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श्रीनिवासन भड़के, 'मैं धोनी को इस्तीफा देने के लिए क्यों कहूं'
अमर उजाला/ दिल्ली
Updated Tue, 02 Dec 2014 12:50 PM IST
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अपदस्थ अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने उनकी कंपनी इंडिया सीमेंट्स में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
हालांकि श्रीनिवासन ने यह साफ जरूर कर दिया कि हितों के टकराव को लेकर उठ रहे सवालों के बावजूद वह धोनी को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहेंगे।
आईसीसी अध्यक्ष श्रीनिवासन ने आईपीएल-6 में स्पॉट फिक्सिंग पर भी कुछ कहने से इंकार कर दिया। श्रीनिवासन ने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में है और मैं इस पर कुछ भी नहीं बोल सकता। धोनी से जुड़े सवाल पर तो श्रीनिवासन भड़क गए और उन्होंने कहा कि "मुझे उन्हें इस्तीफा देने के लिए क्यों कहना चाहिए?"
सुप्रीम कोर्ट में जमा मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में श्रीनिवासन की भूमिका पर सवाल उठाया गया है। श्रीनिवासन ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि आईपीएल प्रकरण से भारतीय क्रिकेट की छवि खराब हुई है। उन्होंने कहा कि वह नहीं मानते कि इस प्रकरण से भारतीय क्रिकेट की छवि को छक्का पहुंचा है।
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हालांकि श्रीनिवासन ने यह साफ जरूर कर दिया कि हितों के टकराव को लेकर उठ रहे सवालों के बावजूद वह धोनी को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहेंगे।
आईसीसी अध्यक्ष श्रीनिवासन ने आईपीएल-6 में स्पॉट फिक्सिंग पर भी कुछ कहने से इंकार कर दिया। श्रीनिवासन ने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में है और मैं इस पर कुछ भी नहीं बोल सकता। धोनी से जुड़े सवाल पर तो श्रीनिवासन भड़क गए और उन्होंने कहा कि "मुझे उन्हें इस्तीफा देने के लिए क्यों कहना चाहिए?"
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सुप्रीम कोर्ट में जमा मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में श्रीनिवासन की भूमिका पर सवाल उठाया गया है। श्रीनिवासन ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि आईपीएल प्रकरण से भारतीय क्रिकेट की छवि खराब हुई है। उन्होंने कहा कि वह नहीं मानते कि इस प्रकरण से भारतीय क्रिकेट की छवि को छक्का पहुंचा है।
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श्रीनि ने खुद को बचाने को दिग्गजों पर उछाला कीचड़
आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में अपने को बचाने के लिए एन श्रीनिवासन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सारी सीमाएं लांघ गए। श्रीनिवासन की ओर से हितों के टकराव पर कहा गया है यह क्रिकेट का हिस्सा है। ख्याति प्राप्त खिलाड़ी सुनील गावस्कर, सौरव गांगुली, अनिल कुंबले, रवि शास्त्री, श्रीकांत जैसे खिलाड़ियों के भी दोहरे रोल रहते हैं।
यही नहीं आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स को खरीदे जाने पर उन्होंने कहा कि यह टीम खरीदने के लिए उन्हें ललित मोदी ने कहा था, जबकि इंडिया सीमेंट्स की ओर से यह टीम शरद पवार से पूछ कर खरीदी गई।
फिलहाल श्रीनिवासन की ओर से उनके अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों का दौर जारी है। मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार 8 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
यही नहीं आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स को खरीदे जाने पर उन्होंने कहा कि यह टीम खरीदने के लिए उन्हें ललित मोदी ने कहा था, जबकि इंडिया सीमेंट्स की ओर से यह टीम शरद पवार से पूछ कर खरीदी गई।
फिलहाल श्रीनिवासन की ओर से उनके अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों का दौर जारी है। मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार 8 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
बाकी लोगों पर भी है 'हितों में टकराव' का मामला
स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को आदित्य वर्मा की ओर से उनकी अधिवक्ता नलिनी चिदंबरम ने कहा कि बीसीसीआई के अधिकारियों ने आईपीएल में अपने आर्थिक फायदे के लिए अपने संविधान में संशोधन कराया। यही नहीं उन्होंने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए मीडिया अधिकार भी दिए।
श्रीनिवासन हितों के टकराव पर ही फंस रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी ओर से इसी को मुद्दा बनाया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि मुद्गल कमेटी की जांच हितों के टकराव को ध्यान में रखकर नहीं की गई है। यही नहीं याचिकाकर्ता ने भी कभी हितों के टकराव की बात को नहीं उठाया है।
दरअसल श्रीनिवासन को यह कहकर बचाने की कोशिश की जा रही है कि क्रिकेट में हितों के टकराव में अकेले श्रीनिवासन संलिप्त नहीं हैं। इसी लिए उनकी ओर से दिग्गज खिलाड़ियों के नाम लिए गए। उनकी दलील का मतलब यह है कि खिलाड़ी भी दोहरी भूमिका निभाते रहे हैं। गावस्कर और गांगुली कमेंटेटर भी हैं और बीसीसीआई की कमेटियों का हिस्सा भी हैं।
यही नहीं बीसीसीआई की ओर से इस मामले की जांच की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई, लेकिन न तो इस रिपोर्ट में तारीख थी और इसके कुछ पेज भी गायब थे। कोर्ट ने इस ओर भी उनका ध्यान दिलाया।
श्रीनिवासन हितों के टकराव पर ही फंस रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी ओर से इसी को मुद्दा बनाया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि मुद्गल कमेटी की जांच हितों के टकराव को ध्यान में रखकर नहीं की गई है। यही नहीं याचिकाकर्ता ने भी कभी हितों के टकराव की बात को नहीं उठाया है।
दरअसल श्रीनिवासन को यह कहकर बचाने की कोशिश की जा रही है कि क्रिकेट में हितों के टकराव में अकेले श्रीनिवासन संलिप्त नहीं हैं। इसी लिए उनकी ओर से दिग्गज खिलाड़ियों के नाम लिए गए। उनकी दलील का मतलब यह है कि खिलाड़ी भी दोहरी भूमिका निभाते रहे हैं। गावस्कर और गांगुली कमेंटेटर भी हैं और बीसीसीआई की कमेटियों का हिस्सा भी हैं।
यही नहीं बीसीसीआई की ओर से इस मामले की जांच की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई, लेकिन न तो इस रिपोर्ट में तारीख थी और इसके कुछ पेज भी गायब थे। कोर्ट ने इस ओर भी उनका ध्यान दिलाया।
फिर भी चुप हैं गावस्कर और शास्त्री
श्रीनिवासन ने सुप्रीम कोर्ट में यह साबित कर दिया कि अपने को बचाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह वही सुनील गावस्कर और रवि शास्त्री हैं जिन्होंने कभी भी सार्वजनिक तौर पर श्रीनिवासन के खिलाफ जुबान नहीं खोली।
गावस्कर का बयान आया भी तो उन्होंने अगले ही दिन इससे साफ तौर पर पल्ला झाड़ लिया। फिर श्रीनिवासन की कोर्ट में यह दलील और भी ज्यादा हैरान करती है कि वह अपनी तुलना उन दिग्गजों और महान खिलाड़ियों के साथ कर रहे हैं जिन्होंने कभी बीसीसीआई का न तो चुनाव लड़ा और न खुद बोर्ड या आईपीएल में अपने लिए जगह मांगने गए।
इसके ठीक उलट श्रीनिवासन बोर्ड के चुने गए अध्यक्ष हैं। फिर यह बीसीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ही था जिसने गावस्कर, शास्त्री, गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे दिग्गजों को शोभा बनाने के लिए इसका हिस्सा बनाया। अब इन्हीं को निशाना बनाकर श्रीनिवासन अपने को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
श्रीनिवासन के अधिवक्ता कपिल सिब्बल दिग्गजों का नाम लेकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि श्रीनिवासन जिस तरह बोर्ड अध्यक्ष और सीएसके के टीम ऑनर की दोहरी पदवी संभाल रहे हैं ठीक उसी तरह ये दिग्गज भी कभी बोर्ड या फिर आईपीएल गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा रहे हैं साथ ही क्रिकेट कमेंटरी से भी कमाते हैं। जब इन खिलाड़ियों का केस हितों के टकराव में नहीं आता है तो फिर श्रीनिवासन को भी इससे अलग किया जाना चाहिए?
गावस्कर का बयान आया भी तो उन्होंने अगले ही दिन इससे साफ तौर पर पल्ला झाड़ लिया। फिर श्रीनिवासन की कोर्ट में यह दलील और भी ज्यादा हैरान करती है कि वह अपनी तुलना उन दिग्गजों और महान खिलाड़ियों के साथ कर रहे हैं जिन्होंने कभी बीसीसीआई का न तो चुनाव लड़ा और न खुद बोर्ड या आईपीएल में अपने लिए जगह मांगने गए।
इसके ठीक उलट श्रीनिवासन बोर्ड के चुने गए अध्यक्ष हैं। फिर यह बीसीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ही था जिसने गावस्कर, शास्त्री, गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे दिग्गजों को शोभा बनाने के लिए इसका हिस्सा बनाया। अब इन्हीं को निशाना बनाकर श्रीनिवासन अपने को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
श्रीनिवासन के अधिवक्ता कपिल सिब्बल दिग्गजों का नाम लेकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि श्रीनिवासन जिस तरह बोर्ड अध्यक्ष और सीएसके के टीम ऑनर की दोहरी पदवी संभाल रहे हैं ठीक उसी तरह ये दिग्गज भी कभी बोर्ड या फिर आईपीएल गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा रहे हैं साथ ही क्रिकेट कमेंटरी से भी कमाते हैं। जब इन खिलाड़ियों का केस हितों के टकराव में नहीं आता है तो फिर श्रीनिवासन को भी इससे अलग किया जाना चाहिए?