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शहरीकरण से खुलेंगे निवेश के नए रास्ते

Wed, 16 Jul 2014 01:23 AM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 16 Jul 2014 01:23 AM IST
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Urbanisation will promote Investment

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बजट में 100 'स्मार्ट सिटी' बसाने की योजना प्रस्तुत की है। ये स्मार्ट सिटी बड़े तथा मझौले शहरों के आधुनिक उपनगर के रूप में विकसित की जाएंगी। इसके लिए बजट में 7060 करोड़ रुपए के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है। स्मार्ट सिटी के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए इन परियोजनाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में ढील दी गई है। निसंदेह देश की नई स्मार्ट सिटी और बड़े शहरों में आधुनिक सुविधाएं वैश्विक व्यापार बढ़ाने के मद्देनजर अत्यन्त आवश्यक हैं।

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इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन देशों में शहरों की जितनी अधिक प्रगति होती है, वहां आर्थिक अवसरों की उपलब्धता उतनी ही अधिक होती है। यह माना जाता है कि शहर किसी भी राष्ट्र के विकास के आधार स्तंभ होते हैं। जैसे-जैसे शहरों का विकास होता है, वैसे-वैसे उसके साथ नया बाजार भी तैयार होता है।
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उल्लेखनीय है कि भारतीय शहरों के बारे में जो अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत हो रही हैं, उनसे दो महत्वपूर्ण तथ्य उभरकर सामने आ रहे हैं। एक, अब भारत में तीव्र शहरीकरण को नहीं रोका जा सकता और दो, शहरीकरण भारत के चमकीले आर्थिक विकास का आधार बनेगा। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया की जनसंख्या और शहरीकरण के रुझान पर जारी रिपोर्ट 2014 में कहा गया है कि दुनिया में सबसे अधिक आबादी भारत में बढ़ रही है और दुनिया का सबसे अधिक शहरीकरण भी भारत में ही हो रहा है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व की शहरी आबादी अब 3.9 अरब है और उम्मीद है कि 2050 तक यह बढ़कर 6.3 अरब हो जाएगी। भारत की मौजूदा शहरी आबादी 41 करोड़ है और 2050 में यह बढ़कर 81.4 करोड़ हो जाएगी, जो कि दुनिया की सर्वाधिक शहरी आबादी होगी।

वैश्वीकरण के नए परिदृश्य में भारतीय शहर प्रतिभाओं के लिए खुशहाली के नए केंद्र बन गए हैं। प्रतिभाएं शहरों में इसलिए रहना चाहती हैं, क्योंकि शहरों में विश्वस्तरीय रोजगार अवसर सृजित हो रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्लेसमेंट सेंटर बनता जा रहा है। स्थिति यह है कि भारत के शहरों की ओर से विकसित देशों के लिए आउटसोर्सिंग का प्रवाह तेज होता जा रहा है। भारत में अंग्रेजी बोलने वाले पेशेवर सरलता से मिल जाते हैं और भारत में व्यावसायिक कार्यस्थल पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी कम दरों पर उपलब्ध हैं।

वैश्वीकरण का लाभ उठाने के मद्देनजर जरूरी है कि शहर सुनियोजित रूप से विकसित हों। शहर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, यातायात और संचार साधनों से सुसज्जित हों। शहरों में विकास की मूलभूत संरचना, मानव संसाधन के बेहतर उपयोग, जीवन की मूलभूत सुविधाओं तथा सुरक्षा कसौटियों के लिए सुनियोजित प्रयास करना आवश्यक होगा।


इस लिहाज से देश के ज्यादातर शहरों में नवीनीकरण और वर्तमान व्यवस्थाओं में आमूल-चूल बदलाव लाने की जरूरत है। वैश्विक जरूरतों की पूर्ति करने वाले शहरों के विकास की दृष्टि से भारत के लिए यह एक अच्छा संयोग है कि अभी देश में ज्यादातर शहरी ढांचे का निर्माण बाकी है और शहरीकरण की चुनौतियों के मद्देनजर देश के पास शहरी मॉडल को परिवर्तित करने और बेहतर सोच के साथ शहरों के विकास का पर्याप्त समय अभी मौजूद है।

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