क्या क्रिकेट खेला? 15 पर ऑलआउट होने के बाद बनाए 521 रन
क्रिकेट के मैच में बल्लेबाजी करने वाली हर टीम चाहती है कि उसे अच्छी शुरुआत मिले, अच्छी शुरुआत से टीम बड़े स्कोर की ओर जाती है जिससे विपक्षी टीम पर दबाव बने और मैच पर उसकी पकड़ बनी रहे।
पर कई बार यह योजना फ्लॉप हो जाती है और पहले से तय योजना के मुताबिक खिलाड़ी नहीं खेल पाते हैं। ऐसा होने पर टीम संकट में घिर जाती है। हालांकि कभी-कभी खराब शुरुआत के बाद मध्य क्रम या पुछल्ले बल्लेबाजों के दम पर टीम संकट से उबर जाती है और विपक्षी टीम को धूल चटाने में कामयाब हो जाती है।
ऐसा ही एक अजीबोगरीब मुकाबला हुआ जिसमें एक टीम महज 15 रन पर सिमट गई। इस तरह से वह पहली पारी में 208 रनों के बड़े अंतर से पिछड़ भी गई। फॉलोआन खेलने को मजबूर हुई इस टीम की दूसरी पारी में भी खराब शुरुआत रही और 6 विकेट महज 177 रन पर गिर गए थे। लेकिन यहां से टीम ने ऐतिहासिक अंदाज में खेलते हुए वापसी की और 155 रनों की बड़ी जीत हासिल कर ली।
महज 9 ओवर में ही ऑलआउट हो गई टीम
यह दिलचस्प मुकाबला खेला गया इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में। काउंटी क्रिकेट के एक मुकाबले में वारविकशायर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 223 रन बनाए। इसके बाद खेलने की बारी आई हैंपशायर की लेकिन पारी शुरू होते ही टीम लड़खड़ा गई।
पहला ओवर तो आसानी से निकल गया लेकिन दूसरे ओवर की तीसरी गेंद से विकेटों के गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ जो जल्द ही खत्म हो गया, यानी 8.5 ओवर में पूरी टीम पवेलियन लौट गई। टीम सिर्फ 15 रन बनाकर आउट हो गई। उसके 7 विकेट महज 10 रन पर गिर गए। 3 बल्लेबाज ही अपना खाता खोलने में कामयाब रहे जिसमें फिल मीड ने सबसे ज्यादा 6 रन बनाए।
वारविकशायर के सिर्फ 2 गेंदबाजों ने ही पूरी टीम समेट दी। हैरी हॉवेल ने 6 और फ्रेडी कॉलथोर्पे ने 4 विकेट झटके।
पहली पारी के आधार पर वारविकशायर को 208 रनों की बढ़त मिली और उसने हैंपशायर को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर किया। लेकिन फॉलोऑन के बाद भी हैंपशायर की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और 6 विकेट 177 रनों पर गिर गए थे।
10वें विकेट के लिए हुई 177 रनों की साझेदारी ने बचाया
फॉलोऑन खेलने को मजबूर हुई हैंपशायर की टीम दूसरी पारी में भी लड़खड़ाती दिखाई दी और उसके 6 विकेट 177 रनों पर गिर गए। टीम पर पारी से हार का खतरा मंडराने लगा था।
मध्य क्रम के बल्लेबाज जॉर्ज ब्राउन ने नौंवें और 10वें नंबर के बल्लेबाजों के साथ बड़ी साझेदारी कर टीम को संकट से बाहर निकाल दिया। ब्राउन ने नौंवें विकेट के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज वाल्टर लिवसे के साथ 177 रनों की साझेदारी टीम को साढ़े चार सौ के पार पहुंचा दिया। इसके बाद 10वें विकेट के लिए 70 रनों की साझेदारी हुई जिससे टीम 521 रन बनाकर आउट हो गई।
टीम को अच्छी स्थिति में पहुंचाने वाले ब्राउन ने 172 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली जबकि विकेटकीपर -बल्लेबाज लिवसे 110 रन बनाकर नाबाद रहे।
इस तरह से हैंपशायर ने वारविकशायर के सामने जीत के लिए 314 रनों का बड़ा लक्ष्य रखा। लेकिन उसके गेंदबाजों ने विपक्षी टीम पर कहर बरपाते हुए 158 रनों पर ही समेट दिया। इस तरह से हैंपशायर ने वह मैच 155 रनों के बड़े अंतर से जीत लिया जहां उस पर पारी की हार का संकट मंडरा रहा था।
यह क्रिकेट के लिहाज से एक ऐतिहासिक मैच है। हालांकि यह आज से 93 साल पहले खेला गया था। 14 जून से 16 जून, 1922 तक खेले गए मैच में हैंपशायर के पुछल्ले बल्लेबाजों ने गजब का साहस दिखाकर खुद को इतिहास बुक में दर्ज करा ही लिया।
हालांकि इस मैच के साथ एक विवाद भी जुड़ा हुआ है कि वारविकशायर के कप्तान फ्रेडी कालथोर्पे को उनकी कमिटी ने इस बात का दबाव डाला था कि वह जल्द नई गेंद न लें जिससे कि खेल लंबा चल सके और विपक्षी टीम अपने खेल में सुधार ला सके। इस कारण टीम को खासा नुकसान हुआ और टीम को बड़ी का हार का सामना करना पड़ गया।