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उत्तराखंड में ‘ड्रग्स पेपर’ के साथ छह गिरफ्तार
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 08 Dec 2012 12:12 PM IST
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उत्तराखंड में अपनी तरह के पहले मामले में एसटीएफ ने विदेशी ड्रग्स पेपर के साथ छह सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 16 ड्रग्स पेपर बरामद किए गए हैं। एक किलो 800 ग्राम हशीश भी उनसे बरामद की गई।
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खास बात यह है कि गिरोह का एक सदस्य राजधानी में तैनात एक इंस्पेक्टर का बेटा है, जबकि बीबीए और एचएम की दो छात्राएं भी नशे के इस धंधे में शामिल हैं। एसटीएफ एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने बताया कि शुक्रवार को विकासनगर के कुल्हाल बैरियर (उत्तराखंड-हिमाचल की सीमा) पर जाइलो कार सवार इस गिरोह को पकड़ा गया।
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हशीश की कीमत दस लाख, जबकि ड्रग्स पेपर की 50 हजार बताई जा रही है। एसएसपी ने बताया कि गिरोह से उनके अंतरराज्यीय संपर्कों के बारे में जानकारी ली जा रही है। बताया कि भारत में ड्रग्स पेपर इससे पहले कुछ वर्ष पूर्व गोवा में पकड़ा गया था। अब दूसरी बार उत्तराखंड में ऐसा मामला सामने आया है।
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नेट से ली मदद
ड्रग्स के इस नए धंधे से पुलिस अधिकारी भी सकते में हैं। बताया जा रहा है कि गिरोह से बरामद ड्रग्स पेपर के बारे में अधिकारियों को जानकारी नहीं थी। वजह कि ड्रग्स पेपर की अब तक कोई पहचान नहीं है। चेकिंग में भी इसके पकड़ में आने की संभावना बेहद कम रहती है। ऐसे में एसटीएफ अधिकारियों को गिरोह से मिले पेपर की जांच के लिए इंटरनेट की मदद लेनी पड़ी। तब जाकर मालूम हुआ कि यह कागज नशे के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसके बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिल सकी है कि यह पेपर विदेश में कहां बनाया जाता है।
क्या है ड्रग्स पेपर
स्टांप टिकट के आकार वाले इस पेपर का नशा लंबे समय तक रहता है। बताया जाता है कि टिकट के एक चौथाई हिस्से को नशा करने वाले जीभ पर रख लेते हैं। कुछ देर में यह घुल जाता है, जिसका असर 24 घंटे तक रहता है। रेव पार्टियों में इसी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ने की बात सामने आई है। गिरोह से पूछताछ में पता चला है कि इस ड्रग्स पेपर का इस्तेमाल दून के कई शिक्षण संस्थानों के युवा करते हैं।
हिमाचल से लाते हैं पेपर
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सरगना अनिल ने पूछताछ में बताया कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली और अन्य पर्यटक स्थलों में आने वाले विदेशी पर्यटक अपने साथ यह ड्रग्स पेपर लाते हैं। चूंकि इसे पकड़ना आसान नहीं, इसलिए वे आसानी से एयरपोर्ट और फिर हिमाचल तक आ जाते हैं। वहां स्थानीय नशे के सौदागरों को यह पेपर एक हजार से 15सौ रुपये में बेच दिया जाता है। अनिल इन लोगों से पेपर खरीद लेता है। इसे दून में तीन से पांच हजार रुपये में बेचा जाता है।
यह हैं नशे के कारोबारी
गिरोह का सरगना मोथरोवाला निवासी अनिल चौहान बताया गया है। पुलिस के मुताबिक राजीवनगर में मोबाइल शॉप चलाने वाला यह युवक लंबे समय से नशे के धंधे से जुड़ा है। ड्रग्स पेपर इसी के पास से मिले हैं। अनिल की गर्लफ्रेंड अंजलि रेसकोर्स स्थित ऑफिसर कॉलोनी में रहती है। बीबीए की छात्र अंजलि अनिल के कारोबार में बराबर का हाथ बंटाती है। डीएवी कॉलेज का छात्र संदीप उर्फ सैंडी सरस्वती विहार में रहता है। खुद नशे का आदी होने के साथ वह अनिल के साथ शिक्षण संस्थानों में नशे की सप्लाई में शामिल है। उसके पिता खेती करते हैं।
डालनवाला के आराघर निवासी संदीप चौहान उर्फ लंबू भी परिवार से अलग रहता है, वह भी नशे का आदी है। ओम विहार धर्मपुर निवासी प्रशांत रावत होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रहा है। उसके पिता पटेलनगर कोतवाली में इंस्पेक्टर हैं। जानलेवा हमले में वह एक बार पहले भी जेल जा चुका है। पटेलनगर निवासी अमृता वर्मा भी एचएम कर रही है। उसकी मां श्रीनगर में उद्यान विभाग में तैनात हैं। वह भी गिरोह में शामिल है।