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समेकित बाल योजना में राज्य को नहीं मिला एक पैसा
Dehradun
Updated Sat, 23 Feb 2013 05:30 AM IST
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देहरादून। बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि तीन साल से केन्द्र सरकार की समेकित बाल योजना का एक पैसा भी उत्तराखंड राज्य को नहीं मिल सका है, जिस कारण बाल योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए समाज कल्याण विभाग क ी उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया।
बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण अधिकारियों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने बताया कि केन्द्र सरकार की इस योजना के तहत बाल योजनाआें को लागू कराने के लिए असीमित बजट दिया गया है, लेकिन तीन साल से प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण कोई राशि पूरे राज्य में नहीं मिल सकी है। इस योजना में बाल गृह के साथ जुडे कर्मचारियाें के लिए मानदेय की भी व्यवस्था है। यह पूरी योजना समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जानी है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में बच्चों के लिए बनाए गए छह बाल गृहों का सर्वेक्षण कर उनसे जुडे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्लान इंडिया के प्रदेश प्रबंधक सुरेश बलौदी ने किशोर न्याय अधिनियम के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। बाल अधिकार प्रशिक्षक गजेन्द्र नौटियाल ने कहा कि बाल कल्याण समितियों को प्रथम श्रेणी के जज की क ानूनी ताकत दी गई है। संस्था से जुडे रघु तिवारी ने बाल संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों की भूमिका पर प्रकाश डाला। हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी वीएस धनिक ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकेंगे। भुवनेश्वरी महिला आश्रम के परियोजना प्रबंधक गोपाल थपलियाल, बाल सुरक्षा समन्वय चंद्रमणि उनियाल, अजय पंवार आदि इस दौरान प्रमुख रुप से उपस्थित रहे।
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बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण अधिकारियों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने बताया कि केन्द्र सरकार की इस योजना के तहत बाल योजनाआें को लागू कराने के लिए असीमित बजट दिया गया है, लेकिन तीन साल से प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण कोई राशि पूरे राज्य में नहीं मिल सकी है। इस योजना में बाल गृह के साथ जुडे कर्मचारियाें के लिए मानदेय की भी व्यवस्था है। यह पूरी योजना समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जानी है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में बच्चों के लिए बनाए गए छह बाल गृहों का सर्वेक्षण कर उनसे जुडे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्लान इंडिया के प्रदेश प्रबंधक सुरेश बलौदी ने किशोर न्याय अधिनियम के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। बाल अधिकार प्रशिक्षक गजेन्द्र नौटियाल ने कहा कि बाल कल्याण समितियों को प्रथम श्रेणी के जज की क ानूनी ताकत दी गई है। संस्था से जुडे रघु तिवारी ने बाल संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों की भूमिका पर प्रकाश डाला। हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी वीएस धनिक ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकेंगे। भुवनेश्वरी महिला आश्रम के परियोजना प्रबंधक गोपाल थपलियाल, बाल सुरक्षा समन्वय चंद्रमणि उनियाल, अजय पंवार आदि इस दौरान प्रमुख रुप से उपस्थित रहे।
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