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खाद्यान्न: भंडारण में वृद्धि का लक्ष्य; नई योजना से रुकेगी अनाज की बर्बादी, खाद्य सुरक्षा होगी मजबूत
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हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी खाद्यान्न भंडारण क्षमता बनाने की योजना को मंजूरी दी है। इसका मकसद देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और भंडारण क्षमता में कमी के कारण किसानों को फसल पैदावार के मौसम में कम मूल्य पर की जाने वाली बिक्री से होने वाले नकुसान से बचाना भी है।
गौरतलब है कि नई खाद्यान्न भंडार क्षमता योजना लगभग एक लाख करोड़ रुपये के खर्च के साथ शुरू होगी। इस समय देश का खाद्यान्न उत्पादन लगभग 3,100 लाख टन है, जबकि भंडारण क्षमता कुल उत्पादन का केवल 47 प्रतिशत ही है। ऐसे में, देश में खाद्यान्न भंडारण की जो मौजूदा क्षमता 1,450 लाख टन की है, उसे अगले पांच वर्षों में 2,150 लाख टन किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रत्येक प्रखंड में 2,000 टन क्षमता का गोदाम स्थापित किया जाएगा। इस योजना के क्रियान्वयन में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) की अहम भूमिका होगी।
भारत में किसान कड़ी मेहनत कर खाद्यान्न उगाते हैं, लेकिन 12 से 14 फीसदी तक अन्न बर्बाद हो जाता है। अधिकांशतः किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है। अनाज के भंडारण की सही व्यवस्था न होने के चलते कृषि उपज हासिल करने के तुरंत बाद किसानों को उसे बेच देना पड़ता है। देश में मौजूद लगभग तीन चौथाई भंडारण सुविधाएं परंपरागत तरीके से ही संचालित होती हैं और ये प्रतिकूल मौसमी दशाओं जैसे-तेज बारिश, बाढ़, तूफान आदि में अनाजों के बड़े हिस्से को बचा नहीं पाती हैं। देश में अधिकांश कोल्ड स्टोरेज संरचनाएं असंगठित क्षेत्र की हैं, जिन्हें पारंपरिक ढंग से चलाया जा रहा है। अपर्याप्त प्रबंधन की वजह से भंडारों में अनाज को तय सीमा से भी अधिक समय तक रखा जाता है, जिससे कीड़े, चूहे, पक्षियों आदि द्वारा नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
यदि हम देश में खाद्यान्न संग्रहण तथा प्रबंधन के सरकारी तंत्र की ओर देखें, तो पाते हैं कि भारत में खाद्यान्नों की खरीद, संग्रहण, स्थानांतरण, सार्वजनिक वितरण तथा बफर स्टॉक के रख-रखाव की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की है। एफसीआई न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से खाद्यान्नों की खरीद करता है। एफसीआई की तरफ से खाद्यान्नों की खरीद राज्य सरकार की एजेंसियों तथा निजी मिलों द्वारा भी की जाती है। खरीदे गए सभी अनाज केंद्रीय भंडार (सेंट्रल पूल) का निर्माण करते हैं। इसके बाद अनाजों को अधिशेष राज्यों से उपभोक्ता राज्यों में वितरण हेतु भेजा जाता है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफर स्टॉक हेतु अनाजों का संग्रह एफसीआई के भंडार गृहों में किया जाता है। लेकिन एफसीआई की भंडारण क्षमता अपर्याप्त होने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में उपलब्ध भंडारण क्षमता भी पर्याप्त नहीं है।
ऐसे में, निश्चित रूप से तेजी से बढ़ता हुआ खाद्यान्न उत्पादन अब किसानों के परंपरागत खाद्यान्न भंडारों और सरकार की क्षमताओं के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है। खाद्यान्न उत्पादन कितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसका अनुमान हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वर्ष 2022-23 के प्रमुख फसलों के उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान से लगाया जा सकता है। इसके मुताबिक, चालू कृषि वर्ष में 3,305.34 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है, जो अब तक रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन है। साथ ही, इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के तहत उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक धन आवंटन तथा विशेष कार्य-योजनाएं लागू की गई हैं, उनसे भी मोटा अनाज का उत्पादन छलांगें लगाकर बढ़ेगा और अधिक भंडारण क्षमता जरूरी होगी।
विश्व की सबसे बड़ी खाद्यान्न भंडारण योजना को पूरा करने से खाद्यान्न की बर्बादी रुकेगी, खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और जगह-जगह स्टोरेज होने से किसानों की ढुलाई में आने वाली लागत में भी कमी आएगी। इससे खाद्यान्न आयात पर निर्भरता भी कम होगी। साथ ही, खाद्यान्न भंडारण क्षमता विकसित होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।