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बलूचिस्तान से उठती आवाजें, मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन पर उठती आजादी की मांग

Wed, 23 Oct 2019 11:31 AM IST
kuldeep talwar कुलदीप तलवार
Updated Wed, 23 Oct 2019 11:31 AM IST
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Voices rising from Balochistan
प्रदर्शन करते बलोच लोग - फोटो : ANI

पाकिस्तान इन दिनों बिखराव के कगार पर है। मुख्य कारण पाकिस्तान में मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। सिंधी, पख्तून व बलूच समुदाय ने पाकिस्तान से अपनी आजादी की मांग तेज कर दी है। बलूच महिलाएं भी इसके लिए अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं और लापता लोगों को सामने लाने के लिए सड़कों पर उतर आई हैं। यह विडंबना है कि पाक सेना व आईएसआई इनको राष्ट्रवादी न मानकर विद्रोही करार देती है। नतीजतन वे लोग पाक से पलायन करके दूसरे देशों में शरण ले रहे हैं। इसकी ताजा मिसाल- राष्ट्रवादी महिला गुलालाई इस्माईल ने पाकिस्तान से भागकर अमेरिका में शरण ली है।


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चंद दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ह्यूसटन में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित कर रहे थे तो ठीक उस समय सिंधी, पख्तून व बलूच समुदाय के प्रतिनिधियों ने एनआरजी स्टेडियम के सामने प्रदर्शन किया था। उन्होंने पाक से आजादी दिलाने के लिए मोदी और ट्रंप से मदद करने की अपील की। अमेरिका जाने से पहले भी बलूच नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता अशरफ बलूच ने ट्विटर पर मोदी को उनके जन्मदिन पर शुभकामना देते हुए प्रार्थना की थी कि वह संयुक्त राष्ट्र व सभी मंचों से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाएं। एक रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में लगभग 20,000 लोगों का अपहरण हुआ है और इसमें 2,500 से अधिक गोलियों से छलनी व भयानक अत्याचारों के प्रमाण देने वाले शव बरामद हुए हैं। सितंबर में जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की बैठक में बलूच लेखक कमर मलिक ने चेतावनी दी कि ’बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारी इस्लामी उग्रवाद का एक औजार के रूप में प्रयोग करते हुए आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए बलूच राष्ट्रीय संघर्ष को कुचल रहे हैं।

याद रहे जब देश का बंटवारा हुआ था, उस समय बलूचिस्तान प्रांत का पाकिस्तान में जबरदस्ती विलय कर दिया गया था। बलूच राष्ट्रवादियों का कहना है कि जिस तरह से उन्हें पाकिस्तान में मिलाया गया वह गैर-कानूनी था। अंग्रेजों के जाने के बाद बलूचियों ने अपनी आजादी का एलान कर दिया और पाकिस्तान ने भी इसे स्वीकार कर लिया। लेकिन बाद में मार्च 1948 में वहां पाक की सेना आई और बलूचिस्तान के कलात का अपहरण कर कराची ले गई। वहां उन पर दबाव बनाकर पाक के साथ विलय पर हस्ताक्षर करा लिए गए।

बलूचिस्तान प्रांत पाकिस्तान में क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा है। पाक का 40 प्रतिशत हिस्सा ये प्रांत घेरे हुए है, लेकिन आबादी केवल एक करोड़ के करीब है। प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से बाकी पाकिस्तान से ज्यादा मालामाल है। बलूचियों को पाक संविधान में 18वें संशोधन के तहत जो विशेषाधिकार मिले हुए हैं, उनमें बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर केंद्र व प्रांत दोनों का अधिकार है, जबकि इन संसाधनों पर केवल बलूचियों को अधिकार मिलना चाहिए। बलूच चीन-पाक आर्थिक गलियारे के सख्त खिलाफ हैं। वहां के मुख्यमंत्री का कहना है कि पाक सरकार ने हमसे पूछे बिना ही योजना के लिए हामी भर दी।

भारत सरकार की नीति अब तक किसी दूसरे देश में दखलअंदाजी न करने की है। लेकिन अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर के आतंकवाद को जेहाद बता रहे हैं। मौजूदा बदले हालात में इसकी काट बहुत जरूरी है। भारत को भी बलूचियों, सिंधियों व पख्तूनों पर पाकिस्तानी सेना व आईएसआई द्वारा ढाये जा रहे अत्याचारों को एक गंभीर मानवीय समस्या समझते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विश्व के सामने लाना चाहिए। इससे कश्मीर पर पाकिस्तान के झूठ की पोल भी खुल जाएगी।

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