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आप भी मानेंगे, सफलता पाने का सबसे आसान और सरल मंत्र है यह

Wed, 08 Apr 2015 09:13 AM IST
यशपाल जैन
यशपाल जैन Updated Wed, 08 Apr 2015 09:13 AM IST
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then life distroy us

पार्थ ने बड़े उत्साह से सूखे मेवों का व्यवसाय शुरू किया था। मगर घाटे के कारण पांच-छह महीने बाद ही उसे काम बंद करना पड़ा। वह बहुत उदास हुआ, और काफी समय बीत जाने पर भी उसने कोई दूसरा काम शुरू नहीं किया। पार्थ की इस स्थिति का पता उसके गुरु आचार्य श्रीवत्स कृष्णन को चला। उन्होंने एक दिन पार्थ को अपने घर बुलाया और उसका हालचाल पूछा। पार्थ ने कहा, मैं तन-मन-धन से उस काम में जुटा था, समझ नहीं आता कि मैं नाकाम कैसे हुआ। अब काम में मन नहीं लग रहा।

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आचार्य श्रीवत्स उसे बगीचे में ले गए और बोले, टमाटर के इस मरे हुए पौधे को देखो। पौधे को देख रहे पार्थ से गुरु ने कहा, मैंने जब इसे बोया था, तो हर वह चीज मैंने की, जो इसके लिए जरूरी थी। इसे खाद-पानी देने के साथ ही इसकी हिफाजत की। फिर भी यह मर गया। आखिर क्यों? असल में, तुम कितना भी प्रयास क्यों न करो, पर तुम उन्हीं चीजों पर नियंत्रण रख सकते हो, जो तुम्हारे हाथ में है, बाकी सब कुछ ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए।
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पार्थ ने पूछा, अगर कामयाबी की गारंटी नहीं है, तो फिर प्रयास करने से क्या फायदा? आचार्य बोले, बहुत से लोग इस डर से ही कुछ बड़ा करने का प्रयास नहीं करते कि जब सफलता निश्चित नहीं है, तो फिर कोशिश करने से क्या फायदा! मगर इसका जवाब देने से पहले जरा इस दरवाजे को खोलो।

पार्थ ने दरवाजा खोला। सामने बड़े-बड़े लाल टमाटरों का ढेर पड़ा था। आचार्य ने कहा, बेशक टमाटर का एक पौधा मरा था, सारा नहीं। अगर तुम लगातार सही चीजें करते रहो, तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन अगर तुम एक-दो बार में ही हार मान कर बैठ जाओ, तो जिंदगी उसे बट्टे खाते में डाल देती है।

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