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बदलाव की कोशिश में... अंगद-पांव!

Thu, 20 Feb 2014 07:49 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 20 Feb 2014 07:49 PM IST
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Trying to change ... Angad - foot!

अब यह सब नहीं चलेगा!

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क्या सब नहीं चलेगा?

यही, जो इतने दिनों से चला रहे हो।

क्या चला रहे हैं?

अब मुझे क्या मालूम कि क्या चला रहे थे इतने दिनों से!

क्या चल रहा था? काम कर रहे थे।

काम कर रहे होते, तो अगले का तबादला ही क्यों होता?

उनका नहीं पता! दस साल में पांच बदल गए हैं, तो हम क्या करें?

वही कह रहा हूं कि अब वह सब नहीं चलनेवाला। मुझे रिजल्ट चाहिए।

रिजल्ट तो पहले वाले को भी चाहिए थे, हमने दिए भी थे।

अपने तरीके से काम करवाता हूं मैं! आप वह सब बंद करो, जो अब तक चल रहा था।

इस तरह से तो दफ्तर में ताले लगाने पड़ जाएंगे। सारा बदलना या बंद करना पड़ा, तो सभी हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएंगे। फिर काम कैसे होगा?

काम बंद करने के लिए नहीं कह रहा हूं। अब तक जो चल रहा था, वह नहीं चलेगा, यही बताने के लिए आपको बुलाया है।

लेकिन यहां तो काम ऐसे ही होता है। बल्कि हर दफ्तर में काम इसी तरीके से किया जाता है।

मुझे तो बस यही कहना है कि अब तक जो चल रहा था, अब नहीं चलेगा।

ठीक है, मगर आपको यह तो बताना ही पड़ेगा कि फिर कैसे काम करें?

पहले से आप लोगों ने तय कर रखा है, उसे बंद कीजिए, फिर नए ढंग से काम करके दिखाइए।

हमें तो और कोई ढंग आता ही नहीं है काम करने का। यह भी पता नहीं है कि अब तक जो चल रहा था, उसमें बुराई क्या है। जब किसी काम में खराबी नहीं है, तो फिर उसे बदलें क्यों?

वह सब मैं नहीं जानता! मुझे तो बस इतना पता है कि अब यह सब नहीं चलेगा। बाकी स्टाफ को भी आप समझा दें कि मेरे रहते यह सब चलने वाला नहीं है। अब जाइए आप।

दस साल से जमे शख्स ने यह बात पांचवीं बार सुनी! बगैर किसी से कुछ कहे, सुने वह वही सब चलाने लगा, जो अब तक चल रहा था। क्योंकि काम तो ऐसे ही होते हैं।

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