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कौन-से वाले सुबूत भेजे हैं
सूर्यकुमार पांडेय
Updated Tue, 05 Jan 2016 07:39 PM IST
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सीन-1
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ठाकुर- अरे, ओ गब्बर! कुल कितने आदमी भेजे थे तूने? गब्बर-चार ठाकुर! पूरे चार। ठाकुर-लेकिन पांच को तो हम पहले ही मार चुके और अब छठवें को भी छठी का दूध पिला चुके हैं। गब्बर-अरे, वाह ठाकुर! कैसे पता चला कि हमारे आदमी दूध पीते हैं। ठाकुर-अब यह भी समझाना होगा कि सांप को चाय नहीं, दूध ही पिलाया जाता है। गब्बर-खैर, वह बात छोड़ो। मुझे जरा यह बताओ कि जब तुम हमारे अड्डे पर आए थे, तो हमारी मेहमाननवाजी कैसी लगी थी? ठाकुर-मेहमाननवाजी से भयंकर तो तेरा यह रिटर्न गिफ्ट है, जो तूने अब भेजा है। गब्बर-यही तो हमारा आदान-प्रदान है। इस परंपरा को मैं बनाए रखना चाहता हूं। बहरहाल, तुम उधर से क्या भेज रहे हो? ठाकुर-वही, जो हम हर बार भेजते हैं-ठोस सुबूत।
सीन-2
गब्बर-अरे ओ सांभा! दिखा तो, अबकी बार कौन-से वाले ठोस सुबूत भेजे हैं ठाकुर ने? सांभा-सरदार, वैसे ही हैं, जैसे पीछे कई बार ठाकुर ने भिजवाए थे। गब्बर-तो अब तू ही बता, इनका क्या करें हम? सांभा-कुछ नहीं सरदार। तुम तो वही करो, जो हमेशा से करते आए हो। गब्बर-तो खबर कर दे ठाकुर को। बोल, हमें उनका कोई रिटर्न गिफ्ट नहीं मिला है। हम इन्कार करते हैं।
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सांभा-सरदार, अभी-अभी कालिया ठाकुर के गांव से लौटा है। खबर लाया है कि ठाकुर के लोग आपसे बातचीत करने वाले हैं। गब्बर-हो! हो! हो! बातचीत। हमें पता है, ठाकुर और उसके लोग हमसे बातचीत करना नहीं छोड़ सकते और हम अपनी आदत। हमने इतने आदमी किसलिए पाल रखे हैं? अगर इन्हें काम पर नहीं लगाया, तो कल ये हमें ठिकाने लगाने में लग जाएंगे।
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सांभा-तो आगे की क्या सोची है, सरदार! गब्बर-जब हमारे आदमियों ने हमारा नमक खाया है, तो कल को ये ही...। सांभा-समझ गया सरदार, कल को ये लोग ही ठाकुर की गोली भी खाएंगे।