B'day special: यूं ही नहीं द्रविड़ को ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने दिया था 'द वॉल' का टैग, ये है असली वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टीम इंडिया की 'द वॉल' के नाम से लोकप्रिय पूर्व बल्लेबाज राहुल द्रविड़ गुरुवार को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर में हुआ था। साल 1996 में श्रीलंका के खिलाफ सिंगर कप में डेब्यू करने वाले कर्नाटक के इस बल्लेबाज को टीम इंडिया के 'मिस्टर रिलायबल' और 'दीवार' के नाम से भी जाना जाता है।
दरअसल, राहुल द्रविड़ का जन्म तो इंदौर में हुआ था, लेकिन उनका परिवार कर्नाटक शिफ्ट हो गया था। उनकी पढ़ाई कर्नाटक से ही हुई। सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से एमबीए करने के दौरान ही उनका सिलेक्शन नेशनल क्रिकेट टीम में हो गया था। वह एक स्टेट लेवल हॉकी प्लेयर भी रह चुके हैं।
पढ़ेंः- B'day special: जब कपिल ने एक लड़की को ट्रेन में किया था प्रपोज, जाने उनकी कुछ रोचक बातें
टीम इंडिया के महान बल्लेबाज और पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के नाम टेस्ट क्रिकेट खेलने वाली सभी टीमों के खिलाफ शतक ठोकने का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। क्रिकेट के जेंटलमैन कहे जाने वाले द्रविड़ को मुश्किल से मुश्किल परिस्थियों में भी विरोधी टीम के सामने दीवार की तरह खड़े होकर मैच जिताने वाले खिलाड़ियों के रूप में जाना जाता हैं।
'द वॉल' का नाम इन्होंने दिया था
ऑस्ट्रलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ ने राहुल द्रविड़ के बारे में कहा था, 'मैच के शुरुआती 15 मिनट में आप उस खिलाड़ी का विकेट लेने की कोशिश करो, यदि नहीं ले पाए तब बाकी 10 खिलाड़ियों को आउट करो।'
द्रविड़ का डिफेंस इतना मजबूत था कि उनके विकेट को हासिल करना दुनिया के तमाम मशहूर गेंदबाजों की चाहत हुआ करती थी। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए द्रविड़ ने टेस्ट और वन-डे, दोनों में ऐसी पारियां खेलीं, जो उनके करियर के लिहाज से मील का पत्थर साबित हुई।
उन्होंने साल 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ रावलपिंडी में खेली गई 270 रन की शानदार पारी खेली और साल 2003 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में उन्होंने 233 रन की बेहतरीन पारी खेली। इन दोनों टेस्ट में टीम इंडिया को जीत दिलाने में द्रविड़ के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
अपने डेब्यू वन-डे मैच में द्रविड़ कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। उन्होंने 3 अप्रैल 1996 को श्रीलंका के खिलाफ सिंगर कप में डेब्यू किया था। इस मैच में उन्होंने कुल 3 रन बनाए थे। हालांकि, अगले मैच में भी उनका प्रदर्शन खराब ही रहा और पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने कुल 4 रन बनाए थे।
राहुल द्रविड़ के लिए एक बार नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा था कि यदि टीम के लिए उसे टूटे कांच पर भी चलने को कहा जाएगा तो वह मना नहीं करेगा। राहुल द्रविड़ ने कई मौकों पर टीम इंडिया को मुश्किलों से ऊबारा है। 2000-01 में टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए कोलकाता टेस्ट मैच में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की रिकॉर्ड साझेदारी को शायद ही कोई भुला पाए।
इस मैच में भारत फॉलोऑन खेल रहा था और इस मैच में दोनों ने 376 रनों की साझेदारी की थी, जिसकी बदौलत भारत मैच जीत गया था। साल 2003 में ऑस्ट्रेलिया के एलिडेट में उनके 233 रनों की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में मात दी थी। उनके नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा साढ़े बारह घंटे की मैराथन पारी खेलने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
साल 2000 में विजडन क्रिकेटर्स ने उन्हें साल के टॉप 5 क्रिकेटर्स में शुमार किया था। 2004 में उन्होंने आईसीसी का बेस्ट टेस्ट क्रिकेटर का अवॉर्ड भी अपने नाम किया था। दिसंबर 2011 में वह पहले गैर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बने, जिन्हें कैनबरा में ब्रैडमैन ओरेशन दिया गया था। द्रविड को 'पद्म श्री' और 'पद्म भूषण' जैसे सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।
गौरतलब है कि राहुल द्रविड़ ने 164 टेस्ट में उन्होंने 52.31 की औसत से 13288 रन बनाए, जिसमें 36 शतक और 63 अर्धशतक शामिल रहे। इसी तरह 344 वन-डे मैचों में द्रविड़ ने 39.16 की औसत से 10889 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 83 अर्धशतक शामिल हैं। इतना ही नहीं द्रविड़ को स्लिप का बेहतरीन फिल्डरों में भी शुमार किया जाता था।