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वही अखाड़ा, वही दांव

Tue, 11 Dec 2018 08:37 PM IST
हेमंत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
हेमंत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार Updated Tue, 11 Dec 2018 08:37 PM IST
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The same arena, the same bets
हेमंत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
तीन हिंदी हार्ट लैंड में भाजपा की हार कांग्रेस के ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की जीत है। जनेऊधारी कौल ब्राह्मण कामयाब रहा है। सेक्यूलर लबादे से दूर इसे आप कांग्रेस का नया अवतार भी कह सकते हैं। इन राज्यों में भाजपा की सफाई से लगता है कि कांग्रेस ने जीत का मंत्र समझ लिया है। एक के बाद एक हार से मुश्किल में पड़ी पार्टी ने अपने हिस्से का किनारा पकड़ लिया है। इन चुनावों में मिली जीत उसके इसी कायांतरण का नतीजा है। वरना पिछले चार वर्षों में लगातार ग्यारह राज्य कांग्रेस के हाथ से निकले।

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ग्रेस ने इस बार भाजपाई अखाड़े और उसी के दांव का इस्तेमाल किया। हालांकि यह भी सच है कि आजादी के बाद से हिंदुत्व के इस अखाड़े की इकलौती खिलाड़ी कांग्रेस ही रही थी। पर बाद में यह जगह भाजपा ने छीन ली और उस पर कब्जा भी कर लिया। कांग्रेस की ये जीत उसी कब्जे को छुड़ाने और बिना देरी हिंदुत्व की इस जमीन का दाखिल खारिज अपने नाम दर्ज कराने की मुहिम का नतीजा है। 
दरअसल चुनाव दर चुनाव राहुल गांधी का यह नया अवतार निखरकर सामने आ रहा है।

वह हर रोज नए मंदिरों की दौड़ लगाते नजर आ रहे हैं। मतदाताओं के बड़े हिस्से ने इसे मान भी लिया है। जो कसर बची थी, वह भाजपा ने कुल गोत्र पर विवाद खड़ा करके पूरी कर दी। यह वही कांग्रेस है, जिसने अयोध्या की विवादित इमारत में 1949 की एक रात रामलला की मूर्तियां रखवाईं। 1986 में विवादित परिसर का ताला खुलवाया। फिर मंदिर का शिलान्यास करवाया। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान के चुनाव प्रचार में यह भी एलान कर दिया कि अब मंदिर भी हमीं बनाएंगे। इसके परिणाम उसे मिलने लगे हैं। 


पिछले तीस वर्षों से हिंदुत्व इस देश में सत्ता की गोटियां सेट करने का एकतरफा मंत्र रहा है। अब कांग्रेस भी इसी अखाड़े में दो-दो हाथ कर रही है। राहुल ने भाजपा से लड़ने के लिए उसके ही हथियार का इस्तेमाल किया। राहुल ने पांच राज्यों में कुल मिलाकर 67 जनसभाएं कीं। वह हर दौरे में वहां के किसी स्थापित मंदिर में जरूर गए। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी अपनी एकपक्षीय सेक्यूलर इमेज से बाहर आ गए। उन्हें कहीं शिवभक्त, कहीं राम भक्त तो कहीं नर्मदा भक्त के रूप में प्रचारित किया गया। राजस्थान के चुनाव में राहुल गांधी के हिंदुत्व का प्रखर रूप दिखा। वह राजस्थान के रण में ख्वाजा के दरबार से लेकर पुष्कर के मंदिर तक गए।  


यह वही कांग्रेस थी, जिसने कभी शाहबानो मामले में मुस्लिम तुष्टिकरण का अस्त्र इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला तक पलटने में गुरेज नहीं की थी। अब वह बदल चुकी है। अब यही कांग्रेस नरम हिंदुत्व का गरम ब्रांड हो चली है। राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस का यह नया चेहरा जनता के बीच अपनी छाप छोड़ता जा रहा है। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है। भाजपा अब तक हर मुश्किल में राजनीति को विकास के खांचे से निकालकर धर्म के अजेय आंगन में उतार अपनी विजय का शंखनाद करती आई थी। अब राहुल ने भी अपना राजनीतिक रथ इसी आंगन में उतार दिया है। भाजपा के हिंदुत्व कवच में सेंध लग चुकी है। चुनाव के ताजा नतीजे इसी सेंधमारी की मिसाल  हैं।

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