मौसम, फैशन और बाजार
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इस बार रावलपिंडी और इस्लामाबाद में मेरी याद में सबसे लंबी सर्दी रही है। आधिकारिक तौर पर सर्दी को बहुत पहले ही खत्म हो जाना चाहिए, क्योंकि यह मार्च का आखिरी हफ्ता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान हुई बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर हमें याद दिलाया है कि जलवायु परिवर्तन लगातार मौसम पर कहर बरपा रहा है। पिछले कुछ समय से इन दोनों शहरों में पीले मोतिया (चमेली की प्रजाति का सुगंधरहित फूल) का फूल खिल रहा है और पारंपरिक रूप से यह वसंत के आगमन का सूचक है। पर कुछ घरों में अब भी हीटर जल रहा है, जबकि शॉल एवं जैकेट अब भी रखे नहीं गए हैं।
लेकिन मौसम की बेवफाई का इस क्षेत्र में अगर किसी को सर्वाधिक नुकसान हुआ है, तो वे हैं, लॉन फैब्रिक (मलमल जैसा कपड़ा) के निर्माता एवं वितरक। यह मुख्यतः कपास से बुना हुआ कपड़ा होता है, जिसे हर पाकिस्तानी महिला वसंत के अंत से लेकर गर्मी के आखिर तक खरीदती है। उत्तम क्वालिटी के इस पाकिस्तानी कपड़े का व्यवसाय आज अरबों रुपये में है। पारंपरिक रूप से कई दशक पहले जब मई में गर्मी बढ़नी शुरू होती थी, तो लड़कियां और महिलाएं सफेद सूती सलवार, लॉन या सूती कमीज और सफेद मुस्लिम दुपट्टा निकाल लेती थीं। फिर सस्ते लॉन बाजार में आने लगे, लेकिन आज अरबों रुपये के इस उद्योग ने देश में तूफान ला दिया है।
मेरे भारतीय मित्र जब पाकिस्तान आते हैं, तो बड़े पैमाने पर सौ फीसदी शुद्ध सूती पाकिस्तानी लॉन खरीदते हैं। अब सामान्य सूती कमीजों के दिन नहीं रहे। आज लॉन फैशन स्टेटमेंट बन गया है, क्योंकि बाजार में डिजाइनर लॉन आ गए हैं। गुल अहमद जैसे बड़े डिजाइनरों की तो अनेक भारतीय शहरों में प्रदर्शनियां भी लग चुकी हैं, जहां बिक्री जबर्दस्त रही। पाकिस्तान में यह जितने में उपलब्ध है, उससे कहीं ज्यादा महंगे दामों में उन प्रदर्शनियों में बेचा जाता है। लेकिन पाकिस्तानी लॉन की लोकप्रियता ही इतनी ज्यादा है कि सभी प्रदर्शित कपड़े बिक जाते हैं। इससे पाकिस्तानी मैन्युफैक्चरर्स को महसूस होने लगा है कि भारतीय बाजार कितना विशाल है।
भारत के अलावा, दुबई और लंदन में डिजाइनर लॉन जोड़े की भारी मांग है, क्योंकि दक्षिण एशियाई महिलाओं की बड़ी आबादी देसी कपड़े पहनना चाहती हैं। आज लॉन जोड़े को बेहतरीन और शुद्ध सूती धागे से इतनी खूबसूरती से तैयार किया जाता है कि आप उसे घर, ऑफिस के अलावा पार्टी या शादी समारोह में भी पहन सकते हैं।
तथ्य यह है कि कई शहरों में गर्मी में चालीस डिग्री से भी ज्यादा तापमान होता है और बिजली कटौती होती है, ऐसे में लॉन पहनने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। सामान्य घरों में भी न सिर्फ बेगम साहिब और उनकी बेटियां खूबसूरत लॉन जोड़ा पहनती हैं, बल्कि घरेलू नौकरानियां भी उसे पहनती हैं।
स्थानीय छोटी दुकानों में जाकर गर्मी का लॉन जोड़ा खरीदने की परंपरा भी पाकिस्तान में बदल रही है, क्योंकि बहुमंजिली शॉपिंग मॉल समेत बड़े-बड़े ब्रांडों ने छोटी दुकानों को धीरे-धीरे बाहर खदेड़ दिया है। कई उद्यमी बताते हैं कि उन्हें पाकिस्तान के पसंदीदा गर्मी के कपड़े बनाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रमुख हैं- बिजली का अभाव, बिजली की कीमतों में लगातार वृद्धि, भारी उत्पादन लागत और निस्संदेह खराब कानून-व्यवस्था। लेकिन ये उद्यमी अच्छी तरह जानते हैं कि गर्मी आते ही पाकिस्तानी महिलाएं नए डिजाइन के लॉन जोड़ों की तलाश में बाजार में जरूर आएंगी।
पाकिस्तानी महिलाएं भी आज ज्यादा आत्मविश्वासी हो गई हैं। सिल्क या अन्य सिंथेटिक जोड़ों में असहज महसूस करने के बजाय शादियों में वे लॉन जोड़े की मांग करती हैं और उनकी मांग की पूर्ति लॉन मैन्युफैक्चरर्स करते हैं। अब औपचारिक अवसरों के लिए बेल और विविध रंगों के थोड़े महंगे पत्थरों से सुसज्जित सुंदर और जटिल कढ़ाई वाले महंगे लॉन जोड़े उपलब्ध हैं। इसे औपचारिक रूप देने के लिए आम तौर पर दुपट्टे शिफॉन के बनाए जाते हैं।
लेकिन लॉन जोड़े की दुनिया में जीवन हमेशा सही नहीं होता है। जैसा कि भारतीय महिलाओं का अनुभव है, दर्जी समय पर जोड़ा सिलकर नहीं देते। पाकिस्तान में कुछ महिलाओं का सबसे बड़ा डर यही है कि जब उन्हें जोड़ा दर्जी से वापस मिले, तो ऐसा न हो कि ठीक वही प्रिंट पड़ोस में कोई पहने हों। इस तरह से ये दर्जी भी बिक्री घटाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, क्योंकि जब तक आपका जोड़ा सिलकर नहीं आएगा, आप नया कपड़ा नहीं खरीदेंगी। इसलिए मैन्युफैक्चरर्स अब महिलाओं के लिए तैयार कपड़े बेचते हैं। इस प्रतिस्पर्धी बाजार की दूसरी खामी यह है कि डिजाइनर जोड़ा बनाने में बहुत ज्यादा कढ़ाई, बेल और अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल करते हैं। इससे वह भारी हो जाता है और गर्मी में उसे पसंद नहीं किया जाता, क्योंकि महिलाएं सामान्य और हल्का जोड़ा चाहती हैं।
पाकिस्तान की हर मशहूर हस्ती का अपना ब्रांड है, भले ही वे उसके बारे में कुछ न जानते हों। नतीजतन फैशन उद्योग में नकल की शिकायतें बढ़ गई हैं और देखा जाता है कि डिजाइनरों के नकली संस्करण आधे दामों पर बेचे जा रहे हैं, जिसे कई महिलाएं खरीदती हैं। इसके अलावा एक सामान्य शुद्ध सूती लॉन जोड़ा, चाहे वह ब्रांडेड हो या नहीं, की कीमत मानसून के दौरान बहुत बढ़ जाती है।
हालांकि कई महिलाओं ने सर्दी के कारण अभी अपने पुराने जोड़े को बाहर नहीं निकाला है, लेकिन वे जानती हैं कि जैसे ही अप्रैल शुरू होगा, मौसम गर्म होगा और दुकानें कपड़ों से भर जाएंगी, तो लॉन जोड़ों के प्रति ललक बहुत बढ़ जाएगी। यह तो समय ही बताएगा कि वे कब अपनी गर्मी की खरीदारी शुरू करेंगी।
-लेखिका पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार हैं