टीम इंडिया के लिए 2019 विश्व कप में एमएस धोनी का खेलना है बेहद जरूरी, यह हैं 5 प्रमुख कारण
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टीम इंडिया के अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी चौतरफा आलोचनाएं झेल रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में संपन्न तीन मैचों की वन-डे सीरीज में उनका फ्लॉप रहना है। माही ने तीन मैचों में कुल 79 रन बनाए। पहले वन-डे में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था। बहरहाल, धोनी ने इस दौरान बेहद धीमी बल्लेबाजी की, जिससे आलोचकों को हावी होने का पूरा मौका मिला।
इस दौरान कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री ने खुलकर पूर्व कप्तान धोनी का समर्थन किया। तीसरे वन-डे में धोनी ने अंपायर से गेंद ली तो कयास लगाए जाने लगे कि वह इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहने जा रहे हैं। बाद में टीम इंडिया के हेड कोच रवि शास्त्री ने स्पष्ट किया कि धोनी ने अंपायर से गेंद लेकर गेंदबाजी कोच भरत अरुण को बताया था कि गेंद की स्थिति जब ऐसी हो तो कैसे खेलना है।
विश्व के 'बेस्ट फिनिशर' के बारे में लोगों का कहना है कि उन पर उम्र हावी होने लगी है। हालांकि, हाल ही में हुए यो-यो टेस्ट में धोनी टीम इंडिया के सबसे फिट खिलाड़ियों में से एक रहे। इसे देखते हुए लोगों या आलोचकों की यह बात स्वीकार करना आसान नहीं लगता।
धोनी का वन-डे रिकॉर्ड भी शानदार है। उन्होंने 321 मैचों में 10 शतक व 67 अर्धशतक की मदद से 10,046 रन बनाए हैं। इसके अलावा उन्होंने 300 कैच और 107 स्टंपिंग की है। टीम इंडिया को अगले साल विश्व कप खेलना है और ऐसे में भारत की स्थिति को देखते हुए धोनी का अंतिम एकादश में रहना बेहद जरूरी नजर आ रहा है।
हम आपको बताने जा रहे हैं कि वह कौन-से पांच कारण है, जिसकी वजह से एमएस धोनी का टीम इंडिया में खेलना बेहद जरूरी है:
1) क्या धोनी से बेहतर विश्व में कोई और विकेटकीपर है?
'महेंद्र बाहुबली धोनी।' जी हां, एक प्रसारणकर्ता चैनल की हिंदी कमेंट्री टीम ने उन्हें यही नाम दिया था। धोनी की चुस्त विकेटकीपिंग को देखते हुए एक मशहूर कमेंटेटर ने उन्हें यह नाम ऑन एयर दिया था। एमएस धोनी के विकेटकीपिंग रिकॉर्ड्स भी इसे अच्छे से साबित करते हैं।
धोनी ने वन-डे में 300 कैच और 107 स्टंपिंग की हैं। मौजूदा समय में विश्व का कोई विकेटकीपर उनके आस-पास भी नहीं हैं। रांची के धोनी विश्व के चौथे विकेटकीपर बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 300 या इससे अधिक कैच लिए हैं। इस मामले में शीर्ष पर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट (417), फिर पूर्व दक्षिण अफ्रीकी विकेटकीपर मार्क बाउचर (402) और तीसरे नंबर पर पूर्व श्रीलंकाई विकेटकीपर कुमार संगकारा (383) काबिज हैं।
धोनी जिस तरह स्टंपिंग करते हैं, वह बिजली की रफ्तार से भी तेज होती है। उन्होंने नाजुक पलों में तेजी से स्टंपिंग करके अपनी महानता साबित की है। विकेट के पीछे धोनी की ताकत सिर्फ कैच, स्टंपिंग या रनआउट करने तक सीमित नहीं। वह डीआरएस लेने में भी माहिर हैं। कई बार लोग मान चुके हैं कि डीआरएस का नाम बदलकर 'धोनी रिव्यु सिस्टम' होना चाहिए।
इसमें कोई शक नहीं कि मौजूदा समय में धोनी से सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर कोई और नहीं है। वह विकेटकीपर होने के बावजूद टीम इंडिया के सबसे बड़े हथियार बने हुए हैं।
2) युवाओं से बेहतर प्रदर्शन कराने में माहिर
महेंद्र सिंह धोनी टीम की जान हैं। 'ब्लू ब्रिगेड' के कई युवा खिलाड़ी कह चुके हैं कि माही भाई के कारण हमारा प्रदर्शन अच्छा निकलता है। उनके कारण हमारा आधा दबाव हट जाता है। धोनी बहुत अच्छी सलाह देते हैं वह बल्लेबाज के दिमाग को पढ़कर उसके हिसाब से गेंदबाजी करने का निर्देश देते हैं।
धोनी ने कई युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया है। धोनी की मेंटरिंग की बात करते ही जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल समेत कई नाम दिमाग में स्ट्राइक करते हैं। हाल ही में धोनी ने दीपक चाहर और शार्दुल ठाकुर जैसे नए गेंदबाजों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराया। इसका परिणाम यह रहा कि चेन्नई सुपरकिंग्स आईपीएल 2018 की चैंपियन बनी।
एमएस धोनी की यह खूबी टीम इंडिया के लिए फलदायी साबित हुई है। युवा टीम इंडिया विश्व की सबसे फिट टीमों में से एक हैं और उसके पास कई मैच विजेता खिलाड़ी हो चुके हैं। यह ध्यान में रखते हुए धोनी का विश्व कप में टीम इंडिया में रहना बेहद जरूरी लगता है।
3) कोहली को 'विराट' कप्तान बनाने में एमएसडी का बड़ा हाथ
विराट कोहली का वन-डे में बतौर कप्तान ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन हैं। कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने 52 में से 39 मुकाबले जीते हैं। शुरुआती 50 मुकाबलों में सर्वाधिक जीत दर्ज करने के मामले में विराट कोहली वेस्टइंडीज के पूर्व महान कप्तान क्लाइव लॉयड और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के साथ संयुक्त रूप से नंबर एक पर हैं। विराट कोहली की अगुवाई में टीम ने लगातार 9 वन-डे सीरीज भी अपने नाम की है।
कोहली की सफल कप्तानी में एमएस धोनी का बड़ा योगदान है। माही ने सही समय पर कप्तानी छोड़कर विराट को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उनकी निगरानी में विराट कोहली बतौर कप्तान परिपक्व हुए और नतीजे क्रिकेट प्रेमियों के सामने हैं। अधिकांश कोहली को मैच के दौरान धोनी से सलाह लेते देखा गया। टीम इंडिया जब बेहद दबाव की स्थिति में रही तो धोनी ने विराट की मदद की और टीम इंडिया ने मुकाबला जीता।
विराट के लिए धोनी के टीम में रहने से कई फायदे है। धोनी के रहने से विराट पारी के अंतिम ओवर्स में बाउंड्री लाइन पर फील्डिंग कर पाते हैं क्योंकि फील्ड जमाने से लेकर गेंदबाज को समझाइश देने का बीड़ा माही अपने कंधों पर उठा लेते हैं। इतने गुण होने के कारण धोनी का विकल्प खोजना मुश्किल है और टीम इंडिया के लिए 2019 विश्व कप में उनका रहना जरूरी है।
4) मैच की स्थिति को बेहतर तरीके से समझते हैं
यह कहना गलत नहीं होगा कि एमएस धोनी जीनियस हैं। मैच की स्थिति को समझने में उनका कोई सानी नहीं है। धोनी का यह कौशल टीम इंडिया के लिए लाभदायक साबित होता आया है। टीम इंडिया ही नहीं बल्कि विश्व के कई खिलाड़ी मान चुके हैं कि धोनी से बेहतर खेल की समझ शायद ही किसी को होगी।
धोनी जब बल्लेबाजी करते हैं तो गेंदबाजों का दिमाग पढ़ना जानते हैं। वहीं जब वह विकेटकीपिंग कर रहे होते हैं तो बल्लेबाज के दिमाग को पढ़ लेते हैं। इसका विश्लेषण करके वह अपनी टीम के साथियों को सलाह देते हैं। टीम इंडिया के युवाओं का कहना रहता है कि धोनी उन पर से आधा दबाव हटा देते हैं क्योंकि वह उन्हें बता देते हैं कि किस प्रकार गेंदबाजी करना है।
वन-डे में धोनी विश्व के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक हैं। उनके निर्णय टीम को फायदा दिलाते हैं। धोनी के रहते टीम इंडिया काफी बलवान है। वह टीम इंडिया के प्रमुख खिलाड़ी हैं और इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए उनका 2019 विश्व कप में खेलना बेहद जरूरी लगता है।
5) विश्व के बेस्ट फिनिशर और जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी का बेहतरीन मिश्रण
टीम इंडिया के विरोधी अब भी मानते हैं कि एमएस धोनी विश्व के 'बेस्ट फिनिशर्स' में से एक हैं। वह अपना दिन होने पर विरोधी खेमे की धज्जियां उड़ाना जानते हैं। हाल ही में संपन्न आईपीएल 2018 में धोनी का पुराना अंदाज देखने को मिला था। इसके बाद आयरलैंड व इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 इंटरनेशनल सीरीज में उन्होंने अच्छी बल्लेबाजी की।
धोनी ने दर्शाया कि उनमें अभी काफी दमखम है और वह कभी भी बड़े शॉट्स खेलकर बाजी पलट सकते हैं। इसके अलावा धोनी पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ वन-डे में काफी धीमी बल्लेबाजी की। मगर आलोचकों को याद करना चाहिए कि ऐसे कितने अहम मौके रहे जब धोनी ने टीम को नाजुक स्थिति से उबारा और मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
धोनी में तेज व रक्षात्मक बल्लेबाजी करने की दोहरी कला है। इससे टीम इंडिया को अगले साल विश्व कप में फायदा मिल सकता है। यह आंकड़ें और खूबियां साबित करती हैं कि महेंद्र सिंह धोनी का 2019 विश्व कप में खेलना बेहद जरूरी है ताकि टीम इंडिया तीसरी बार खिताब जीत सके और महान विकेटकीपर बल्लेबाज की क्रिकेट के मैदान से शाही विदाई हो। ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि धोनी कई बार संकेत दे चुके हैं कि 2019 विश्व कप के बाद वह संन्यास ले लेंगे।