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खेल रत्न नहीं बन सके कोहली, आखिरी समय में हुए बोल्ड
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 22 Aug 2016 10:44 PM IST
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विराट कोहली
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भारतीय क्रिकेट टीम की 'रन मशीन' विराट कोहली राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार हासिल नहीं कर सके। पुरस्कार की दौड़ में वह पीवी सिंधू, साक्षी मलिक, दीपा कर्माकर और जीतू राय से पिछड़ गए और उन्हें 2016 के प्रतिष्ठित खेल अवार्ड के लिए नहीं चुना गया।
रियो ओलंपिक से पहले कोहली ही इस पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार थे लेकिन ओलंपिक में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के कारण 12 वें दिन तक उनकी दावेदारी बनी हुई थी। लेकिन एक ही दिन में साक्षी मलिक द्वारा कुश्ती में कांस्य और पीवी सिंधू द्वारा बैडमिंटन में रजत पदक जीतने के अचानक कोहली की दावेदारी कमजोर हो गई।
वहीं दूसरी तरफ रियो में जिम्नास्टिक के फाइनल में पहुंचने वाली दीपा कर्माकर का नाम बगैर आवेदन खेल रत्न पुरस्कार की सूची में शामिल कर लिया गया। दीपा के लिए खेल मंत्रालय की सिफारिश काम कर गई।, लेकिन कमेटी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि दीपा ने जो काम रियो में करके दिखाया है उसका देशवासियों पर जबरदस्त असर पड़ा है। साथ ही सेवानिवृत्त जज एसके अग्रवाल की अगुवाई वाली चयन समिति ने यह फैसला लिया कि जो भी खिलाड़ी रियो में पदक जीतकर लाएगा उसे खेल रत्न पुरस्कार दिया जाएगा।
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जीतू राय भी शुरुआत से इस पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार थे। जीतू ने रियो में 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल तक का सफर किया था। इसके पहले पिछले साल अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में उनके बेहतरीन प्रदर्शन पुरस्कार की दौड़ में बनाए रखा।
वहीं पिछले साल बल्ले से कमाल दिखाने वाले टेस्ट कप्तान विराट कोहली अंकों के मामले में जीतू राय को नहीं पछाड़ पाए। कमेटी ने यह भी कहा कि विराट का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन उतना उल्लेखनीय नहीं रहा है, जितना टी-20 और वनडे में फिर विराट अपने प्रदर्शन से यह पुरस्कार आगे भी जीत सकते हैं।
अब तक खेल रत्न पुरस्कार दो क्रिकेटरों को दिया जा चुका है। साल 1996-97 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर इसे पुरस्कार से नवाजे जाने वाले पहले क्रिकेटर थे। इसके बाद साल 2007 में महेंद्र सिंह धौनी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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रियो ओलंपिक से पहले कोहली ही इस पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार थे लेकिन ओलंपिक में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के कारण 12 वें दिन तक उनकी दावेदारी बनी हुई थी। लेकिन एक ही दिन में साक्षी मलिक द्वारा कुश्ती में कांस्य और पीवी सिंधू द्वारा बैडमिंटन में रजत पदक जीतने के अचानक कोहली की दावेदारी कमजोर हो गई।
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वहीं दूसरी तरफ रियो में जिम्नास्टिक के फाइनल में पहुंचने वाली दीपा कर्माकर का नाम बगैर आवेदन खेल रत्न पुरस्कार की सूची में शामिल कर लिया गया। दीपा के लिए खेल मंत्रालय की सिफारिश काम कर गई।, लेकिन कमेटी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि दीपा ने जो काम रियो में करके दिखाया है उसका देशवासियों पर जबरदस्त असर पड़ा है। साथ ही सेवानिवृत्त जज एसके अग्रवाल की अगुवाई वाली चयन समिति ने यह फैसला लिया कि जो भी खिलाड़ी रियो में पदक जीतकर लाएगा उसे खेल रत्न पुरस्कार दिया जाएगा।
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जीतू राय भी शुरुआत से इस पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार थे। जीतू ने रियो में 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल तक का सफर किया था। इसके पहले पिछले साल अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में उनके बेहतरीन प्रदर्शन पुरस्कार की दौड़ में बनाए रखा।
वहीं पिछले साल बल्ले से कमाल दिखाने वाले टेस्ट कप्तान विराट कोहली अंकों के मामले में जीतू राय को नहीं पछाड़ पाए। कमेटी ने यह भी कहा कि विराट का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन उतना उल्लेखनीय नहीं रहा है, जितना टी-20 और वनडे में फिर विराट अपने प्रदर्शन से यह पुरस्कार आगे भी जीत सकते हैं।
अब तक खेल रत्न पुरस्कार दो क्रिकेटरों को दिया जा चुका है। साल 1996-97 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर इसे पुरस्कार से नवाजे जाने वाले पहले क्रिकेटर थे। इसके बाद साल 2007 में महेंद्र सिंह धौनी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।