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मानसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ का कातिलाना गठजोड़
देहरादून/कुमार अतुल
Updated Mon, 17 Jun 2013 02:25 PM IST
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कहते हैं एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा, ऐसी सूरत में हालात तो विकट होंगे ही। यही हाल उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर का है। मौसम के जानकार इन इलाकों में भारी बारिश की वजह मानसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ की अति सक्रियता बता रहे हैं। तीनों पहाड़ी राज्य मानसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ के मिलनबिंदु बन रहे हैं।
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पुणे से मौसम विज्ञान विभाग में नेशनल क्लाइमेट सेंटर के चेयरमैन और डायरेक्टर रिसर्च डा. एके श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि इस बार मौसम के अप्रत्याशित रंग देखने को मिल रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत के वायुमंडल की ऊपरी सतह में जहां बहुत ही शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, वहीं निचले स्तर में मानसून भी बहुत ताकतवर है। उत्तरी भारत के पर्वतीय इलाकों पर दोनों सिस्टम एक साथ मिल रहे हैं। इसी के चलते अनुमान से ज्यादा भारी बारिश हो रही है।
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पश्चिमी विक्षोभ की अति सक्रियता बहुत कम
डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि ताकतवर मानसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ की अति सक्रियता बहुत कम देखने को मिलती है। होता यह है कि जब मानसून सक्रिय होता है तो पश्चिमी विक्षोभ निष्क्रिय पड़ जाता है। लेकिन इस बार स्थिति इसके विपरीत है। वायुमंडल की ऊपरी सतह में पश्चिमी विक्षोभ बहुत ज्यादा सक्रिय है वहीं इस बार ताकतवर होने की वजह से मानसून न सिर्फ लगभग एक पखवाड़े पहले धमक गया बल्कि पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलकर कहर ढाने लगा।
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उन्होंने बताया कि हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर दोनों सिस्टम की अति सक्रियता के चलते बर्फबारी भी हुई है। यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जबतक दोनों में से एक सिस्टम कमजोर नहीं पड़ जाता।