फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   cricket underworld connection

पूर्व कप्तान की अंडरवर्ल्ड से बातचीत के सबूत हैं मौजूद

Sat, 18 May 2013 02:11 AM IST
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
गुंजन कुमार/नई दिल्ली Updated Sat, 18 May 2013 02:11 AM IST
विज्ञापन
cricket underworld connection

मैच फिक्सिंग को लेकर फंसे भारतीय क्रिकेट के एक पूर्व कप्तान उस वक्त टूट गए थे जब सीबीआई ने उन्हें अंडरवर्ल्ड के कुख्यात शख्स के साथ सीधी बातचीत का टेप सुनाया।

विज्ञापन


अपनी रिकार्डेंड बातचीत से घबराकर उस पूर्व कप्तान ने सीबीआई की जांच टीम के सामने मैच फिक्सिंग में अपनी संलिप्तता की पूरी कहानी बयां कर दी थी।

लेकिन सीबीआई के पास ठोस साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद उस पर कोई केस दर्ज नहीं किया जा सका। क्योंकि उस कप्तान और बीसीसीआई के बीच बेटिंग में शामिल नहीं होने और साफ- सुथरा खेल का कोई कानूनी करार नहीं था।
विज्ञापन


कानूनी करार नहीं होने की वजह से वह व्यक्ति या संस्था ही वजूद में नहीं थी जो कानूनी करार के उल्लंघन के आधार पर खिलाड़ियों के हाथों ठगे जाने की शिकायत पुलिस से करते। लिहाजा बीसीसीआई भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि इसका फायदा आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में फंसे श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण को नहीं मिल पाएगा। क्योंकि 1999-2000 में पहले मैच फिक्सिंग के भंडाफोड़ के बाद बीसीसीआई ने खिलाड़ियों से साफ-सुथरे खेल का कानूनी करार करना शुरू कर दिया।

इसी तर्ज पर आईपीएल टीम के मालिक भी खिलाड़ियों से यह करार करवाते हैं। यही वजह है कि दिल्ली पुलिस ने राजस्थान रॉयल की मालकिन शिल्पा सेठी को बुलाकर उस करार के आधार पर शिकायत देने को कहा है। ताकि उन खिलाड़ियों के खिलाफ लगी धारा 420 को आधार मिल सके।
 
1999-2000 में पहली बार मैच फिक्सिंग के सनसनीखेज भंडाफोड़ के बाद पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन और ऑलराउंडर अजय शर्मा पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया था। साथ ही तेज गेंदबाज मनोज प्रभाकर और नंबर छह पर खेलने वाले धुआंधार बल्लेबाज अजय जडेजा को पांच साल के लिए क्रिकेट से बाहर कर दिया गया था।

साथ ही फीजियो अली ईरानी को भी बीसीसीआई से निकाल दिया गया था। इस मामले की जांच में सीधे तौर पर जुड़े उस वक्त के सीबीआई के एसपी और वर्तमान में गृहमंत्रालय के संयुक्त सचिव एमएएस गणपति ने अमर उजाला को बताया कि इन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ फिक्सिंग में शामिल होने के सबूतों के बावजूद धारा 420 के तहत मुकदमा दायर नहीं किया जा सका था।

उन्होंने बताया कि अजहरुद्दीन सहित तीन नाम चीन खिलाड़ियों से सटोरियों के बातचीत के सटीक इलेक्ट्रानिक साक्ष्य अभी भी सीबीआई और दिल्ली की स्पेशल क्राइम यूनिट (एससीबी) के पास मौजूद हैं।

गणपति के मुताबिक भारतीय क्रिकेट के दो और बड़े खिलाड़ी भी सट्टेबाजी के लपेटे में थे। लेकिन उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिल पाया।

इनमें से एक ने राजनीति में अच्छी जगह बना ली है और फिलहाल सांसद भी हैं। गणपति के मुताबिक उस वक्त शोभन मेहता और रतन मेहता नाम के दो बड़े सटोरियों का नाम सामने आया था।


गणपति ने बताया कि दरअसल करोड़ों रुपये का जोखिम उठाने वाले सट्टेबाजों के आपसी झगड़े निबटाने के लिए इस क्षेत्र में अंडरवर्ल्ड का आगमन हुआ।

बहुत जल्द ही दाऊद की डी कंपनी और छोटा राजन गिरोह को क्रिकेट सट्टेबाजी के फायदे समझ आ गए। देखते देखते अंडरवर्ल्ड ने पूरी सट्टेबाजी अपने कब्जे में ले ली। अब देश भर सटोरिये इन्हीं अंडरवर्ल्ड के इशारों पर काम करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed