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जान जोखिम में डालकर इस व्यक्ति ने ऐसा करतब दिखाया दुनिया हैरान रह गई
स्वामी स्वरूपानंद
Updated Tue, 28 Apr 2015 09:29 AM IST
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फ्रांस के सेंट आमेर प्रांत में जन्मा चार्ल्स ब्लॉन्डिन गरीबी के कारण ऊंची शिक्षा हासिल नहीं कर सका। मामूली पढ़ाई-लिखाई के बाद किसी तरह उसे जिमनास्टिक विद्यालय में दाखिला मिल गया। 1840 में वह अमेरिका गया, तो उसने नियाग्रा का प्रपात देखा। 360 मीटर चौड़ा यह प्रपात अमेरिका और कनाडा के बीच जोड़ की तरह है। उसे देखकर चार्ल्स ब्लॉन्डिन ने घोषणा की कि वह प्रपात को रस्से पर चलकर पार करेगा।
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किसी ने भरोसा नहीं किया। पर चार्ल्स ने निश्चित तिथि पर प्रपात के दोनों किनारे पर रस्सा बांधकर इस तरह पार कर दिखाया, जैसे दीवार पर चल रहा हो। कनाडा वाले सिरे पर पहुंचकर उसने फिर उसी रास्ते अमेरिका जाने की घोषणा कर दी। इस बार उसने एक कैमरा भी साथ लिया, ताकि नियाग्रा के सुंदर दृश्यों को वह कैद कर सके।
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लेकिन वह बीच तक ही पहुंचा था कि उसका संतुलन डगमगा गया। उसके हाथ का बांस प्रपात में जा गिरा। दर्शकों की आहें निकल गईं, मगर ब्लॉन्डिन ने तुरंत संतुलन बनाया और बीच रस्से पर खड़े होकर फोटो लिए।
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तीसरी बार उसने अपने लड़के को कंधे पर बिठाकर नियाग्रा प्रपात पार किया। अंतिम बार ब्लॉन्डिन ने एक अन्य व्यक्ति को कंधे पर बैठाकर नियाग्रा को पार किया। पहले तो कोई भी व्यक्ति इस जोखिम भरे कार्य के लिए तैयार न हुआ, और जो व्यक्ति तैयार भी हुआ, उसे जब चार्ल्स ने कंधे से उतारा, तो वह डर के मारे बेहोश था।
खैर, चार्ल्स इसके बाद जब इंग्लैंड पहुंचा, तो लोगों ने उसे हाथों हाथ लिया। अपने प्रवास काल में उसने अनेकों करतब दिखाए। फ्रांस लौटने पर तो उसका भव्य हार्दिक स्वागत हुआ। 1895 में चार्ल्स स्वामी विवेकानंद से पेरिस में मिला भी था। स्वामी जी ने चार्ल्स को वेदांत का जीता-जागता उदाहरण बताया था।