भारतीय कप्तान विराट कोहली ने रविचंद्रन अश्विन से सहमति जताते हुए कहा था कि पहले टेस्ट में वह एसजी गेंदों की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं। अब बॉल निर्माता कंपनी के ओर से सफाई भी आई है। दरअसल, भारतीय गेंदबाज चेन्नई में खेले गए इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट मैच में गेंद की हालत से खुश नहीं थे और इसे बदलने के उनके अनुरोध को मैदानी अंपायरों नितिन मेनन और अनिल चौधरी ने नहीं माना था।
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इशांत शर्मा
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टेस्ट मुकाबलों में गेंद कम से कम 80 ओवर तक अपनी गुणवत्ता नहीं खोने वाली होनी चाहिए, लेकिन मुकाबले में इस्तेमाल की गई एसजी बॉल 60 ओवर के बाद पूरी तरह खराब हो रही थी। ऐसी खबरें थी कि मेरठ की सांसपारेल्स ग्रीनलैंड्स (एसजी) ने सीरीज के लिए नई गेंद बनाई है जो गहरे रंग की है और जिससे सीम अधिक मिलेगा, लेकिन गेंदबाजों को गेंद की गुणवत्ता में कमी लगने के बाद कंपनी के पारस आनंद ने मीडिया से बात की है।
पारस आनंद की माने तो खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया के आधार पर गेंद की गुणवत्ता सुधारने की ओर काम किया जाएगा। अश्विन के बयान पर जवाब देते हुए पारस कहते हैं, 'मैंने खुद कभी बॉल की यह दुर्दशा नहीं देखी थी, यह पिच की वजह से हो सकता है। मैं चेन्नई में नहीं था, मैंने टीवी से ही पिच देखा, मुझे नहीं पता ट्रैक कितना कठोर था। हालांकि 300 विकेट लेने के बाद इशांत ने भी कहा था कि वो पिच नहीं बल्कि सड़क पर गेंदबाजी कर रहे थे।
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गुलाबी गेंद और कोलकाता टेस्ट
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पारस ने यह भी साफ किया कि मैच में इस्तेमाल की गई गेंद वो नई बॉल नहीं थी, जिसे तैयार किया गया। यह पुरानी ही गेंद है, जिसे पिछले दो साल से भारत में इस्तेमाल किया जा रहा है। अहमदाबाद में खेला जाने वाला तीसरा टेस्ट मैच डे-नाइट होगा, इसके लिए एसजी की पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले नवंबर 2019 में भी भारत में एक डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जा चुका है, तब भारत ने बांग्लादेश को मात दी थी। उस समय गेंद ने काफी अच्छा खेल दिखाया था।