{"_id":"11-59870","slug":"Dehradun-59870-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षण संस्थान अब सर्विस टैक्स के दायरे में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षण संस्थान अब सर्विस टैक्स के दायरे में
Dehradun
Updated Thu, 07 Mar 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून। छात्र-छात्राओं से मोटी फीस वसूल डकार तक न लेने वाले शिक्षण संस्थान अब सर्विस टैक्स के दायरे में होंगे। शिक्षा के इन ‘मंदिरों’ में किसी भी बाहरी कार्यक्रम को कराने से होने वाली आय को सर्विस टैक्स के दायरे में शामिल किया गया है। इनमें यहां होने वाले सेमिनार, फेट आदि सभी तरह के आयोजन शामिल हैं। कमाई पर 12.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगेगा।
दून में विभिन्न पब्लिक स्कूलों, मैनेजमेंट संस्थानों, तकनीकी और अन्य सभी संस्थानों को शामिल कर तकरीबन एक हजार से ज्यादा शिक्षण संस्थान हैं। ज्यादातर नामी हैं। बाहरी छात्र-छात्राएं इनका नाम सुनकर ही इनमें प्रवेश पाने को प्राथमिकता देते हैं। अकेले राजधानी में पब्लिक स्कूलों की ही संख्या पांच सौ से लेकर सात सौ के बीच में है। इनमें से ज्यादातर शिक्षण संस्थान किसी-न-किसी दिन किसी सेमिनार, कांफ्रेंस, फेट, फेयर या किसी दूसरे कार्यक्रम के चलते बुक रहते हैं। इस तरह के अधिकतर कार्यक्रम प्रायोजित होते हैं। कई बार सामान्य ज्ञान, पेंटिंग या अन्य तरह की परीक्षा कराने के लिए भी कई गैर-सरकारी संस्थाएं, संस्थान इन्हें किराए पर लेते रहते हैं।
पहले इस तरह के कार्यक्रमों से होने वाली आय को सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं रखा गया था, लेकिन अब टैक्स चार्ज करने के इस फैसले से शिक्षण संस्थान पूरी राशि अपनी जेब में नहीं डाल पाएंगे। आगामी एक अप्रैल से यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क एवं सेवा कर के अधीक्षक तापस चक्रवर्ती के अनुसार इस संबंध में निर्देश आए हैं। सभी शिक्षण संस्थानों की सूची अपडेट की जा रही है। इस संबंध में सभी को सूचित भी किया जा रहा है। उनकी मानें तो इससे शहर भर के शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसी जा सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
दून में विभिन्न पब्लिक स्कूलों, मैनेजमेंट संस्थानों, तकनीकी और अन्य सभी संस्थानों को शामिल कर तकरीबन एक हजार से ज्यादा शिक्षण संस्थान हैं। ज्यादातर नामी हैं। बाहरी छात्र-छात्राएं इनका नाम सुनकर ही इनमें प्रवेश पाने को प्राथमिकता देते हैं। अकेले राजधानी में पब्लिक स्कूलों की ही संख्या पांच सौ से लेकर सात सौ के बीच में है। इनमें से ज्यादातर शिक्षण संस्थान किसी-न-किसी दिन किसी सेमिनार, कांफ्रेंस, फेट, फेयर या किसी दूसरे कार्यक्रम के चलते बुक रहते हैं। इस तरह के अधिकतर कार्यक्रम प्रायोजित होते हैं। कई बार सामान्य ज्ञान, पेंटिंग या अन्य तरह की परीक्षा कराने के लिए भी कई गैर-सरकारी संस्थाएं, संस्थान इन्हें किराए पर लेते रहते हैं।
विज्ञापन
पहले इस तरह के कार्यक्रमों से होने वाली आय को सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं रखा गया था, लेकिन अब टैक्स चार्ज करने के इस फैसले से शिक्षण संस्थान पूरी राशि अपनी जेब में नहीं डाल पाएंगे। आगामी एक अप्रैल से यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क एवं सेवा कर के अधीक्षक तापस चक्रवर्ती के अनुसार इस संबंध में निर्देश आए हैं। सभी शिक्षण संस्थानों की सूची अपडेट की जा रही है। इस संबंध में सभी को सूचित भी किया जा रहा है। उनकी मानें तो इससे शहर भर के शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसी जा सकेगी।
विज्ञापन