{"_id":"588870634f1c1b476fcf43f8","slug":"kedar-the-last-over-that-my-sleepless","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जानिए, उस अंतिम ओवर के बारे में क्या कहते हैं केदार जाधव?","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
जानिए, उस अंतिम ओवर के बारे में क्या कहते हैं केदार जाधव?
बीबीसी हिंदी. कॉम के लिए
Updated Wed, 25 Jan 2017 09:55 PM IST
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भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए बल्लेबाज केदार जाधव ने बीबीसी के साथ विशेष फेसबुक लाइव में अपनी क्रिकेट और जिंदगी के बारे में बातें की।पेश हैं बीबीसी संवाददाता सुशांत मोहन के साथ केदार जाधव की इस बातचीत के मुख्य अंशः-
केदार जाधव तेजी से रन बनाते हैं और बांउड्री मारना उनका शगल है। इस बारे में उन्होंने कहा, "मैं नैचुरल स्ट्रोक मेकर हूं। रणजी ट्रॉफी का मैच हो, टी-20 हो या वनडे मैं स्ट्रोक खेलने की ही कोशिश करता हूं। हम पिच पर रन बनाने ही जाते हैं। आप चाहे कम बॉल लें या ज्यादा। मुझे नहीं लगता कि मैं टी-20 की वजह से ऐसा हूं।
मैं नैचुरली ही स्ट्रोक मेकर हूं।" अपने क्रिकेट के सफर के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "क्रिकट का सफर मेरा बहुत लंबा था। मैंने दसवीं के बाद प्रोफेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया। मुझे भारतीय टीम तक पहुंचने में करीब 13 साल लग गए। मैंने भारतीय टीम के लिए जो भी त्याग किया अब उसका फल मिल रहा है। मैंने अंततः भारत के लिए खेलने का अपना सपना पूरा कर लिया है। मेरे परिजनों को मुझ पर गर्व है और मैं इससे बहुत खुश हूं।"
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केदार जाधव तेजी से रन बनाते हैं और बांउड्री मारना उनका शगल है। इस बारे में उन्होंने कहा, "मैं नैचुरल स्ट्रोक मेकर हूं। रणजी ट्रॉफी का मैच हो, टी-20 हो या वनडे मैं स्ट्रोक खेलने की ही कोशिश करता हूं। हम पिच पर रन बनाने ही जाते हैं। आप चाहे कम बॉल लें या ज्यादा। मुझे नहीं लगता कि मैं टी-20 की वजह से ऐसा हूं।
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मैं नैचुरली ही स्ट्रोक मेकर हूं।" अपने क्रिकेट के सफर के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "क्रिकट का सफर मेरा बहुत लंबा था। मैंने दसवीं के बाद प्रोफेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया। मुझे भारतीय टीम तक पहुंचने में करीब 13 साल लग गए। मैंने भारतीय टीम के लिए जो भी त्याग किया अब उसका फल मिल रहा है। मैंने अंततः भारत के लिए खेलने का अपना सपना पूरा कर लिया है। मेरे परिजनों को मुझ पर गर्व है और मैं इससे बहुत खुश हूं।"
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केदार कहते हैं कि मौकों के कामयाबी में बदलना ही क्रिकेट में सफलता दिलाता है। उन्होंने कहा, "अगर आपमें काबिलियत है तो आपको मौके मिलेंगे उन्हें आप जितने कम समय में कामयाबी में बदल लोगे उतना ही ज्यादा बेहतर है। आपको लगातार ज्यादा रन बनाने होंगे ऐसा करके आप वो पा लेंगे जो आप चाहते हो।" उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में जगह बनाना बहुत ही मुश्किल काम है।
उन्होंने कहा, "भारत की आबादी बहुत ज्यादा है इसलिए टीम में पहुँचने के लिए कम्पीटशन भी बहुत है। मुझे पहले भी मौके मिले थे लेकिन मैं उन्हें कामयाबी में नहीं बदल सका लेकिन न्यूजीलैंड के साथ पिछली सिरीज में मैंने उन मौकों को भुनाया और अब मुझमें बहुत आत्मविश्वास है।
मैं बहुत खुश हूं कि मैं देश को मैच जिता पाया" इंग्लैंड के खिलाफ कोलकाता में हुए आखिरी वनडे मैच में केदार क्रीज पर थे। उन्होंने तेजी से रन बनाए लेकिन अंतिम ओवर में वो जरूरी रन नहीं बना सके। उस ओवर को याद करते हुए केदार कहते हैं, "मुझे नींद नहीं आती है जब मैं उस मैच के बारे में सोचता हूं।"
उन्होंने कहा, "भारत की आबादी बहुत ज्यादा है इसलिए टीम में पहुँचने के लिए कम्पीटशन भी बहुत है। मुझे पहले भी मौके मिले थे लेकिन मैं उन्हें कामयाबी में नहीं बदल सका लेकिन न्यूजीलैंड के साथ पिछली सिरीज में मैंने उन मौकों को भुनाया और अब मुझमें बहुत आत्मविश्वास है।
मैं बहुत खुश हूं कि मैं देश को मैच जिता पाया" इंग्लैंड के खिलाफ कोलकाता में हुए आखिरी वनडे मैच में केदार क्रीज पर थे। उन्होंने तेजी से रन बनाए लेकिन अंतिम ओवर में वो जरूरी रन नहीं बना सके। उस ओवर को याद करते हुए केदार कहते हैं, "मुझे नींद नहीं आती है जब मैं उस मैच के बारे में सोचता हूं।"
आम जीवन में केदार क्रिकेट पर बात नहीं करते हैं बल्कि उन्हें फिल्मों और फुटबॉल पर बात करना पसंद है। उन्होंने कहा, "मैं क्रिकेट के बारे में बहुत कम बात करता हूं। मुझे अपनी लाइफ ज्यादा नहीं बदलनी है। हालांकी पहले जैसे बने रहना मेरे लिए मुश्किल है। मैं अपने परिवार से क्रिकेट के बारे में बात नहीं करता बल्कि फुटबॉल और सिनेमा के बारे में ज्यादा बात करता हूं।"
जब उनसे ड्रेसिंग रूम के माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "रविंद्र जडेजा माहौल को बहुत हलका रखते हैं। हारने के बाद सबको दुख होता है लेकिन आपको हार से आगे बढ़कर अगले मैच की ओर देखना होता है। जीतने पर हम ज्यादा खुश नहीं हो सकते और हारने पर ज्यादा दुखी नहीं हो सकते। मेरे लिहाज से टीम में सबसे ज्यादा मजेदार जड्डू हैं।"
केदार कहते हैं कि मैं अपने खेल को बहुत एंजॉय करता हूँ और इसे लंबे समय तक एंजॉय करना चाहता हूँ। उन्होंने कहा, "मैं मैदान पर बल्लेबाजी को ज्यादा एंजॉय करता हूँ क्योंकि मुझे बल्लेबाजी ज्यादा देर मिलती है गेंदबाजी कम देर के लिए मिलती है। मुझे हमेशा से ही गेंद को पार्क के बाहर भेजने में मजा आता है। मैं जब भी चौका या छक्का जड़ता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।"
जब उनसे ड्रेसिंग रूम के माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "रविंद्र जडेजा माहौल को बहुत हलका रखते हैं। हारने के बाद सबको दुख होता है लेकिन आपको हार से आगे बढ़कर अगले मैच की ओर देखना होता है। जीतने पर हम ज्यादा खुश नहीं हो सकते और हारने पर ज्यादा दुखी नहीं हो सकते। मेरे लिहाज से टीम में सबसे ज्यादा मजेदार जड्डू हैं।"
केदार कहते हैं कि मैं अपने खेल को बहुत एंजॉय करता हूँ और इसे लंबे समय तक एंजॉय करना चाहता हूँ। उन्होंने कहा, "मैं मैदान पर बल्लेबाजी को ज्यादा एंजॉय करता हूँ क्योंकि मुझे बल्लेबाजी ज्यादा देर मिलती है गेंदबाजी कम देर के लिए मिलती है। मुझे हमेशा से ही गेंद को पार्क के बाहर भेजने में मजा आता है। मैं जब भी चौका या छक्का जड़ता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।"
भारतीय टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "भारतीय टीम का माहौल इस समय बहुत ही मजेदार है। बड़े खिलाड़ी हमारे साथ छोटे भाई की तरह व्यवहार करते हैं। बहुत बार मुझे यकीन नहीं होता कि मैं इतने सालों से जिनको टीवी पर देखता आ रहा था उनके साथ मैं ड्रेसिंग रूम शेयर कर रहा हूं।
मैं अभी अपने वक्त को बहुत एंजॉय कर रहा हूं। बस पूरी कोशिश यही है कि ज्यादा से ज्यादा मैच टीम को जिता पाऊं।" भारतीय टीम में अहम जगह बनाने के बाद जिंदगी कितनी बदल गई है इस सवाल पर केदार कहते हैं। "जब मैंने पहला शतक लगाया तो बहुत से स्थानीय नेता और पत्रकार घर आएं। मेरी पिता 70 साल के हैं और मां 60 साल की हैं ।
वो बहुत ही साधारण व्यक्ति हैं वो सबसे मिल लेते हैं। वो किसी को मना नहीं कर पाएंगे लेकिन लोगों को थोड़ा समझना चाहिए कि मेरे परिजनों की भी निजता है। धीरे-धीरे वो भी समझ लेंगे। इतने लोग मिलने आ रहे हैं ये उनके लिए बहुत ही अच्छा अहसास है।"
मैं अभी अपने वक्त को बहुत एंजॉय कर रहा हूं। बस पूरी कोशिश यही है कि ज्यादा से ज्यादा मैच टीम को जिता पाऊं।" भारतीय टीम में अहम जगह बनाने के बाद जिंदगी कितनी बदल गई है इस सवाल पर केदार कहते हैं। "जब मैंने पहला शतक लगाया तो बहुत से स्थानीय नेता और पत्रकार घर आएं। मेरी पिता 70 साल के हैं और मां 60 साल की हैं ।
वो बहुत ही साधारण व्यक्ति हैं वो सबसे मिल लेते हैं। वो किसी को मना नहीं कर पाएंगे लेकिन लोगों को थोड़ा समझना चाहिए कि मेरे परिजनों की भी निजता है। धीरे-धीरे वो भी समझ लेंगे। इतने लोग मिलने आ रहे हैं ये उनके लिए बहुत ही अच्छा अहसास है।"