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महिलाएं कम बोलती हैं

Thu, 21 Mar 2013 09:59 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 21 Mar 2013 09:59 PM IST
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women speak

क्यों, वाकई मैं ज्यादा बोलती हूं क्या? नहीं, नहीं। मुंहदेखी बात मत करना। सच बताना। अखबार तो वैसे ठीक ही लिखते हैं, मगर मैं तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती हूं कि वाकई हम महिलाएं ज्यादा बोलती हैं क्या? जो सच है, कह दो, मैं बुरा नहीं मानूंगी, क्योंकि हम महिलाओं के बारे में यह कोई पहली बार नहीं बताया गया है। बताओ न... पत्नी ने पूछा।

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नहीं, ज्यादा नहीं बोलती हो। मैंने बताया। बात को यहीं खत्म करने का यही तरीका है मेरे पास कि कम से कम बोलो।

तो फिर वे कौन-सी महिलाएं होती हैं, जो बहुत ज्यादा बोलती हैं? पतियों से भी ज्यादा? और वे पति कैसे कि बोलने भी देते हैं और सुनते भी हैं। मुझे तो याद नहीं कि हमारे आसपास ऐसा एक भी घर है, जहां महिलाएं ज्यादा बोलती हैं और पुरुष कम! पड़ोस में मिसेज नाडकर्णी हैं, जो स्कूल में ही इतना बोल आती हैं कि घर पर तो उनकी आवाज ही नहीं निकलती।
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मिसेज शर्मा बोलती तो हैं, मगर जब उनकी सास बाहर जाती हैं तभी, वरना उनकी तो चूं भी सुनाई नहीं देती। पीछे वाले बंडीजी की पत्नी तो हमेशा काम की ही बात करती हैं कि प्याज है क्या? हरा धनिया चाहिए। कटहल की सब्जी बनी है क्या, खुशबू आ रही है! अब बताओ, यह भी कोई बोलना हुआ? कहते हुए वह मुझे उम्मीद से देखने लगी।
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मुझे तो ऐसा नहीं लगता। उसे चुप कराने के लिए यही तो कहा जा सकता था।

और फिर चार यार मिल जाते हैं, तो क्या शोकसभा करते हैं? पूरी-पूरी रात निकाल देते हैं। अब चार महिलाएं मिल जाएंगी, तो क्या मौन व्रत रख लेंगी! यह सही है कि हमारे पास बातचीत के विषय ज्यादा होते हैं, मगर इसका यह मतलब थोड़े ही है कि हम ज्यादा बोलती हैं। अच्छा, तुम ही बताओ, शादी के पच्चीस साल होने आए। कभी तुम्हें लगा कि मैं बकर-बकर कर रही हूं?


नहीं, एक बार भी नहीं। कान से हाथ हटाते हुए मैंने जवाब दिया। तो यह मान लें कि अखबार की गलत खबर है कि महिलाएं ज्यादा बोलती हैं! तुम मानते हो या नहीं?

हां, मैं मानता हूं। इस पर वह खुश हो गईं! मगर मैंने उसे यह नहीं बताया कि महिलाओं को बोलने के मौके ही कहां दिए जाते हैं कि वे भरपेट बोल सकें। लेकिन जब भी मौका मिलता है, वे बोल लेती हैं। एक ही बार में पूरे दिन की कसर निकाल लेती हैं।

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