फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Tamil Nadu DMK Politics name of state not in Union Budget Speech does not mean Separatist thought

सियासत: UPA के छह बजट भाषणों में भी 'तमिलनाडु' नहीं, आखिर अलगाववादी संस्कृति वाली द्रमुक की समस्या क्या है...

Sat, 27 Jul 2024 05:59 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Sat, 27 Jul 2024 05:59 AM IST
विज्ञापन
सार
द्रमुक अलगाववादी संस्कृति को बढ़ावा देती है। यदि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में तमिलनाडु का उल्लेख नहीं किया है, तो इसका यह मतलब नहीं कि द्रमुक अन्य दक्षिणी राज्यों को नीति आयोग की बैठक में भाग लेने से रोके। 2004 से 2014 के बीच यूपीए के छह बजट भाषणों में तमिलनाडु का उल्लेख नहीं हुआ था।
loader
Tamil Nadu DMK Politics name of state not in Union Budget Speech does not mean Separatist thought
सीएम एमके स्टालिन (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस और माकपा जैसे दक्षिणी राजनीतिक दल केंद्रीय बजट को तोड़-मरोड़कर उसका विश्लेषण कर रहे हैं और संकीर्णतावाद तथा क्षेत्रीयतावाद को भड़का रहे हैं। इंडिया गठबंधन में शामिल सभी राजनीतिक दलों ने प्रभावी ढंग से एक आख्यान पेश किया कि मोदी सरकार का बजट अपने सहयोगी नेताओं-नीतीश कुमार (बिहार) और चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश) को खुश करने के लिए था। पिछले दो दिनों से लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष की बहस 'कुर्सी बचाओ बजट' के नारे पर ही टिकी रही। लेकिन टीवी बहसों और प्रिंट मीडिया में बजट के सकारात्मक विश्लेषण ने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री को जरूर खुश किया होगा। हालांकि समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया में थोड़ी स्पष्टता है। इसका कारण यह है कि अखिलेश यादव जानते हैं कि बिहार उत्तर प्रदेश से सटा हुआ राज्य है।



जाने-माने अर्थशास्त्री स्वामीनाथन अय्यर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जब कोई अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है, तो उसका वित्त मंत्री भी बजटीय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है। 8.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि, कर प्राप्तियों में निरंतर उछाल और रिजर्व बैंक से बंपर लाभांश के बल पर निर्मला सीतारमण ने एक ही तीर से राजनीतिक और आर्थिक निशाने साधे हैं। आलोचकों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि अगर बिहार के नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू को भाजपा ने शांत नहीं किया, तो वे सरकार के लिए परेशानियां खड़ी कर सकते हैं। भले ही विशेष दर्जे की उनकी मांग पूरी न हुई हो, लेकिन बजट में दोनों राज्यों को भारी मात्रा में धन दिया गया है, जिससे फिलहाल उन्हें संतुष्ट होना चाहिए।


30 जुलाई को जब निर्मला सीतारमण बजट पर हो रही बहस का जवाब देंगी, तो निश्चित रूप से वह द्रमुक द्वारा फैलाए गए झूठ का खंडन करेंगी। आखिर द्रमुक के इतना नाराज होने की वजह क्या है? दरअसल, पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के नायडू के पास केवल 18 सांसद हैं, लेकिन उस राज्य को 15 हजार करोड़ रुपये मिले, मगर 39 सांसदों वाले तमिलनाडु को कुछ भी नहीं मिला। इस हीन भावना ने द्रमुक को केंद्र सरकार के खिलाफ जाने के लिए मजबूर किया। द्रमुक नेता एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी को धमकी दी है कि यदि केंद्र सरकार शासन पर ध्यान देने के बजाय लगातार विरोधी पार्टियों के नेताओं को निशाना बनाती रहेगी, तो वह अलग-थलग पड़ जाएगी। जबकि नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार करके द्रमुक खुद को अलग-थलग महसूस कर रही है। धमकी देकर वह अपना और ज्यादा नुकसान कर रही है।

द्रमुक कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, जिसने भाजपा के अबकी बार 400 पार के नारे को भारी झटका दिया और दक्षिणी राज्य में भाजपा को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा। स्टालिन की टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और बजट पर हमला बोला है। द्रमुक हमेशा रोती रहती है और अलगाववादी संस्कृति को बढ़ावा देती है। द्रमुक ने न केवल नीति आयोग का बहिष्कार करने का आह्वान किया, बल्कि तेलंगाना कांग्रेस के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, माकपा के मुख्यमंत्री पी विजयन और कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को नीति आयोग का बहिष्कार करने के लिए इकट्ठा किया। दिलचस्प बात यह है कि इन राज्यों में कावेरी जल संकट, सीमा विवाद और तमिल-तेलुगू-कन्नड़ भाषा अवरोध जैसे अंतरराज्यीय विवाद हैं। ये राज्य तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के चंद्रबाबू नायडू को भारी रकम मिलने से ईर्ष्या करते हैं।

तमिलनाडु के भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने स्टालिन को बहुत अच्छा जवाब दिया है-यदि निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में तमिलनाडु शब्द का उल्लेख नहीं किया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के दौरान छह बजट भाषण ऐसे थे, जिनमें पी चिदंबरम ने तमिलनाडु या तिरुवल्लुवर का उल्लेख नहीं किया था। कम से कम भाजपा के घोषणापत्र में यह आश्वासन तो है कि तिरुक्कुरल और इसके लेखक तिरुवल्लुवर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। द्रमुक भाजपा के ऐसे सकारात्मक पहलुओं को क्यों नजरअंदाज करती है? तमिलनाडु के पूरी तरह बहिष्कार संबंधी मुख्यमंत्री स्टालिन के आरोप का जवाब देते हुए अन्नामलाई ने कहा, 'तमिलनाडु के मुख्यमंत्री लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं कि बजट भाषण में जिन राज्यों का उल्लेख है, केवल उन्हीं को लाभ मिलेगा, जबकि पिछली यूपीए सरकार ने 2 जी घोटाले जैसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया था, जिसमें द्रमुक भी शामिल थी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के अगले दिन संसद में अपनी बात को अच्छी तरह से रखा। उन्होंने इस दावे को 'अपमानजनक' बताते हुए खारिज किया कि 'आंध्र प्रदेश और बिहार ने बजटीय आवंटन का बड़ा हिस्सा हड़प लिया है'। दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस संसद में बहुत आक्रामक थी, लेकिन वह खुद नीति आयोग की बैठक में भाग ले रही हैं। इस तरह वह दक्षिणी सहयोगियों के बहिष्कार के आह्वान के खिलाफ जा रही हैं। यह सही है कि निर्मला सीतारमण बजट पर राजनीतिक आक्रोश का पूर्वानुमान लगाने में विफल रही हैं और इससे कांग्रेस को बजट को उत्तर प्रदेश विरोधी बताने का मौका मिल गया। यह संवेदनशील मुद्दों पर विचार करने के लिए भाजपा के लिए एक सबक है। मोदी एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं और वह जरूर सुधार करेंगे।

क्या द्रमुक 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है? जाहिर है कि केंद्र और मोदी विरोधी कोई भी बात अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिए मुफीद है। एमके स्टालिन ने मोदी के खिलाफ नकारात्मक अभियान चलाकर 2021 का विधानसभा चुनाव जीता, स्टालिन ने 2024 में भी यही पैंतरा दोहराया, और उन्हें 40 सांसदों का फायदा मिला। इसलिए स्टालिन केंद्र एवं मोदी की आलोचना करके 2026 के तमिलनाडु विधानसभा में भारी जीत की उम्मीद कर रहे हैं। अफसोस की बात है कि दक्षिण के चार राज्यों-तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल एवं कर्नाटक उत्तरी राज्यों को चेतावनी दे रहे हैं, जबकि राहुल गांधी जैसे नेता वायनाड लोकसभा से इस्तीफा देकर कह रहे हैं कि दक्षिण भारतीयों का दिमाग उत्तर भारतीयों से बड़ा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed