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हारी पिच पर कंगारूओं ने किया जीत का अभ्यास
हैदराबाद/एजेंसी
Updated Wed, 06 Mar 2013 08:25 PM IST
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भारत के खिलाफ दूसरा टेस्ट मैच भले ही मैच के चौथे दिन ही समाप्त हो गया लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम इस पिच पर पांचवें दिन भी खेलने उतरी। इस बार मेहमान टीम के सामने कोई विपक्षी टीम नहीं थी बल्कि टीम ने आपस में ही पांचवें दिन के ट्रैक पर अभ्यास कर अपनी कमजोरियों को दूर करना बेहतर समझा।
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चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने यहां आई ऑस्ट्रेलियाई टीम का दौरे पर प्रदर्शन अब तक बेहद निराशाजनक रहा है। पहले टेस्ट मैच के पांचवें दिन जहां उसे केवल नौ ओवर ही खेलने को मिले वहीं दूसरे टेस्ट में उसे साढ़े तीन दिन में ही शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
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टीम को अब तक पांचवें दिन खेलने का भरपूर मौका नहीं मिल पाया है। इसी को ध्यान ध्यान में रखते हुए मेहमान टीम पांचवें दिन की टर्निंग पिच पर यहां अभ्यास करने उतरी।
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स्पिनरों पर अभ्यास को प्राथमिकता
अभ्यास के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने स्पिनरों पर अभ्यास को अधिक तवज्जो दिया। इसमें से कुछ खिलाड़ियों ने मैच में इस्तेमाल हुए विकेट पर स्पिनरों का सामना किया। विकेट दोनों ओर से काफी टूट चुकी हैं और इसी टूटी विकेट पर कप्तान माइकल क्लार्क ने अपने मुख्य स्पिनरों नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और स्टीव स्मिथ पर सबसे अधिक अभ्यास किया। क्लार्क के अलावा डेविड वार्नर और शेन वाटसन भी अपनी कमजोरियों को दूर करते देखे गए।
अंपायर की भूमिका में भी दिखे क्लार्क
अभ्यास के दौरान कप्तान माइकल क्लार्क तेज गेंदबाज मिचेल जानसन की गेंद पर चोट खा बैठे लेकिन इसके बावजूद वह अंपायर की भूमिका निभाते दिखे। क्लार्क ने अंपायर की पोजिशन पर खड़ा होकर डेविड वार्नर और शेन वाटसन को नजदीक से बल्लेबाजी करते देखा। इस दौरान वह दोनों को टिप्स देते भी देखे गए।
टीम के कोच मिकी आर्थर ने कहा, ‘क्लार्क ने बल्लेबाजों से बात भी की। उन्होंने मुख्य रूप से साझेदारी निभाने पर बात की। जब क्लार्क बोल रहे थे तो बाकी खिलाड़ी उन्हें काफी गंभीरता से सुन रहे थे। हमारा एकमात्र लक्ष्य यही है कि जब हमारे यह खिलाड़ी अगले मैच में उतरें तो अपनी कमजोरियों को पीछे छोड़ बेहतर करें।’
युवाओं में अनुभव की कमी: आर्थर
ऑस्ट्रेलियाई कोच मिकी आर्थर ने कहा कि टीम में शामिल युवाओं को यहां की परिस्थितियों में खेलने का अनुभव नहीं है लिहाजा हमने यहां की टर्निंग पिच पर उन्हें अधिक से अधिक अभ्यास कराना बेहतर समझा। बकौल आर्थर, ‘मैं पहले ही कह चुका हूं कि हमारे टॉप आठ बल्लेबाजों में वाटसन और क्लार्क ही ऐसे हैं जिनके पास यहां खेलने का भरपूर अनुभव है। ऐसे में युवाओं को पांचवें दिन के ट्रैक पर अभ्यास का जो मौका मिला उसका फायदा उठाना हमने बेहतर समझा। यह उनके कैरियर के लिए भी अच्छा रहेगा। हम चाहते हैं कि हमारे बल्लेबाज स्पिनर के खिलाफ अपने प्रदर्शन में सुधार लाएं। हमारे बल्लेबाज अभी भी युवा हैं और वह पांचवें दिन के ट्रैक पर बल्लेबाजी करना सीख रहे हैं। यह आप अनुभव से ही सीखते हैं।’
आर्थर से जब पूछा गया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियों में क्या फर्क है तो उन्होंने कहा, ‘यह बिल्कुल नार्थ पोल और साउथ पोल की तरह है। ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच की शुरुआत में पिच तेज रहती है, उसमें तेजी बढ़ती जाती है और अंत में जाकर वह कुछ धीमी होती है। भारत में इसके उलट पिच शुरुआत में धीमी खेलती है और फिर अचानक से मैच के चौथे और पांचवें दिन तेज हो जाती है। यही कारण है कि हमने अपने खिलाड़ियों को इस परिस्थिति से अवगत कराए और इससे निपटने का कुछ उपाय ढूंढे।’