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जेबकतरी से जिला बदर तक

Fri, 15 Feb 2013 12:04 AM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Fri, 15 Feb 2013 12:04 AM IST
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thiefness to district chnage

पुलिस जब लक्ष्य तय कर काम करती है, तो कुछ ज्यादा ही कर लेती है। आईजी साहब की घड़ी कहीं गुम हो गई रास्ते में। रिपोर्ट लिखाई, तो रास्ते में आने वाले हर थाने से एक-एक घड़ी बरामद होती गई। अब ‘दुष्ट दमन अभियान’ में जितने लोगों को पकड़े जाने का तय किया गया था, उससे कहीं ज्यादा धरा गए हैं। अधिकारी परेशान हैं कि इनका क्या करें! कहां रखें, कहां छोड़ें। इंटरव्यू चल रहे हैं।

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पक्के में यह गुंडा दुष्ट-दमन के लायक है? अधिकारी ने परेशान आवाज में पूछा। यस सर। आप ही देख लें, चेहरे पर ही पूरा रोजनामचा छपा है। दस साल से जानता हूं इसको। न मेरा तबादला हुआ, न यह किसी और इलाके में गया। बड़ी मेहनत की है साहब इसने अपने एरिये में। जेबकतरी से शुरुआत की थी और तरक्की करते हुए आज जिला बदर के लायक हो गया है।
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पिछली बार भी इसका नाम रिकमेंड किया था जिला बदर के लिए, मगर इंस्पेक्टर मातादीन ने इसकी सीआर बिगाड़ दी। तब से बहुत मेहनत कर रहा है। ऐसा बदमाश है कि 26 जनवरी, 15 अगस्त को भी छुट्टी नहीं रखता। पुलिस में होता, तो सिपाही से थानेदार हो गया होता अब तक। बड़ी उम्मीद से आया है, सर!
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यहां सभी उम्मीद से आए हैं...तो क्या आधा शहर जिला बदर कर दूं? अधिकारी चिढ़ गया।
नहीं सर, जेनुइन आदमी है-थाने पर इसकी फोटू भी लगी है। जवाब मिला। फोटू का क्या है...पैसे लेकर तो तुम किसी की भी फोटू लगवा दो। अधिकारी ने कहा।

नहीं सर। आप खुद देख लें।
ठीक है, बुला लो। अधिकारी पसीज गया।
अच्छा तो यह है। क्यों रे, क्यों जिला बदर होना चाहता है? ऐसा शहर और कहां मिलेगा! डकैती शुरू करने का तो मन नहीं हो रहा है कहीं? अधिकारी पहचान लेता है, तो बातें होने लगती हैं।

नहीं सर, यहां बहुत कॉम्पिटिशन हो गया है।

हां, हां ठीक है। देख, तेरा नाम वेटिंग में रख देता हूं। वह क्या है कि बहुत मारामारी है इस बार, मगर इसका मतलब यह नहीं कि तू, खूंटी तानकर सो जाए। काम-धंधे में लगे रहना, वरना बाद में कहेगा कि हफ्ता कहां से दूं? चल, भाग यहां से, हो जाएगा तो हेड सा’ब को बता देंगे। तो इतनी मुश्किल से दमन के लायक दुष्ट तलाशे जा रहे हैं। और लोग कहते हैं कि पुलिस कुछ करती ही नहीं।

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