उत्तराखंड संस्कृत विवि में फर्जीवाड़ा, बिना कोर्स बंट रही डिग्री
- रुड़की सहित एक दर्जन मामले सामने आए
- कई प्रदेशों से डिग्री सत्यापन के लिए आ रहे पत्र
- विवि प्रशासन की ओर से कराई जा रही जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री में फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं। इस तरह के रुड़की सहित करीब एक दर्जन शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन को मिली हैं। कई प्रदेशों से डिग्री सत्यापन के लिए पत्र आ रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फर्जीवाडे़ की जांच कराई जा रही है। ताजुब्ब की बात यह है कि जो कोर्स विश्वविद्यालय में संचालित ही नहीं उनकी भी डिग्री सत्यापन के लिए आ रही है।
देवभूमि कहे जाने वाले इस प्रदेश में संस्कृत का प्रचार प्रसार करने के लिए उत्तराखंड संस्कृत एकादमी और उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। ये दोनों संस्थान हरिद्वार जिले में संचालित हो रहे हैं।
विश्वविद्यालय का अपना कोई भवन नहीं था लिहाजा एकादमी की बिल्डिंग में कई सालों तक संयुक्त रुप से अकादमी और विश्वविद्यालय का संचालन किया जाता रहा। पांच साल पहले अपना भवन बना तो उसमें पृथक रुप से विश्वविद्यालय का कामकाज शुरु हुआ। अब जबकि विश्वविद्यालय प्रगति की ओर तेजी से कदम बढ़ाने लगा है तो फर्जीवाडा करने वाले किसी गिरोह की ओर से विश्वविद्यालय को बदनाम करने के लिए उसके नाम पर फर्जी डिग्री जारी किए जाने का मामला सामने आया है।
चलते हैं केवल मानविकी कोर्स, मिल रही बीटेक डिग्री
विश्वविद्यालय में केवल मानविकी पाठयक्रम संचालित किए जाते हैं। जबकि विभिन्न विषयों में बीटेक आदि की डिग्री भी फर्जी तरीके से विश्वविद्यालय के नाम पर बांटी जा रही हैं।
कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि कई टैक्नीकल विषयों की फर्जी डिग्री उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम पर वितरित किए जाने कि शिकायतें मिली हैं। इमनें रुड़की क्षेत्र से जुड़े भी कुछ मामले शामिल हैं।
ये पाठयक्रम हैं संचालित
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में केवल मानविकी विषयों को पढ़ाया जाता है। यहां पर संस्कृत साहित्य एवं व्याकरण की शास्त्री और आचार्य की डिग्री, हिंदी भाषा विज्ञान, ज्योतिष, पत्रकारिता, इतिहास, योग, मनोविज्ञान आदि के कोर्स कराए जाते हैं। संस्कृत माध्यम वालों को बीएड भी कराई जाती है। जबकि टैक्नीकल और मेडिकल से सबंधित एक भी पाठयक्रम संचालित नहीं हो रहा।
49 महाविद्यालय हैं संबद्घ
बहादराबाद स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय प्रदेश का एकमात्र संस्कृत विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय से प्रदेशभर के 49 संस्कृत महाविद्यालयों को मान्यता दी गई है। हरिद्वार जिले में संस्कृत महाविद्यालयों की संख्या सबसे अधिक है।
संदेह के घेरे में साइबर कैफे
विश्वविद्यालय में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कोई गिरोह फर्जी डिग्री जारी कर विश्वविद्यालय को बदनाम करना चाहता है। कुछ साइबर कैफे संचालक इस करतूत को अंजाम दे रहे होंगे। रुड़की और हरिद्वार स्थित साइबर कैफे संचालकों पर शक की सुई ज्यादा घूम रही है।
विभिन्न संस्थानों से डिग्री सत्यापन के पत्र
उत्तराखंड ही नहीं अन्य प्रदेशों के विभिन्न संस्थानों से भी विश्वविद्यालय में सत्यापन के लिए पत्र आए हैं। जो कोर्स यहां संचालित नहीं उनके लिए तो सीधे तौर पर फर्जी लिखकर भेजा जा रहा है। लेकिन जो कोर्स यहां संचालित हैं उनका अभिलेखों से मिलान करके सत्यापन किया जा रहा है। कुलसचिव ने इसकी पुष्टि की।
विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री जारी करने वाले गिरोह की जांच शुरु कर दी गई है। उम्मीद है ऐसे लोगों के गिरेबान तक हम पहुंच जाएंगे। विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जीवाडा करने वाले ऐसे लोग कानून के कटघरे में खड़े होंगे और कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-गिरीश कुमार अवस्थी, कुलसचिव उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय।