इन 5 लोगों ने मिलकर चुनी World Cup 2019 के लिए टीम इंडिया, जानिए खुद कितना खेले?
- 46 दिन में इंग्लैंड और वेल्स के 11 मैदानों पर 10 टीमों के बीच होंगे 48 मुकाबले
- 30 मई इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले के साथ शुरू होगा विश्व कप
- 05 जून को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अभियान शुरू करेगी टीम इंडिया
- 14 जुलाई को लॉर्ड्स मैदान पर खेला जाएगा फाइनल मुकाबला
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विस्तार
भारत जैसे देश में जहाँ क्रिकेट गली-गली में खेला जाता है, गेंद-बल्ले के इस खेल की लोकप्रियता का आलम ये है कि एक तरफ मैच चल रहा होता है और दूसरी तरफ स्टेडियम में या टीवी से चिपककर मैच देख रहा तकरीबन हर शख्स अपना एक्सपर्ट कमेंट दे रहा होता है।
ऐसे में तो उन लोगों की जिम्मेदारी का अंदाजा लगाया ही जा सकता है कि तीसरी बार भारत को विश्व चैंपियन बनाने के इरादे से सात समंदर पार भेजी जा रही टीम चुनने का दारोमदार जिन व्यक्तियों पर था, वो अपने 'टेस्ट' में कामयाब हुए या नहीं।
टीम के चयन का जिम्मा बीसीसीआई की राष्ट्रीय चयन समिति पर था और इसकी अगुवाई कर रहे थे एमएसके प्रसाद के अलावा समिति में देवांग गांधी, शरणदीप सिंह, जतिन परांजपे और गगन खोड़ा शामिल रहे।
दिलचस्प ये है कि वन-डे की दुनिया के सबसे अहम टूर्नामेंट वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया का चयन करने वाले इन पंचों का वनडे इंटरनेशनल का बहुत अधिक अनुभव नहीं है। एमएसके प्रसाद एंड कंपनी का वन-डे अनुभव देखा जाए तो पाँचों ने कुल मिलाकर सिर्फ 31 वनडे मैच खेले हैं और इनमें से किसी को वर्ल्ड कप में खेलने का मौका भी नहीं मिला। तो एक नजर चयन समिति के उन 'पंचों' पर जिन्होंने वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया का चयन किया।
एमएसके प्रसाद- मुख्य चयनकर्ता
43 साल के मन्नवा श्रीकांत प्रसाद आंध्र प्रदेश के गुंटूर में पैदा हुए। विकेटकीपर बल्लेबाज रहे प्रसाद ने आंध्र प्रदेश की तरफ से प्रथम श्रेणी मैचों में छह शतक जरूर लगाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन दमदार नहीं रहा।
कुल जमा छह टेस्ट और 17 वनडे मैचों का अनुभव एमएसके प्रसाद के पास है। प्रसाद ने वन-डे मैचों में 14.55 के मामूली औसत से 131 रन बनाए और उनका उच्चतम स्कोर रहा 63 रन। विकेट के पीछे उन्होंने 14 कैच लपके और सात मर्तबा अपनी फुर्ती से बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया।
प्रसाद ने 14 मई 1998 को मोहाली में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अपने वन-डे करियर की शुरुआत की थी। उस मैच में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। मुकाबले में उन्होंने ना तो कोई कैच लपका और न ही वो कोई स्टंपिंग कर सके।
इसे संयोग ही कहा जाएगा कि प्रसाद का आखिरी वनडे मुकाबला भी पहले मैच की तरह ही फीका रहा। दिल्ली में 17 नवंबर 1998 को वो आखिरी बार भारत की वन-डे टीम से खेले और उस मैच में भी ना तो उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिला, न ही कोई कैच या स्टंपिंग ही उनके खाते में आई।
देवांग गांधी
47 साल के देवांग जयंत गांधी को कुछ जमा 4 टेस्ट और तीन वनडे मुकाबलों का अनुभव है। देवांग को 17 नवंबर 1999 को टीम इंडिया की वन-डे कैप मिली थी। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ बतौर सलामी बल्लेबाज उतरे देवांग अपनी पारी को 30 रन से आगे नहीं बढ़ा सके थे।
बंगाल की तरफ से खेलने वाले देवांग ने तीन वनडे मैचों में 16.33 के मामूली औसत से 49 रन बनाए। उनका वन-डे करियर ढ़ाई महीने से अधिक नहीं खिंच सका और 30 जनवरी 2000 को उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ में अपना आख़िरी वनडे मैच खेला।
शरणदीप सिंह
पंजाब के अमृतसर में जन्में शरणदीप सिंह का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी कुछ खास नहीं है। दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज रहे शरणदीप सिंह को कुल जमा 3 टेस्ट और 5 वन-डे मैचों का अनुभव है। शरणदीप ने 5 वन-डे मैचों में 15.66 की औसत से 47 रन बनाए हैं।
31 जनवरी 2002 को दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ अपने वन-डे करियर की शुरुआत करने वाले शरणदीप अपना करियर 18 अप्रैल 2003 से अधिक नहीं खींच सके और ढाका में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुक़ाबला उनका आख़िरी वन-डे इंटरनेशनल मैच साबित हुआ। शरणदीप ने घरेलू मैचों में पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
जतिन परांजपे
मुंबई के जतिन परांजपे का प्रथम श्रेणी मैचों में 46 से अधिक का औसत रहा, लेकिन वो भारत के लिए सिर्फ चार वन-डे मैच ही खेल सके। परांजपे ने 28 मई 1998 को ग्वालियर में कीनिया के खिलाफ पहला वन-डे मैच खेला था, लेकिन चोट के कारण वो अपना करियर लंबा नहीं खींच सके। परांजपे ने अपना चौथा और आखिरी वन-डे पाकिस्तान के खिलाफ टोरंटो में खेला। इस मैच में वो सिर्फ एक रन ही बना सके थे।
गगन खोड़ा
दाएं हाथ के बल्लेबाज गगन खोड़ा ने घरेलू क्रिकेट में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। 1991-92 में अपने पहले ही रणजी मैच में खोड़ा ने शतक जड़कर सुर्खियां बटोरी थी।
प्रथम श्रेणी मैचों में 300 का उच्चतम स्कोर बनाने वाले खोड़ा का अंतरराष्ट्रीय करियर दो वन-डे मैचों से आगे नहीं बढ़ सका। खोड़ा ने अपना पहला मैच 14 मई 1998 को बांग्लादेश के खिलाफ मोहाली में खेला था।