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नवाज शरीफ क्या कर सकते हैं

Fri, 23 Aug 2013 08:12 PM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Fri, 23 Aug 2013 08:12 PM IST
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what can do nawaz sharif

नवाज शरीफ कई बार भारत से संबंध सुधारने की इच्छा जता चुके हैं। सभी विवादित मुद्दों का हल निकालने के लिए एक साथ खुले और साफ दिल से बैठने पर भी वह लगातार जोर दे रहे हैं। जबकि हालात बता रहे हैं कि वह अब तक न तो पाक फौज का बॉस बन सके हैं और न ही भारत के साथ रिश्तों में सुधार ला सके हैं।

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बल्कि आपसी रिश्ते और खराब हो गए हैं। पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम का उल्लंघन लगातार हो रहा है। बीते छह अगस्त को पाक सेना के हमले में पांच सैनिकों की शहादत के बाद से नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी बराबर जारी है। दोनों देशों की संसद ने इस बारे में एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए निंदा प्रस्ताव भी पारित किए हैं।
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आपसी रिश्तों में आई खटास का बुरा असर दिखाई देने लगा है। सचिव स्तर पर जो बातचीत होने जा रही थी, वह अब नहीं होगी। पाकिस्तान ने उन जायरीन का दिल्ली दौरा रद्द कर दिया है, जो उर्स के सिलसिले में भारत आ रहे थे। पाक प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने तो यहां तक कहा है कि असली वार्ता भारत की अगली सरकार के साथ ही होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की सितंबर में होने वाली बैठक के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच वार्ता से कोई नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है।
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पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जहां सेना आईएसआई और दहशतगर्द गुटों का वर्चस्व कायम है। ये तत्व इस कोशिश में जुटे हैं कि नई लोकतांत्रिक सरकार को मजबूत न होने दिया जाए। लेकिन खुद पाकिस्तान आंतरिक बिखराव का शिकार भी है। पाक सेना को लगता है कि भारत के साथ शांति बहाली उसका महत्व कम कर देगी। हाल में भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते मधुर हुए हैं, जो पाक सेना को नहीं भाते। अगले साल भारत में लोकसभा चुनाव होने हैं। तब पूरा तंत्र चुनावी प्रक्रिया में जुटा होगा, जिसका फायदा पाक सेना उठाना चाहेगी।

पाक सरकार और सेना में इन दिनों कुछ और मुद्दों पर भी मतभेद सामने आ रहे हैं। वहां दहशतगर्दी चरम पर पहुंच गई है। तहरीक-ए-तालिबान वहां शरीअत लागू करने व इस्लामी राज कायम करने की मांग कर रहे हैं। अधिकांश विध्वंसक वारदातों की जिम्मेदारी उसने कुबूली है, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल गिर रहा है।

जनरल कयानी दहशतगर्दी को कुचलने के लिए फौजी ऑपरेशन के हक में है। जबकि सरकार चाहती है कि तालिबान से बातचीत की जाए। दहशतगर्दी का मुकाबला करने के लिए नई सुरक्षा नीति भी बनाई जा रही है। डॉन अखबार ने भी नवाज शरीफ को मशवरा दिया है कि वह सबसे पहले दहशतगर्दी को खत्म करें। चंद दिनों पहले तालिबान द्वारा नवाज शरीफ की हत्या की साजिश का मामला भी सामने आया था।

बेनजीर भुट्टो और बलूच नेता अकबर बुग्ती की हत्या, लाल मस्जिद ऑपरेशन व जजों की हिरासत के मामले में मुकदमों का सामना कर रहे परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान से निकल जाने के लिए सुरक्षित रास्ता देने के बारे में  जनरल कयानी ने नवाज शरीफ से कहा था। पर वायदा कर लेने के बावजूद शरीफ ऐसा नहीं कर पाए।

उन्हें डर है कि अगर मुशर्रफ को जाने दिया गया, तो उनके और सर्वोच्च न्यायालय के बीच जंग छिड़ जाएगी और वह न्यायपालिका की अवमानना के चक्कर में फंस जाएंगे। सरकार का खजाना खाली है। विदेशी पूंजी निवेश लगभग बंद हो गया है। नवाज शरीफ क्षेत्र में हथियारों की होड़ खत्म करने के लिए रक्षा खर्च में कटौती करना चाहते हैं। लेकिन फौज को यह मंजूर नहीं है। जनरल कयानी 28 दिसंबर को सेवा निवृत्त हो रहे हैं। शरीफ इससे पहले ही उनके उत्तराधिकारी को नामित कर रहे हैं।


भारत सिर्फ यही चाहता है कि पाक प्रधानमंत्री अपनी जमीन से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाएं और नियंत्रण रेखा पर शांति कायम हो, ताकि आपसी संबंधों में सुधार आए। बातचीत से ही समस्याओं का हल निकलेगा। इसके लिए जरूरी है कि इस्लामाबाद सेना व आईएसआई को हद से बाहर न जाने दे। तभी पाकिस्तान में शांति बहाली होगी।

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