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आया टोल फ्री का जमाना
सहीराम
Updated Tue, 25 Feb 2014 07:10 PM IST
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लो जी, टोल फ्री का जमाना आ गया। हमारे यहां चाहे कोई भी चीज फ्री हो, उसका अपना ही आकर्षण होता है। जैसे ड्यूटी फ्री दुकानों का आकर्षण होता है। हालांकि वहां फ्री कुछ भी नहीं होता। पर फ्री शब्द होने के कारण इन दुकानों पर लोग टूट पड़ते हैं। फ्री का आकर्षण तो ऐसा होता है कि दिल्ली में तो पानी फ्री देने के नाम पर राज ही बदल गया। वैसे बिजली फ्री के नाम पर राज पहले भी बदलते रहे हैं।
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पर कई बार फ्री में मिल रही चीज ज्यादा महंगी पड़ती है। इधर जब से शिक्षा फ्री हुई है, वह ज्यादा महंगी हो गई। क्योंकि फ्री वाली चीज को लोग फालतू समझते हैं। शायद इसीलिए पब्लिक स्कूलों में वह बेइंतहा महंगी हो गई। फिर भी फ्री का आकर्षण हमें खींचता है। अब तो जी, टोल फ्री का जमाना आ गया। शायद यह अच्छे दिनों की तरह ही आया हो। जैसे कभी नए जमाने का इंतजार होता था, वैसे ही कुछ दिन से इसका भी बेसब्री से इंतजार था कि एक दिन टोल फ्री जमाना आएगा।
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अब नए जमाने, नई दुनिया, नई व्यवस्था का इंतजार चाहे कितना ही लंबा हो गया हो, पर टोल फ्री का जमाना तो जल्दी ही आ गया। टोल फ्री जमाने के आने का विश्वास इसलिए और दृढ़ हो गया था कि उधर महाराष्ट्र में राज ठाकरे टोलों को अग्नि को समर्पित करने निकल पड़े थे। बताते हैं कि उद्धव ठाकरे जी ने तो सिर्फ विरोध किया था, पर इन्होंने तो उन्हें स्वाहा करना ही शुरू कर दिया।
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टोलों पर दबंगों द्वारा बंदूकें लहराने की खबरें तो आती थीं, पर दबंगों ने जब उन्हें अग्नि को समर्पित करना शुरू कर दिया, तब फिर टोल कहां रहनेवाले थे। फिर इधर आप की हरियाणा इकाई ने वोटरों से वादा कर दिया था कि वह राज्य को टोल फ्री कर देगी। क्या पता, कर भी दें। जब इन्होंने दिल्ली में पानी फ्री का वायदा कुछ शर्तों के साथ कर दिया, तो राज्य को टोल फ्री कर सकते हैं।
हालांकि उसका वायदा तो राजनीति को भ्रष्टाचार फ्री करने का है, पर लोगों को इतना विश्वास तो हो ही गया होगा कि राजनीति चाहे भ्रष्टाचार फ्री हो-न हो, पर राज्य टोल फ्री तो हो ही जाएगा। जैसे हाई-वे पर कदम-कदम पर ढाबे होते हैं, वैसे ही इधर जगह-जगह टोल प्लाजा, टोल ब्रिज, टोल गेट और न जाने क्या होने लगे हैं। इनसे गुजरनेवालों को हमेशा दोहरा डर सताता रहता है कि स्टियरिंग संभालें या जेब। पर गुड़गांव से टोल खत्म होने से अब टोल फ्री का जमाना आ रहा है।