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'सहवाग को क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में होना चाहिए'

Tue, 12 Mar 2013 05:52 PM IST
मुंबई/ब्यूरो
मुंबई/ब्यूरो Updated Tue, 12 Mar 2013 05:52 PM IST
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jy lele calls for virender sehwag's inclusion in team india

बीसीसीआई के पूर्व सचिव जयवंत लेले का कहना है कि टीम से बाहर किए गए मैच विनर ओपनर वीरेंद्र सहवाग को क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम में शामिल किया जाना चाहिए।

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उन्होंने यह बात विजय हजारे की 98वीं जयंती पर क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में ‘लीजैंड क्लब’ विषय पर अपने संबोधन में कहीं।

बकौल लेले, ‘सहवाग ऐसा बल्लेबाज है, जिसने टेस्ट में दो तिहरे शतक और एक तिहरा शतक जड़ा है। वह मैच विनर है और मुझे लगता है कि जब तक वह फिट और उपलब्ध है, उसे तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम में होना चाहिए। सहवाग को शुरुआती दौर में भारतीय वन-डे टीम में जगह पक्की करने में उन्होंने मदद की थी।’
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चयनकर्ता मदन लाल चंदू बोर्डे की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठकों में बार-बार सहवाग का नाम लेते थे। वह घरेलू मैचों में सातवें या आठवें नंबर पर लगातार 40-50 रन बना रहा था और दिसंबर 2000 में  जिम्बाब्वे के खिलाफ  वन-डे सीरीज में लिए टीम में उसे जगह दिए जाने पर जोर दिया जा रहा था।
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लेले ने कहा, ‘जब धीमी ओवर गति के कारण कप्तान सौरव गांगुली को राजकोट मैच से बाहर रहना पड़ा तब मदन ने मुझसे सहवाग को मौका देने के लिए बोर्डे को मनाने के लिए कहा। मैंने बोर्डे से उसे अंतिम एकादश में शामिल करने के लिए और उन्होंने इस शर्त पर हामी भरी कि इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी होगी। मैं मान गया और सहवाग आज भी खेल रहा है।

गैरी सोबर्स ने भी की थी तारीफ

लेले ने बताया कि कुछ साल पहले मुंबई में एक टाक शो के दौरान सर गैरी सोबर्स ने सहवाग की जमकर तारीफ  की थी। उन्होंने कहा, ‘टेस्ट सीरीज से पहले मैंने सहवाग की मैच जिताने की क्षमता के बारे में संदीप पाटिल से कहा और वह इस पर सहमत भी थे।’

गांगुली से नाखुश थे अजहर और अंशु
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे राजसिंह डुंगरपूर ने सौरव गांगुली को जिम्बाब्वे दौरे के लिए उप-कप्तान के रूप में भेजने पर मंजूरी नहीं जताई थी क्योंकि कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन और कोच अंशुमान गायकवाड़ से उनकी बात हुई थी, जिन्हें गांगुली का रवैया पसंद नहीं था।


लेले ने कहा, ‘बीसीसीआई के संविधान में एक प्रावधान है कि दौरे पर जाने वाली हर टीम को अध्यक्ष से मंजूरी लेनी होती है। जिम्बाब्वे दौरे (1998) के लिए चुनी गई टीम में अजहर कप्तान और गांगुली उप-कप्तान थे, जिसे राज सिंह ने मंजूरी नहीं दी थी।’ उन्होंने कहा, ‘बैठक से पहले अजहर और अंशु ने गांगुली के खिलाफ  बोला था।’ बाद में उन्होंने चयनकर्ताओं से पूछा कि उन्हें उप-कप्तान कैसे बनाया गया। बाद में अनिल कुंबले को उप-कप्तान बनाया गया और टीम को अध्यक्ष की मंजूरी मिली।’

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