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शहादत के नाम पर जीत गई सियासत

Thu, 10 Mar 2016 07:25 PM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर
दयाशंकर शुक्ल सागर Updated Thu, 10 Mar 2016 07:25 PM IST
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Politics won in the name of martydom
दयाशंकर शुक्ल सागर

आखिर वही हुआ, जिसका डर था। धर्मशाला के हाथ से ट्वंटी-20वर्ल्ड कप का भारत-पाक मैच चला गया। अब यह मैच कोलकाता में होगा। वह मैच, जिसका सरहद के दोनों तरफ बेसब्री से इंतजार रहता है। यह मैच सियासी असहिष्‍णुता का शिकार हो गया। वीर जवानों की शहादत का दर्द सिर्फ हिमाचल नहीं, बल्कि सारा देश झेल रहा है। लेकिन हिमाचल में ऐसे हालात बना दिए गए कि दलाई लामा के कारण विश्व शांति का प्रतीक धर्मशाला अचानक अशांति के लिए सुर्खियों में आ गया।

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इस सारे विवाद की जमीन तीन महीने पहले धर्मशाला से करीब 80 किलोमीटर दूर पठानकोट में आतंकी हमले के बाद तैयार हो गई थी। इस हमले में हिमाचल के दो जांबाज फौजी शहीद हुए। पूरे हिमाचल में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से की लहर थी। हिमाचल में पाकिस्तान के धर्मशाला दौरे के खिलाफ माहौल बनने लगा। लेकिन यह एक फौरी और स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। तथ्य यह है कि पाकिस्तानी टीम के धर्मशाला दौरे के खिलाफ सबसे पहले मुखर विरोध का राजनीतिक स्वर भाजपा के सांसद शांता कुमार की तरफ से उठा। हिमाचल की भाजपाई राजनीति में प्रेमकुमार धूमल व अब उनके पुत्र अनुराग ठाकुर और शांताकुमार दो ध्रुव हैं। मोदी राज में शांता कुमार नेपथ्य में हैं। सो वह इस पूरे विवाद में सलामी बल्लेबाज की भूमिका में उतर आए।
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हिमाचल की राजनीति में सैनिक परिवारों को एक बड़े वोट बैंक के रूप में देखा जाता है। यहां कई जिले हैं, जहां हर तीसरे परिवार का बेटा सेना में है। यही वजह है कि सरहद या देश की सीमा के अंदर किसी भी तरह के आतंकी हमले में शहादत देने वाला हिमाचली जवान जरूर होता है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल इन सैनिक परिवारों की भावनाओं को नजर अंदाज नहीं कर सकता। शांता कुमार का नेतृत्व पाकर पूर्व सैनिकों ने भी विरोध की आवाज बुलंद कर दी।
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शांता के मुखर होते ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी पाक खिलाड़ियों के धर्मशाला दौरे के विरोध में खड़े हो गए। यह स्वतःस्फूर्त नहीं, बल्कि एक विशुद्ध सियासी फैसला था। जिसकी प्रेरणा उन्हें भाजपा के प्रखर राष्ट्रवाद के उस नए शगूफे से मिली जिसके सूत्र जेएनयू से निकले हैं। वीरभद्र सिंह ने बड़ी चालाकी से इसका इस्तेमाल किया और सिर्फ अनुराग ठाकुर ही नहीं समूची केंद्र सरकार को असहज स्‍थति में डाल दिया। वीरभद्र लंबे अरसे से धूमल परिवार और धौलाधार की पहाड़ियों के बीच बने उनके शानदार स्टेडियम के विरोध में खड़े रहे हैं। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन धूमल परिवार का घरेलू उपक्रम है और इस परिवार ने इस स्टेडियम को अपनी निजी संपत्ति बना लिया है। उनका आरोप है क्रिकेट का यह पूरा साम्राज्य भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा है। इसकी वह विजलेंस से जांच करवा रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान से मैच में अड़ंगा लगाकर एक तीर से दो निशाने साधे जा सकते थे, क्योंकि बीसीसीआई सचिव बनने के बाद अनुराग ठाकुर ने पहला काम यह किया था कि वह विश्व कप ट्वंटी-20 का सबसे रोमांचक मैच धर्मशाला ले आए थे। अब मैच का यहां न होना उनकी साख पर बट्टा लगने जैसा है। धर्मशाला में जो हुआ, वह वाकई परेशान करने वाला है। यह एक गलत परंपरा की शुरुआत है। जो खेल भावना के अनुरूप बिल्कुल नहीं। मत भूलिए कि सीमा के बर्फीले पहाड़ों के बीच देश की सुरक्षा में लगे हमारे जवान कान पर रेडियो लगाए कितने उत्साह से मैच की लाइव कमेंटरी सुनते हैं।

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