रहाणे को बाहर करना फिर भारी पड़ रहा है कप्तान धोनी पर!
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कभी टीम इंडिया को पहले टी-20 और फिर वनडे क्रिकेट का विश्व चैंपियन बनवाने वाले महेंद्र सिंह धोनी एक बार संकट में दिख रहे हैं। लंबी छुट्टी के बाद धोनी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और पहली ही सीरीज गंवा बैठे।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ धोनी की टीम इंडिया को दोनों टी-20 मुकाबलों में करारी हार का सामना करना पड़ा। इन 2 हार से टीम इंडिया ने 3 मैचों की टी-20 सीरीज से भी हाथ धोना पड़ गया है।
देखा जाए तो धोनी की टीम ने धर्मशाला में खेले गए पहले मैच में शानदार खेल दिखाया था लेकिन गेंदबाजों की नाकामी के कारण भारत वह मैच हार गया। भारतीय टीम के प्रशंसकों को उम्मीद थी कि टीम दूसरे मैच (कटक) में अच्छा खेल दिखाएगी लेकिन वहां तो पहले ही मैच से ज्यादा बुरा हाल था और 18 ओवर से पहले ही पूरी टीम आउट हो गई। इस हार के लिए जहां टीम इंडिया जिम्मेदार है तो वहीं खुद धोनी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। खासकर टीम चयन में, वह कुछ ज्यादा ही अडियल रवैया अपना रहे हैं।
अब अजीबोगरीब फैसले ले रहे हैं कप्तान धोनी!
भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के पास अब 7-8 सालों का लंबा कप्तानी का अनुभव है लेकिन कई बार वह निर्णय लेने में एक नए कप्तान की तरह व्यवहार करते नजर आते हैं।
दक्षिण अफ्रीका को दुनिया की सबसे मजबूत टीम के रूप में आंका जाता है और उसके सामने धोनी को एक मजबूत और जूझारू टीम उतारनी चाहिए थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके। उनकी सबसे बड़ी चूक इन दोनों ही मैचों में अजिंक्य रहाणे जैसे बल्लेबाज को टीम से बाहर रखना था। पहले मैच में रोहित शर्मा के शतक से टीम 199 तक पहुंच गई लेकिन दूसरे मैच में टीम 100 के पार भी नहीं जा सकी।
ये धोनी ही बता सकते हैं कि वह बार-बार रहाणे जैसे बल्लेबाज को क्यों टीम से बाहर रख रहे हैं। रहाणे उन बल्लेबाजों में हैं जो तीनों ही प्रारूपों में बड़ी पारी खेलने में माहिर हैं। रहाणे की तुलना में धोनी ने अंबाती रायडु पर दांव लगाया और वह दोनों ही बार नाकाम रहे। रायडु दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दोनों ही टी-20 मैचों में अपना खाता भी नहीं खोल सके हैं।
और यह तब है जब अफ्रीकी टीम ने टी-20 मैचों के लिए दिग्गज गेंदबाजों के बजाए कम चर्चित गेंदबाजों को मैदान पर उतारा है। फिर भी वे लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। कटक में अच्छी शुरुआत के बाद भारतीय पारी बुरी तरह से लड़खड़ा गई थी।
रहाणे को बार-बार क्यों बाहर कर देते हैं धोनी
ऐसा नहीं है कि कप्तान धोनी ने अजिंक्य रहाणे को पहली बार टीम इंडिया से बाहर किया है। जून में बांग्लादेश दौरे के दौरान भी धोनी ने रहाणे को वनडे सीरीज से बाहर बैठाया था और परिणामस्वरुप भारत पहली बार बांग्ला टीम से सीरीज ही हार गई। अब यही हाल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी हो रहा है। रहाणे को बाहर करना टीम के लिए हितकर नहीं दिख रहा।
बांग्लादेश दौरे के दौरान जब धोनी ने रहाणे को टीम से बाहर किया था तो उनका कहना था कि वह धीमी पिच पर खेलने में सक्षम नहीं हैं लेकिन बाद में रहाणे ने लगातार अच्छी पारियां खेली जिसने दिखाया कि उन्हें टीम से बाहर करने का धोनी का फैसला सही नहीं था।
रहाणे ने हाल ही में श्रीलंका दौरे के दौरान 2 शतक भी जमाए थे जिसमें एक अभ्यास मैच में था जबकि दूसरा टेस्ट मैच में ठोंका था। बांग्लादेश दौरे के बाद रहाणे को बतौर कप्तान जिम्बाव्वे दौरे पर भेजा गया था जहां वह कप्तान और बल्लेबाज दोनों ही भूमिकाओं में बेहद कामयाब रहे। लेकिन धोनी की रहाणे के प्रति उदासीनता का क्या कारण है यह तो वही बता सकते हैं लेकिन रहाणे को बार-बार टीम से बाहर करना टीम के हित में जाता नहीं दिख रहा।
धोनी ने अभी बहुत कुछ नहीं गंवाया है वह रहाणे पर विश्वास कायम रख सकते हैं। बांग्लादेश के खिलाफ वनडे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज गंवाने के बाद धोनी को बहुत ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए। रहाणे टीम के संकटमोचक हैं और वह हर नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं, टी-20 सीरीज खोने के बाद अगर धोनी चाहते हैं कि वनडे सीरीज में टीम इंडिया को ज्यादा नुकसान न हो तो उन्हें इस बल्लेबाज पर भरोसा बनाना ही होगा।