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हॉकी के देश भारत में 25 जून 1983 से क्रिकेट का खेल बन गया था जुनून

Tue, 25 Jun 2019 04:02 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Tue, 25 Jun 2019 04:02 PM IST
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This day that year, team India won first world cup under captaincy of Kapil Dev
1983 विश्व कप विजेता कपिल देव - फोटो : अमर उजाला

1975-79 के शुरुआती दो विश्व कप खेलने वाले हर भारतीय खिलाड़ी के जेहन में सिर्फ यही बात होती थी। अधिकतक बैचलर ही थे तो दिमाग में सिर्फ पेड विदेश यात्रा ही घुम रही होती थी। मगर 1983 में बात कुछ और थी। टीम के अगुवा थे कपिल देव। सामान्य गुण वाला एक असामान्य आदमी। ऑरा ऐसा कि मुर्दे में भी जान फूंक दे। कपिल ने इस टीम के खिलाड़ियों को लड़ना सिखाया। जूझना सिखाया। किसान परिवार से आने वाले कपिल, टीम मीटिंग में अचानक टूटी-फूटी अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल करने लगे। 'सुनील यू बैट. चीका, हैव टू हीट, जिम्मी पा, यू स्टे. यश, प्ले विदाउट फीयर' सैंडी, यू बीकम अ लायन। कीरी यू कीप।'

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This day that year, team India won first world cup under captaincy of Kapil Dev
कपिल देव 1983 - फोटो : अमर उजाला

सिलसिला पहले मैच से फाइनल तक चलता गया। टीम में अलग विश्वास जागा। खिलाड़ी यकीं करने लगे कि हम किसी को भी हरा सकते हैं। शायद यही कारण है कि जब-जब विश्व क्रिकेट में अंडरडॉग की सफलता की कहानी बयां की जाएगी भारतीय टीम का नाम सभी के जेहन में सबसे ऊपर तैरेगा। किसी ने नहीं सोचा था कि तीनों प्रैक्टिस गेम तक हार जाने वाली टीम कभी विश्व कप के फाइनल तक भी पहुंच पाएगी।

जानलेवा तेज गेंदबाजों से सजी लगातार दो बार की विजेता वेस्टइंडीज को हरा पाएगी। यहां तक कि सटोरियों ने भी भारत को खिताब से कोसों दूर रखते हुए उस पर 66-1 का सट्टा लगाया था। हॉकी के इस देश में पहली बार क्रिकेट का बीज बोए हुए आज 36 साल हो गए। आज ही के दिन 1983 में भारतीय टीम ने अपना पहला विश्व कप जीता था। देश का युवा हॉकी की बजाय क्रिकेट की ओर आकर्षित होने लगा।

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कपिल देव (वर्ल्ड कप 1983) - फोटो : twitter

फाइनल में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 54.4 ओवर्स में महज 183 रन पर ढेर हो गई। कैरेबियाई टीम तो अपनी जीत के लिए इतनी आश्वसत थी कि पार्टी की भी सारी व्यवस्था पहले ही कर चुकी थी। मगर यह कपिल की कप्तानी का ही जादू था किक्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स, डेसमंड हेन्स जैसे दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज की टीम के 7 खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके थे? उस ऐतिहासिक जीत के बाद टीम इंडिया ने अपने ड्रेसिंग रूम में जमकर जश्न मनाया था।

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1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव - फोटो : अमर उजाला

बकौल मदन लाल, 'कपिल वर्ल्ड कप फाइनल जीतने के बाद वेस्टइंडीज के ड्रेसिंग रूम में सभी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने पहुंचे। उस कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था। उन्हें वहां शैम्पेन की बोतलें दिखाई दे रही थीं। भारत को 183 में समेटने के बाद वेस्टइंडीज ने अपनी जीत सुनिश्चित मानते हुए ढेर सारी शैम्पेन मंगवा ली थी। जो उनकी हार के बाद किसी काम की नहीं थी।

कपिल देव ने लॉयड से पूछा, 'क्या मैं शैम्पेन की कुछ बोतलें ले जा सकता हूं? हमने एक भी नहीं मंगवाई है'। क्लाइव ने कपिल को इशारा भर किया और जाकर एक कोने में बैठ गए। कपिल और मोहिंदर अमरनाथ ने बोतलें उठाईं और टीम इंडिया ने पूरी रात जश्न मनाया।

जश्न में डूबे भारतीय खिलाड़ियों को हालांकि उस रात खाना नसीब नहीं हुआ था। दरअसल, किचन रात 9 बजे बंद हो जाते थे। जश्न मनाने के बाद जब भारतीय टीम होटल पहुंची, तो खाना खत्म हो चुका था, फिर टीम को भूखे ही सोना पड़ा।

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