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नृसिंहपुर हाई स्कूल, जो बिस्वास का परीक्षा केंद्र है, के प्रधानाध्यापक सौमित्र बिद्यार्थ ने कहा, "हमने उसके लिए सभी चिकित्सा सहायता तैयार रखी थी, लेकिन उसने कोई अतिरिक्त समय नहीं मांगा। छात्र ने लेखक का भी चयन नहीं किया।"
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बिस्वास ने कहा कि कुछ साल पहले शुबजीत की दाहिनी बांह में एक ट्यूमर विकसित हुआ और बाद में कैंसर का पता चला। कोलकाता में प्रारंभिक निदान के बाद, बेंगलुरु में इलाज हुआ, जहां परिवार को दो साल तक रहना पड़ा, लेकिन हाथ को बचाया नहीं जा सका।
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बिस्वास ने कहा, "पिछले साल दिसंबर में कोहनी से मेरा दाहिना हाथ कट गया था। तब से, मैंने अपने बाएं हाथ से लिखने का अभ्यास किया। शुरुआत में, यह बहुत कठिन था और रोया भी, लेकिन धीरे-धीरे दैनिक अभ्यास के साथ गति में सुधार हुआ और मैं सीधे लिखने में सक्षम हुआ।"
इलाज के खर्च से परिवार की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा। उनके पिता इंद्रजीत विश्वास, जो पहले एक कमजोर हथकरघा इकाई में बुनकर के रूप में काम करते थे, अब कोलकाता में एक श्रमिक के रूप में काम करते हैं। अपनी दो बहनों की शादी के बाद, लड़का अब अपने चाचा और चाची के साथ रहता है।
लड़के के चाचा अरिजीत बिस्वास ने कहा, "उसके इलाज के दौरान हुए खर्चों के कारण उसके माता-पिता कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। उनके पास एक छोटे से घर के अलावा कुछ नहीं बचा है। लेकिन हम उसके साथ हैं। हमें भगवान पर बहुत भरोसा है। वह सफल होगा।"
परीक्षा में बैठने के लिए लड़के की अदम्य भावना की पड़ोसियों और उसके शिक्षकों ने प्रशंसा की है।
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