Explainer: आखिर रोहित शर्मा, अजीत अगरकर और गौतम गंभीर के बीच क्या हुआ? क्यों बढ़ीं दूरियां; समझिए पूरा मामला
रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर उठी चर्चाओं ने भारतीय क्रिकेट में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स में चयन समिति, अजीत अगरकर और गौतम गंभीर के साथ मतभेदों की बात सामने आई है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ भविष्य की योजना है या भरोसे और संवाद की कमी ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया है?
विस्तार
भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर हो रही है। एक रिपोर्ट्स में दावा है कि चयनकर्ता अब 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार करने की दिशा में बढ़ चुके हैं। इसी बीच मुख्य कोच गौतम गंभीर, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और रोहित शर्मा के रिश्तों को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
आखिर रोहित शर्मा, अजीत अगरकर और गौतम गंभीर के बीच ऐसा क्या हुआ कि मामला टीम चयन से निकलकर भरोसे और संवाद की कमी तक पहुंच गया? क्या यह सिर्फ 2027 विश्व कप की तैयारी का फैसला है या फिर लंबे समय से पनप रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं? आइए, पूरे घटनाक्रम को शुरुआत से अंत तक सिलसिलेवार समझते हैं और जानते हैं कि इस विवाद की असली कहानी क्या है...
रोहित के भविष्य पर सवाल क्यों उठे?
राष्ट्रीय चयन समिति की योजना वनडे टीम में युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को लंबे समय तक मौका देने की है। बताया गया है कि इस सोच को टीम प्रबंधन, खासकर मुख्य कोच गौतम गंभीर का भी समर्थन हासिल है। हालांकि, यह भी उतना ही सच है कि 513 अंतरराष्ट्रीय मैच, 20289 रन और 50 शतकों के बाद रोहित शर्मा ने अपने करियर में इतना हासिल किया है कि वह अपने भविष्य पर फैसला खुद लेने का अधिकार रखते हैं। दूसरी ओर चयनकर्ताओं के पास भी 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए टीम चुनने की जिम्मेदारी है।बीसीसीआई के फैसले से खुश नहीं थे रोहित
- द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड के खिलाफ जारी तीन मैचों की वनडे सीरीज के दौरान रोहित शर्मा ने बीसीसीआई अधिकारियों से मुलाकात की थी।
- दावा किया गया है कि बोर्ड के फैसले से पूर्व भारतीय कप्तान खुश नहीं थे।
- रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चयन समिति ने रोहित को साफ तौर पर बता दिया है कि वे इस वनडे सीरीज के बाद अब उनसे आगे का सोच रहे हैं।
- चयनकर्ताओं ने पिछले हफ्ते कोच गौतम गंभीर की मौजूदगी में रोहित शर्मा से इस विषय पर बातचीत की थी।
- चयन समिति का पूरा ध्यान 2027 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए यशस्वी जायसवाल जैसे युवाओं को अधिक से अधिक मौका देने पर है।
- बीसीसीआई सूत्र ने कहा, चयनकर्ताओं ने यह तय कर लिया है कि इसके बाद वे वनडे में रोहित शर्मा का चयन नहीं करेंगे।
- यदि वे सम्मानपूर्वक संन्यास लेना चाहते हैं या तुरंत संन्यास न लेने का फैसला करते हैं, तो यह पूरी तरह से उनका व्यक्तिगत निर्णय होगा।
- हालांकि, संदेश स्पष्ट है कि रविवार को लॉर्ड्स में होने वाले मैच के बाद चयनकर्ता उन्हें वनडे टीम में नहीं चुनेंगे।
तीन मजबूत सोच वाले लोगों की कहानी
रोहित शर्मा, गौतम गंभीर और अजीत अगरकर के बीच सबसे बड़ी कमी आपसी भरोसे की रही। तीनों अपनी-अपनी सोच पर मजबूती से कायम रहने वाले व्यक्तित्व माने जाते हैं। राहुल द्रविड़ के टीम के साथ रहने तक स्थिति अलग थी। उनके कार्यकाल में भारत ने 2023 वनडे विश्व कप और 2024 टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट खेले, जिसमें टी20 विश्व कप का खिताब भी जीता। लेकिन गौतम गंभीर के आने के बाद टीम मैनेजमेंट की कार्यशैली अलग नजर आई।
क्या 2005 के गांगुली-चैपल विवाद जैसी है रोहित और गंभीर की कहानी?
रोहित शर्मा और गौतम गंभीर के बीच सामने आ रहे मतभेदों की तुलना कई लोग 2005 में सौरव गांगुली और ग्रेग चैपल के चर्चित विवाद से कर रहे हैं। आईपीएल 2024 के दौरान, जब कोलकाता नाइट राइडर्स वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच खेलने पहुंची थी, तब यह लगभग तय हो चुका था कि आईसीसी टूर्नामेंट के बाद राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के मुख्य कोच का पद छोड़ देंगे। ऐसे में बीसीसीआई नए हेड कोच की तलाश में था और गंभीर सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे।
पूर्व भारतीय कप्तान के करीबी एक शख्स के मुताबिक, वानखेड़े में अभ्यास सत्र के दौरान रोहित खुद गंभीर के पास पहुंचे और उनसे कहा "गौती भाई, इंडियन टीम में आ जाओ।" इस पर गंभीर ने कथित तौर पर जवाब दिया "अगर तुम कप्तान बने रहोगे, तो मैं जरूर आऊंगा।" हालांकि, उसी समय कुछ लोगों ने रोहित को आगाह भी किया था। उनका कहना था कि राहुल द्रविड़ की शांत और संतुलित मैन-मैनेजमेंट शैली के बाद गंभीर के साथ काम करना बिल्कुल अलग अनुभव होगा। सवाल भी उठाया गया कि क्या रोहित इस नई चुनौती के लिए तैयार हैं। बाद की घटनाओं को देखें तो यह आशंका पूरी तरह गलत भी साबित नहीं हुई। घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 की हार के बाद मतभेदों की चर्चा तेज हुई और ऑस्ट्रेलिया दौरे तक दोनों पक्षों के रिश्तों में खटास साफ नजर आने लगी।
न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद क्या बदल गया?
ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान सिडनी टेस्ट से एक दिन पहले टीम अभ्यास कर रही थी। उसी दौरान रोहित शर्मा को गौतम गंभीर और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर के साथ लंबी बातचीत करते देखा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहित खराब फॉर्म के कारण खुद इस टेस्ट से बाहर बैठना चाहते थे। चयन समिति के करीबी सूत्रों का दावा है कि अगरकर ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि यदि रोहित खुद बाहर बैठते हैं तो छह महीने बाद इंग्लैंड दौरे के लिए उनके चयन पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
क्या रोहित टेस्ट क्रिकेट से उसी समय संन्यास लेना चाहते थे?
बताया जाता है कि रोहित उसी समय टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का मन बना चुके थे। हालांकि, अगले दिन प्रसारक से बातचीत में उन्होंने कहा था "मैं दो बच्चों का पिता हूं। मुझे पता है कि मेरे लिए क्या अच्छा है।" इस बयान ने सभी को चौंका दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद अगरकर और गंभीर भी हैरान रह गए और पहले से कमजोर पड़ चुका आपसी भरोसा और अधिक प्रभावित हुआ।इंग्लैंड दौरे को लेकर क्या मतभेद थे?
इस बीच, रोहित ने भारतीय टीम को चैंपियंस ट्रॉफी में जीत दिलाई और दुबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में मैच जिताऊ पारी भी खेली। लेकिन जब इंग्लैंड दौरे के लिए चयन होने वाला था, तब कई विरोधाभासी बातें सामने आईं। अगर रोहित के करीबियों से पूछा जाए, तो उनका कहना है कि उन्होंने सभी पांचों मैचों के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई थी और केवल दो मैच खेलने की बात नहीं की थी। यहां तक कि गंभीर ने उनके साथ उन संभावित गेंदबाजों पर भी चर्चा की थी जिनका सामना वे सीरीज में करेंगे। हालांकि, चयन समिति के करीबियों का कहना है कि रोहित ने उनसे कहा था कि वह पहले दो टेस्ट खेलने के बाद फैसला लेंगे, जो बात समिति को मंजूर नहीं थी। चयनकर्ताओं ने रोहित से कहा कि उन्हें बाहर किया जाएगा और इसके जवाब में रोहित ने अपने संन्यास की घोषणा कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहुत कम विश्वास बचा था।
वनडे कप्तानी छिनने के बाद क्या बदला?
जिस बात ने रोहित के विश्वास को पूरी तरह से तोड़ दिया, वह यह थी जब चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाले कप्तान को आईसीसी टूर्नामेंट के सात महीने बाद तय अगली सीरीज में ही 50-ओवर की कप्तानी से हटा दिया गया। इसमें रोहित की कोई गलती नहीं थी कि आईपीएल के बाद कोई 50-ओवर का क्रिकेट नहीं हुआ, जिससे उन्हें मैदान पर समय बिताने का मौका मिलता। जब अगरकर ने उन्हें 2027 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने के बारे में बताया, तो निराशा बहुत बड़ी थी और बातचीत काफी कठिन रही। अगरकर और गंभीर दोनों एक ही राय पर थे।
इसके बाद रोहित एक ऐसे अकेले योद्धा बन गए जिनका एकमात्र लक्ष्य 50 ओवर का वर्ल्ड कप जीतना था, लेकिन अगरकर-गंभीर की जोड़ी इस पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जता रही थी। स्पष्टता और संवाद की कमी ने रोहित की आक्रामक बल्लेबाजी शैली को प्रभावित किया और परिणाम गिरते चले गए। लेकिन जिस दिन उन्होंने अपनी सबसे खराब पारियों में से एक खेली, उसी दिन उनके बाहर होने की कहानी सामने आना, ऐसी चीज नहीं थी जिसकी वे उम्मीद करते। हालांकि, शर्मा-अगरकर और गंभीर की इस गाथा में अभी भी कई मोड़ आ सकते हैं।