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AI: एआई से क्यों डरे निवेशक? आईटी निवेशकों का डगमगाता भरोसा

Thu, 12 Mar 2026 07:26 AM IST
P. S. Vohra पीएस वोहरा
Updated Thu, 12 Mar 2026 07:26 AM IST
सार

एआई के कारण आईटी क्षेत्र अनिश्चितता के दौर में है। नतीजतन, पूंजी बाजार में निवेशकों का आईटी कंपनियों से मोहभंग बढ़ता दिख रहा है।
 

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Why are investors afraid of AI IT investors confidence is wavering
एआई से डरे निवेशक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यह अंदेशा जोरों पर है कि पूंजी बाजार में निवेशकों का आईटी क्षेत्र की कंपनियों से मोहभंग हो रहा है और वे अपने निवेश को तेजी से निकाल रहे हैं। इसकी पुष्टि पिछले फरवरी में प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर बाजार में हुई भयंकर बिकवाली से होती है। नतीजतन, 2006 की वैश्विक मंदी के बाद पहली बार भारतीय पूंजी बाजार, बीएसई व एनएससी पर आईटी कंपनियों का इंडेक्स करीब 20.9 फीसदी गिर गया। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल, 2025 से अब तक, आईटी इंडेक्स करीब 16 फीसदी गिर चुका है।
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निवेशकों के मोहभंग का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता चलन है। पिछले महीने एआई कंपनी, एंथ्रोपिक के नए टूल ‘क्लाउड कोड’ के कारण मात्र एक दिन में भारतीय कंपनियों के शेयर सात प्रतिशत गिर गए। इस गिरावट में भारत की चार बड़ी आईटी कंपनियों ने भारतीय पूंजी बाजार में करीब नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खो दी। हैरानी वाली बात यह है कि एंथ्रोपिक किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं है। यह बात भी समझनी जरूरी है कि भारत की 10 बड़ी आईटी कंपनियों का मार्केट कैप 328 अरब अमेरिकी डॉलर है, जबकि अकेले एंथ्रोपिक का 350 अरब अमेरिकी डॉलर है।
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क्या एआई, भारतीय आईटी कंपनियों के मुनाफे को कम कर देगा? निवेशकों का इस बात के प्रति अंदेशा गलत नहीं है, क्योंकि वर्तमान में भारतीय आईटी कंपनियां मुख्य तौर पर सेवा के क्षेत्र में हैं। सेवा क्षेत्र की कंपनियाँ पिछले बीस से अधिक वर्षों से अमेरिका और यूरोप के लिए तकनीक से जुड़े कई काम कम लागत पर कर रही हैं। इन कामों को बड़ी संख्या में कर्मचारी मिलकर करते हैं। इसके बदले कंपनियों को कर्मचारियों के काम के घंटों के अनुसार डॉलर में भुगतान मिलता है। इस आय का एक हिस्सा कर्मचारियों को वेतन के रूप में दिया जाता है। अब चूंकि यह बात सर्वविदित होने लगी है कि एआई के इस्तेमाल से तकनीकी कामों में, खासकर कोडिंग का काम, मशीनों द्वारा ही किया जाने लगेगा। इससे कर्मचारियों पर होने वाला खर्च कम हो जाएगा और इसका असर कंपनियों के मुनाफे में कमी के रूप में दिखाई दे सकता है।
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एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में भारतीय आईटी कंपनियों द्वारा सेवा के जरिये होनेे वाली कमाई के अंतर्गत एप डेवलपमेंट का हिस्सा 25 प्रतिशत, रखरखाव का 30, बीपीओ का 10 व अन्य सभी आय का 35 फीसदी हिस्सा है। चर्चा है कि भविष्य में एप डेवलपमेंट व रखरखाव में व्यक्तिगत श्रम के बजाय एआई का हिस्सा तुलनात्मक रूप से क्रमशः 60 व 35 प्रतिशत हो जाएगा। बीपीओ में एआई 40 फीसदी की हिस्सेदारी रखने लगेगा, जिसके चलते कंपनियों के कुल मुनाफे में करीब आठ से 10 फीसदी की कमी देखने को मिलेगी। हालांकि, इसका असर उन कंपनियों पर नहीं दिखेगा, जो सेवा के बजाय तकनीक से संबंधित उत्पादों को बनाने में लगी हुईं हैं। निवेशकों के आशंकित होने का एक कारण यह भी है कि शैक्षणिक क्षेत्र में आईटी के एआई के पाठ्यक्रम में कोई भी होने वाला सुधार तुरंत कंपनियों को लाभ नहीं दे सकता, क्योंकि पाठ्यक्रमों के जरिये युवा इंजीनियर आने वाले चार वर्षों में भारतीय बाजार को उपलब्ध हो सकेंगे।

कई शोध यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि आने वाले समय में फ्रेशर्स के लिए आईटी क्षेत्र में रोजगार की संभावना बहुत कम हो जाएगी, क्योंकि उनका कार्य मशीन द्वारा होगा। वर्तमान में भारतीय आईटी क्षेत्र जीडीपी में तकरीबन सात फीसदी से अधिक का अंशदान देता है और बड़ी तादाद में रोजगार भी, किंतु निवेशकों को यही समझ आ रहा है कि आईटी क्षेत्र में तेजी भारतीय पूंजी बाजार में वर्ष 2000 में (वाई टू के) की समस्या के साथ शुरू हुई थी, जो अब एआई के कारण अनिश्चितता के दौर में है। इसी के चलते निवेशकों द्वारा शेयर बाजार में बिकवाली की जा रही है। इसके अलावा, बीते दिनों अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, जिसके चलते वहां पर वित्तीय लागत बढ़ गई। भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों का अमेरिका के साथ हिस्सा करीब 50 से 60 फीसदी के आसपास है। इस कारण भी आईटी कंपनियों के मुनाफों में दबाव देखने को मिला।


एक अन्य पक्ष यह भी है कि ओपन एआई, चैटजीपीटी या ग्रोक जैसी कंपनियां पिछले 5-6 वर्षों से ही बाजारों में प्रचलित हुईं हैं और ये खुद आश्चर्यचकित हैं कि इनके ग्राहकों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी है। परंतु इस संबंध में आईटी कंपनियों ने इस पूर्वानुमान को क्यों सही ढंग से आकलित नहीं किया, यह प्रश्न भी शायद निवेशकों के मन में लगातार बना हुआ है और उसी के चलते वे आईटी कंपनियों के प्रति अब सावधानी बरत रहे हैं। अब इस बात की भी सुगबुगाहट हो रही है कि बीते कई दिनों से ई-कॉमर्स क्षेत्र के अंतर्गत गिग श्रमिकों का रोजगार अधिक प्रचलन में है, जो एआई के बढ़ते प्रचलन से दबाव में आ सकता है और आने वाले समय में ग्राहकों के घर पर डिलीवरी भी व्यक्तिगत श्रम के बजाय मशीनीकृत हो जाए।
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