{"_id":"d665dee47d5123237febaf8e73d8b7e0","slug":"when-trouble-crosses-its-boundries-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल में पत्नी की मौत की खबर सुनकर तिलक ने लिया यह बड़ा फैसला","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
जेल में पत्नी की मौत की खबर सुनकर तिलक ने लिया यह बड़ा फैसला
दीपिका जोशी
Updated Wed, 10 Jun 2015 09:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाल गंगाधर तिलक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नायक तो थे ही, साथ में वह अद्वितीय कीर्तनकार, तत्व चिंतक, गणितज्ञ, धर्म प्रवर्तक और दार्शनिक भी थे। पराधीन भारत में राजकीय असंतोष मचाने वाले इस निग्रही महापुरुष को अंग्रेज सरकार ने मंडाले के कारागृह में छह साल के लिए भेज दिया।
विज्ञापन
पढ़ें, धन और खुशहाली लाने वाले वास्तु के 15 खास टिप्स, फायदा खुद महसूस करेंगे
विज्ञापन
उसी कारागृह से उनके तत्व चिंतन का प्रारंभ हुआ। दुख और यातना सहते-सहते उनके शरीर को व्याधियों ने घेर लिया था। ऐसे मुश्किल हालात में ही उन्हें अपने पत्नी की मौत की खबर मिली। उन्होंने अपने घर एक खत लिखा, आपका तार मिला। मेरे मन को धक्का तो जरूर लगा है। मैंने आए हुए संकटों का सामना हमेशा धैर्य के साथ किया है। लेकिन इस खबर से मैं थोड़ा उदास हो गया हूं।
विज्ञापन
पढ़ें, महाभारत के इन पात्रों के जन्म की कहानी जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे
हम हिंदू लोग मानते हैं कि पति से पहले पत्नी को मृत्यु आती है, तो वह भाग्यवान है, उसके साथ भी ऐसे ही हुआ है। उसकी मृत्यु के समय मैं वहां उसके करीब नहीं था, इसका मुझे बहुत अफसोस है। होनी को भला कौन टाल सकता है? परंतु मैं अपने दुख भरे विचार सुनाकर आप सबको और दुखी नहीं करना चाहता। मेरी गैरमौजूदगी में बच्चों को ज्यादा दुख होना स्वाभाविक है। उन्हें मेरा संदेशा पहुंचा दीजिए कि जो होना था, वह हो चुका है।
अत्यंत कष्ट के समय पत्नी के निधन का समाचार बाल गंगाधर तिलक के लिए एक कठिन परीक्षा के समान था। किंतु उन्होंने अपना धीरज न खोते हुए परिवारवालों का धैर्य बंधाया और उस मुश्किल को सफलतापूर्वक पार किया। तिलक जी ने जीवन भर कर्मयोग का चिंतन किया था। गीता जैसे तात्विक और अलौकिक ग्रंथ पर आधारित गीता रहस्य उन्होंने उसी मंडाले के कारागृह में लिखा था।