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मनन: विपक्ष की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है, अब सदन की संरचना में दिखेगा संतुलन

Sun, 09 Jun 2024 07:05 AM IST
Palaniappan Chidambram पी. चिदंबरम
Updated Sun, 09 Jun 2024 07:05 AM IST
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सार
अब सदन की विभिन्न समितियों की संरचना अधिक संतुलित होगी और सदन के अध्यक्ष ऐसे होंगे, जो सभी दलों को स्वीकार्य होंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता के पास सांसदों की पर्याप्त संख्या होगी और उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
 
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With the formation of 18th Lok Sabha, responsibility of the opposition has also increased
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद संबोधित करते कार्यवाहक पीएम नरेंद्र मोदी (वीडियो ग्रैब) - फोटो : एएनआई

विस्तार

यह दुनिया एक मंच है

और सभी लोग महज अभिनेता हैं।
वे आते हैं और चले जाते हैं
और एक व्यक्ति अपने समय में कई तरह की भूमिकाएं निभाता है।
-विलियम शेक्सपियर

जब आप 9 जून, 2024 को यह कॉलम पढ़ेंगे, तब नरेंद्र मोदी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके होंगे, लेकिन ये वे मोदी नहीं होंगे। यहां एक दल वाले सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में वे नहीं होंगे। इस बार वे कई दलों के गठबंधन के प्रधानमंत्री होंगे। इनमें कई दल ऐसे भी हैं, जिनके पास 20 से कम सीटें हैं, जैसे कि टीडीपी के 16 और जेडीयू के पास 12 सांसद हैं। यह उनके लिए पूरी तरह से एक नया अनुभव होगा। एक प्रचारक, भाजपा के महासचिव, गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के अपने 55 साल के सार्वजनिक जीवन में मोदी के पास इस तरह की भूमिका की  पहले से कोई तैयारी नहीं है। अब वे एक ऐसे खेल में उतरने जा रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें बहुत जानकारी नहीं है।

लोकतंत्र की आंशिक बहाली
हाल ही में खत्म हुए लोकसभा चुनाव में देश के लोगों ने उन चीजों को हासिल किया, जो कुछ सप्ताह पहले तक असंभव लग रहा था। अब दोनों सदनों की कार्यवाही नियम, कानून और सर्वसम्मति से चलेगी, न कि पीठासीन अधिकारी और सदन के नेता के हिसाब से । सदन की विभिन्न समितियों की संरचना अधिक संतुलित होगी और सदन के अध्यक्ष ऐसे होंगे, जो सभी दलों को स्वीकार्य होंगे। लोकसभा में विपक्ष का एक नेता होगा, जिसके पास सांसदों की पर्याप्त संख्या होगी। देश के संविधान को बिना ट्रेजरी बेंच और विपक्ष की सहमति के बिना कोई संशोधन नहीं किया जा सकेगा।


कैबिनेट या मंत्रिपरिषद की बैठकों में अब प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए फैसलों का औपचारिक समर्थन नहीं होगा, जैसा कि कई मामलों में हो चुका है। उदाहरण के लिए, अब कैबिनेट को प्रधानमंत्री के कठोर कदम के बारे में केवल 'सूचित' नहीं किया जाएगा, बल्कि राज्यों के अधिकारों को स्वीकार किया जाएगा और उनकी बेहतर सुरक्षा की जाएगी; राज्यों को धन के हस्तांतरण और मंत्रालयों/विभागों और योजनाओं को धन का आवंटन मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकेगा, इसमें भी घटक दलों की सहमति लेनी होगी। अब प्रधानमंत्री को सदनों की कार्यवाही में अधिक से अधिक हिस्सा लेना होगा और विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने और महत्वपूर्ण बहसों में भाग भी लेना पड़ सकता है।

जनादेश से सीख
इस बार लोगों ने अपनी बात कह दी है। वे स्वतंत्रता, बोलने और अभिव्यक्ति के अधिकार, निजता के अधिकार और विरोध के अधिकार को महत्व देते हैं। सरकार को 'देशद्रोह' और 'मानहानि' के फर्जी मामले दायर करने की आदत छोड़नी होगी। यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए एक सीख होगी। उन्हें भी 'एनकाउंटर' और 'बुलडोजर न्याय' को छोड़ देना चाहिए। राम मंदिर राजनीति से दूर की चीज है और उसे दोबारा राजनीतिक मकसद के लिए उपयोग नहीं करना चाहिए। 77 साल के समाजवादी पार्टी के नेता अवधेश प्रसाद, फैजाबाद से चुनाव जीत गए, जबकि प्रधानमंत्री के पूर्व मुख्य सचिव और मंदिर निर्माण ट्रस्ट के मुखिया नृपेंद्र मिश्रा के बेटे साकेत श्रावस्ती से चुनाव हार गए। जनता स्वतंत्र मीडिया चाहती है, वह मनगढंत एग्जिट पोल नहीं चाहती और न ही वह प्रधानमंत्री की हर बात का कवरेज चाहती है। जनता पहले से निर्धारित सवाल-जबाव भी नहीं चाहती है और न ही वह ईडी और सीबीआई के दिए गए आंकड़ों पर विश्वास करती है। लोगों का मानना है कि क्षेत्रीय दलों को अपनी मूल मान्यताओं पर डटे रहना चाहिए बजाय इसके कि वह दिल्ली में कुछ कहे और राज्य की राजधानी में कुछ और। ऐसा करने वाली पार्टियों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए, जनता ने पहले  असम गण परिषद, शिरोमणि अकाली दल, जननायक जनता पार्टी और जनता दल सेक्यूलर को जनादेश न देकर सबक सिखाया।  मौजूदा चुनाव में बीजू जनता दल और वाईएसआरसीपी के साथ भी जनता ने ऐसा ही किया है। यह सबक तेलुगु देशम पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के लिए एक नजीर हो सकती है।

विपक्ष को एजेंडा उठाना चाहिए
विपक्ष के पास 10 साल बाद संसद के अंदर जिम्मेदार विपक्षी दल की तरह व्यवहार करने का मौका है। उसे संसद के अंदर और बाहर अपने एजेंडे को मजबूती से उठाना चाहिए। यहां कुछ बातें हैं, जिन्होंने लोगों के मन को प्रभावित किया है और लोगों ने बड़ी संख्या में इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवारों को चुना है।

सामाजिक-आर्थिक आधार पर जातीय जनगणना
  • संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम को तुरंत लागू करें और 2025 से निर्वाचित विधायिकाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण प्रदान करें।
  • मनरेगा सहित हर प्रकार के रोजगार के लिए प्रतिदिन 400 रुपये की न्यूनतम मजदूरी लागू करें।
  • कृषि ऋण से प्रभावित किसानों के लिए एक स्थायी आयोग नियुक्त करें और उसकी सिफारिशों के अनुसार कृषि ऋण माफ करें।
  • सरकारी और सरकार द्वारा नियंत्रित निकायों में खाली पड़ी 30 लाख रिक्तियों को भरें।
  • प्रत्येक व्यावसायिक प्रतिष्ठान को प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने और वजीफे का बोझ साझा करने के लिए कहा जाए, यदि आवश्यक हो, तो एक्ट को संशोधित किया जाए। अप्रेंटिस एक्ट को तुरंत लागू करें।

अग्निवीर योजना का समापन
 सीएए कानून को खत्म करें, जब तक सुप्रीम कोर्ट इसे संवैधानिक न करार दे।
 जांच एजेंसियों (सीबीआई, ईडी, एनआईए, एसएफआईओ, एनसीबी, आदि) को एक संयुक्त संसदीय समिति की निगरानी में लाया जाए।

एक नया खेल
9 जून को एक नया खेल शुरू होगा। आने और जाने पर नजर बनाए रखें। इस खेल में कुछ नए खिलाड़ी सबसे आगे होंगे।
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