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IPL 2023: पिछले साल नौवें स्थान पर रहने वाली चेन्नई इस साल कैसे बनी चैंपियन, समझें धोनी ने कैसे किया कमाल
Tue, 30 May 2023 04:10 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Tue, 30 May 2023 04:10 AM IST
सार
चेन्नई की टीम आईपीएल 2022 में नौवें स्थान पर रही थी। 14 लीग मैच में से 10 में इस टीम को हार मिली थी, लेकिन इस सीजन यह टीम फाइनल में पहुंच चुकी है और दसवीं बार आईपीएल के फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम बनी है।
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दर्शकों का अभिवादन स्वीकारते धोनी
- फोटो : IPL/BCCI
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विस्तार
आईपीएल 2023 के फाइनल मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात टाइटंस को पांच विकेट से हराकर पांचवीं बार यह खिताब अपने नाम किया। गुजरात की टीम लगातार दूसरी बार आईपीएल के फाइनल में पहुंची थी। हालांकि, रिकॉर्ड 10वीं बार आईपीएल का फाइनल खेल रही चेन्नई ने आखिरी गेंद में गुजरात को हराया और खिताब अपने नाम किया। पिछले सीजन चेन्नई का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। 14 लीग मुकाबलों में चेन्नई की टीम सिर्फ चार मैच जीत पाई थी और आठ अंक के साथ अंक तालिका में नौवें स्थान पर रही थी। आखिरी स्थान पर रही मुंबई ने भी आठ अंक हासिल किए थे। हालांकि, इस सीजन चेन्नई ने दमदार वापसी करते हुए रिकॉर्ड पांचवीं बार खिताब अपने नाम किया। आइए समझते हैं कि चेन्नई की टीम इस सीजन फाइनल तक कैसे पहुंची।
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चेन्नई सुपरकिंग्स बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स
- फोटो : IPL/BCCI
पहले सात मैचों में किया कमाल
पिछले सीजन रवींद्र जडेजा की कप्तानी में चेन्नई की टीम ने बेहद खराब शुरुआत की थी। इसी वजह से धोनी के कप्तान बनने के बावजूद भी टीम वापसी नहीं कर सकी और प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई थी। ऐसे में धोनी ने इस सीजन शुरुआत से ही अच्छे प्रदर्शन पर जोर दिया। पहले मैच में गुजरात के खिलाफ उनकी टीम हारी, लेकिन इसके बाद लगातार दो मैच जीते। राजस्थान के खिलाफ हार मिली, लेकिन अगले तीन मैच जीतकर चेन्नई की टीम बेहतर स्थिति में पहुंच गई। सात में से पांच मैच जीतकर चेन्नई की टीम ने प्लेऑफ के लिए अपनी राह आसान कर ली थी।
राजस्थान और पंजाब के खिलाफ मैच हारने के बाद लखनऊ के खिलाफ जीत की दहलीज पर पहुंचकर मैच ड्रॉ हो गया। यहां से लगा कि यह टीम शुरुआती दो स्थान में जगह नहीं बना पाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सीएसके की टीम अगले दो मैच जीतने में सफल रही और पहला क्वालिफायर खेलने की रेस में बनी रही। कोलकाता के खिलाफ हार के बाद चेन्नई के लिए आखिरी लीग मैच जीतना जरूरी था और इस टीम ने दिल्ली के खिलाफ बड़ी जीत हासिल कर 17 अंक के साथ पहले क्वालिफायर में जगह बना ली।
पिछले सीजन रवींद्र जडेजा की कप्तानी में चेन्नई की टीम ने बेहद खराब शुरुआत की थी। इसी वजह से धोनी के कप्तान बनने के बावजूद भी टीम वापसी नहीं कर सकी और प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई थी। ऐसे में धोनी ने इस सीजन शुरुआत से ही अच्छे प्रदर्शन पर जोर दिया। पहले मैच में गुजरात के खिलाफ उनकी टीम हारी, लेकिन इसके बाद लगातार दो मैच जीते। राजस्थान के खिलाफ हार मिली, लेकिन अगले तीन मैच जीतकर चेन्नई की टीम बेहतर स्थिति में पहुंच गई। सात में से पांच मैच जीतकर चेन्नई की टीम ने प्लेऑफ के लिए अपनी राह आसान कर ली थी।
राजस्थान और पंजाब के खिलाफ मैच हारने के बाद लखनऊ के खिलाफ जीत की दहलीज पर पहुंचकर मैच ड्रॉ हो गया। यहां से लगा कि यह टीम शुरुआती दो स्थान में जगह नहीं बना पाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सीएसके की टीम अगले दो मैच जीतने में सफल रही और पहला क्वालिफायर खेलने की रेस में बनी रही। कोलकाता के खिलाफ हार के बाद चेन्नई के लिए आखिरी लीग मैच जीतना जरूरी था और इस टीम ने दिल्ली के खिलाफ बड़ी जीत हासिल कर 17 अंक के साथ पहले क्वालिफायर में जगह बना ली।
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हार्दिक पांड्या और महेंद्र सिंह धोनी
- फोटो : IPL/BCCI
पहले क्वालिफायर में चेन्नई का सामना गुजरात से था। अब तक धोनी की टीम गुजरात के खिलाफ कोई मैच नहीं जीती थी और लक्ष्य का पीछा करने में माहिर गुजरात की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। जब चेन्नई ने 172 रन बनाए तो सभी को लगा कि गुजरात आसानी से मैच जीत लेगी, लेकिन चेन्नई के गेंदबाजों ने इस लक्ष्य को भी पहाड़ जैसा बना दिया। गुजरात के बल्लेबाजों को आसानी से रन नहीं दिए और रन रेट के दबाव में सभी खिलाड़ी विकेट फेंककर निकलते रहे। अंत में गुजरात की टीम 157 रन ही बना पाई और 15 रन से मैच जीत चेन्नई की टीम फाइनल में पहुंच गई।
धोनी की कप्तानी में निखरे खिलाड़ी
पिछले सीजन में जडेजा को कप्तान बनाने की वजह से चेन्नई की लय खराब हो गई थी। इस सीजन धोनी ने शुरुआत से ही कमान संभाली और टीम को लय में बनाए रखा। धोनी ने ऋतुराज और कॉन्वे जैसे अहम खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखा। वहीं, शिवम दुबे और पाथिराना जैसे खिलाड़ियों पर भी पूरा भरोसा जताया। रहाणे को टीम में लेकर आए और उन्हें खुलकर खेलने की छूट दी। तुषार देशपांडे पर भरोसा बनाए रखा और वह मैच दर मैच निखरते चले गए। तुषार ही नहीं चेन्नई की पूरी टीम ही टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ बेहतर होती चली गई।
धोनी की कप्तानी में निखरे खिलाड़ी
पिछले सीजन में जडेजा को कप्तान बनाने की वजह से चेन्नई की लय खराब हो गई थी। इस सीजन धोनी ने शुरुआत से ही कमान संभाली और टीम को लय में बनाए रखा। धोनी ने ऋतुराज और कॉन्वे जैसे अहम खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखा। वहीं, शिवम दुबे और पाथिराना जैसे खिलाड़ियों पर भी पूरा भरोसा जताया। रहाणे को टीम में लेकर आए और उन्हें खुलकर खेलने की छूट दी। तुषार देशपांडे पर भरोसा बनाए रखा और वह मैच दर मैच निखरते चले गए। तुषार ही नहीं चेन्नई की पूरी टीम ही टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ बेहतर होती चली गई।
बल्लेबाजी के दौरान अजिंक्य रहाणे
- फोटो : IPL/BCCI
शुरुआत में बेन स्टोक्स, दीपक चाहर और मोईन अली जैसे खिलाड़ियों की चोट परेशानी बनी, लेकिन धोनी ने सभी के विकल्प खोजे और भारतीय खिलाड़ियों के दम पर मजबूत टीम खड़ी कर दी। शुरुआत में ऋतुराज और कॉन्वे बड़ी पारी खेल रहे थे तो मध्यक्रम में रहाणे और शिवम दुबे तेजी से रन बना रहे थे। अंत में मैच खत्म करने की जिम्मेदारी जडेजा और खुद धोनी ने ली।
गेंदबाजी में जडेजा अच्छी लय में थे, लेकिन उनके अलावा टीम में कोई भरोसेमंद गेंदबाज नहीं था। ऐसे में धोनी ने खराब प्रदर्शन के बावजूद तुषार देशपांडे पर भरोसा जताया और तुषार ने आगे चलकर कई मैच जिताए। श्रीलंका के पाथिराना और तीक्ष्णा के आने के बाद चेन्नई की गेंदबाजी और बेहतर हो गई। स्टोक्स की जगह रहाणे ने ले ली और दीपक चाहर के वापस आने के साथ ही पूरी टीम लय में आ गई। इसी वजह से यह टीम सारी बाधाओं को पार कर फाइनल में पहुंची।
फाइनल में धोनी बल्ले के साथ कुछ नहीं कर सके, लेकिन वह सभी खिलाड़ियों के अंदर चैंपियन बनने का मंत्र भर चुके थे। फाइनल के दबाव में युवा गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए, लेकिन बल्लेबाजों ने मिलकर टीम को पांचवीं बार खिताब दिला दिया।
गेंदबाजी में जडेजा अच्छी लय में थे, लेकिन उनके अलावा टीम में कोई भरोसेमंद गेंदबाज नहीं था। ऐसे में धोनी ने खराब प्रदर्शन के बावजूद तुषार देशपांडे पर भरोसा जताया और तुषार ने आगे चलकर कई मैच जिताए। श्रीलंका के पाथिराना और तीक्ष्णा के आने के बाद चेन्नई की गेंदबाजी और बेहतर हो गई। स्टोक्स की जगह रहाणे ने ले ली और दीपक चाहर के वापस आने के साथ ही पूरी टीम लय में आ गई। इसी वजह से यह टीम सारी बाधाओं को पार कर फाइनल में पहुंची।
फाइनल में धोनी बल्ले के साथ कुछ नहीं कर सके, लेकिन वह सभी खिलाड़ियों के अंदर चैंपियन बनने का मंत्र भर चुके थे। फाइनल के दबाव में युवा गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए, लेकिन बल्लेबाजों ने मिलकर टीम को पांचवीं बार खिताब दिला दिया।