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वेंस की गर्मजोशी क्या कहती है: अमेरिका रिश्ते और द्विपक्षीय व्यापार समझौते की अहमियत समझता है, मिले कई संकेत
Wed, 23 Apr 2025 08:00 AM IST
ज्योति भास्कर
अनुप्रीता दास-साथ में प्रगति केबी, द न्यूयॉर्क टाइम्स
अनुप्रीता दास-साथ में प्रगति केबी, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 23 Apr 2025 08:00 AM IST
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भारत दौरे पर पीएम मोदी के साथ जेडी वेंस
- फोटो :
PTI
विस्तार
भारत ऐसे किसी भी संकेत की तलाश में है, जिससे पता चले कि वह ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक व्यापार को पुनः व्यवस्थित करने की दिशा में बढ़ाई जा रही भारी टैरिफ की धमकी से बच पाएगा। इसलिए चार दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तस्वीरों को काफी बारीकी से देखा जा रहा है और कई लोगों को उससे जो संकेत मिला, वह पसंद भी आया है। सबसे पहले वेंस के तीनों बच्चे भारतीय परिधान पहने हुए विमान से उतरे। फिर उसके कुछ ही घंटे बाद वे अक्षरधाम मंदिर देखने पहुंचे और मंदिर के बाहर वेंस परिवार ने तस्वीर खिंचवाई, जिसमें वेंस, उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और उनके बच्चे मालाओं से लदे हुए थे।
इन सबके बीच वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गर्मजोशी से गले लगाया, जिन्होंने वेंस के बच्चों को मोर पंख भेंट किए। राष्ट्रपति ट्रंप की चंचलता को देखते हुए, यह जानना असंभव है कि ट्रंप प्रशासन किसी समझौते के लिए तैयार है भी या नहीं। लेकिन वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों और कुछ विश्लेषकों ने वेंस की भारत में उपस्थिति को इसका संकेत माना है कि अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम करना जारी रखना चाहता है, जिसकी रूपरेखा ट्रंप और मोदी ने फरवरी में वाशिंगटन की यात्रा के दौरान तैयार की थी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में कूटनीति और निरस्त्रीकरण के एसोसिएट प्रोफेसर हैप्पीमॉन जैकब ने कहा, ‘यह यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में हो रही है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात को लेकर बेचैनी है कि ट्रंप प्रशासन भारत समेत मित्र देशों के साथ क्या कर रहा है। यह यात्रा भारत को भरोसा दिलाने के लिए की गई है कि रिश्ते पूरी तरह से खराब नहीं होने जा रहे हैं।’
हाल के वर्षों में, भारत ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को अपनी विदेश नीति की रणनीति का एक स्तंभ बनाने का प्रयास किया है, क्योंकि अमेरिकी सरकार उभरते चीन का मुकाबला करने में मदद के लिए भारत की ओर देख रही है। लेकिन ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद दूसरे देशों की तरह भारत भी खुद को अनिश्चित स्थिति में पा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की है, लेकिन उच्च टैरिफ के लिए भारत सरकार की आलोचना भी की है, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश करना मुश्किल हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को टैरिफ का ‘दुरुपयोग करने वाला’ और ‘टैरिफ किंग’ कहा है। इस महीने अपने तथाकथित पारस्परिक टैरिफ पर 90 दिनों की रोक लगाने से पहले, अमेरिका को भारतीय निर्यात पर 26 प्रतिशत का शुल्क लगाया था-यह संख्या भारत के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे के आकार के आधार पर तय की गई थी।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर टैरिफ का बुरा असर पड़ रहा है और लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। लेकिन जब वेंव सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे, तो दोनों तरफ मुस्कान थी। सोमवार शाम को वेंस ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके आवास पर वार्ता की, जिसके बाद वेंस परिवार और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया। मोदी के कार्यालय से जारी एक बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ‘पारस्परिक रूप से लाभकारी’ व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत में ‘महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया।’
जेडी वेंस के कार्यालय ने भी इसी तरह का बयान जारी किया। वेंस और उनका परिवार आधिकारिक कार्यक्रमों के बीच समय निकालकर भारत के दर्शनीय स्थलों की सैर कर रहे हैं। दिल्ली पहुंचने के कुछ समय बाद ही उन्होंने अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया और बेहद उच्च तापमान में बाहर फोटो खिंचवाई। वेंस परिवार के साथ जयपुर का आमेर किला देखने पहुंचे और उनकी आगरा में ताजमहल देखने की भी योजना है। जयपुर में वेंस ने भारत-अमेरिकी व्यापारिक संबंधों पर भी भाषण दिया। अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार और सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखते हुए भारत ने एक उदार रुख अपनाया है तथा अमेरिकी वस्तुओं के कुछ आयातों पर शुल्क घटा दिया है।
फरवरी में, जब मोदी और ट्रंप वाशिंगटन में मिले थे, तो उन्होंने एक व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाना था, जो वर्तमान राशि से दोगुना से भी अधिक है। बातचीत की रूपरेखा में कई तरह के लेन-देन शामिल थे। अमेरिका भारत को अपनी सीमाओं पर निगरानी रखने के लिए जरूरी रक्षा उपकरण बेचेगा और उनका सह-उत्पादन करेगा। भारत अमेरिका से ज्यादा कच्चा तेल और तरल प्राकृतिक गैस खरीदेगा और अवैध आप्रवासन से ज्यादा सख्ती से निपटेगा तथा अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।
जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका के बीच एक सहयोग समझौता, जिसे क्वाड के रूप में जाना जाता है, भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को लेकर चिंतित है, जिसमें महत्वपूर्ण जलमार्ग भी शामिल है। क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ट्रंप शरद ऋतु में भारत आ सकते हैं। वेंस की यात्रा में मुख्य रूप से द्विपक्षीय व्यापार पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि भारत और अमेरिका के बीच अन्य मुद्दे, जैसे विदेशी छात्र वीजा, अवैध आव्रजन और भारतीय नागरिकों के निर्वासन पर बात होगी या नहीं। अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन ने पिछले सप्ताह कहा कि अमेरिका में भारतीय छात्रों को, किसी भी अन्य विदेशी छात्र समूह की तुलना में, ट्रंप प्रशासन द्वारा वीजा निरस्त्रीकरण के लिए लक्षित किया गया है। प्रशासन ने पूरे अमेरिका में सैकड़ों छात्र वीजा रद्द कर दिए हैं, क्योंकि यह आव्रजन और परिसरों में कुछ भाषणों को प्रतिबंधित करता है।