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गन्ना किसानों के हित में: छह दशक पुराने शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर में बदलाव का मसौदा, महज प्रशासनिक कवायद नहीं

Sat, 25 Apr 2026 06:15 AM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 25 Apr 2026 06:15 AM IST
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सार
अब तक देश का गन्ना क्षेत्र दशकों पहले बने उन नियमों पर चल रहा है, जब चीनी उद्योग, एथेनॉल, आपूर्ति शृंखला और बाजार की स्थितियां एकदम अलग थीं। जाहिर है, आज जब कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और बाजारोन्मुख बनाने पर जोर दिया जा रहा है, तब गन्ना जैसी प्रमुख नकदी फसल के नियामक ढांचे में सुधार समय की मांग बन जाता है।
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sugarcane control order reform farmer payment rules sugar industry india Ethanol policy
गन्ना किसान - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार ने करीब छह दशक पुराने शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर में बदलाव के लिए जो मसौदा तैयार किया है, वह महज एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि देश के गन्ना क्षेत्र में लंबे समय से जमी संरचनात्मक जटिलताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। चीनी उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले उन उद्योगों में शामिल है, जो सीधे तौर पर रोजगार और स्थानीय विकास को प्रभावित करते हैं। बावजूद इसके, अब तक देश का गन्ना क्षेत्र दशकों पहले बने उन नियमों पर चल रहा है, जब चीनी उद्योग, एथेनॉल, आपूर्ति शृंखला और बाजार की स्थितियां एकदम अलग थीं। जाहिर है, आज जब कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और बाजारोन्मुख बनाने पर जोर दिया जा रहा है, तब गन्ना जैसी प्रमुख नकदी फसल के नियामक ढांचे में सुधार समय की मांग बन जाता है। मसौदे का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों को पूरा भुगतान करना होगा और अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो शेष राशि पर 15 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा। यही नहीं, अगर कोई चीनी मिल फिर भी पैसा नहीं चुकाती है, तो बकाया राशि वसूलना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। लिहाजा किसानों को अपनी लड़ाई अकेले नहीं लड़नी पड़ेगी। नए मसौदे में नई चीनी मिल लगाने के लिए न्यूनतम दूरी भी 15 से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने का प्रस्ताव है, ताकि एक ही क्षेत्र में गन्ना मिलों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा पर अंकुश लगे। दरअसल, देश में चीनी उद्योग बदलाव के दौर से गुजर रहा है। खानपान को लेकर लोगों में जो जागरूकता आई है, उससे चीनी की मांग में आए ठहराव और गन्ने की सीमित उपलब्धता के चलते यह जरूरत महसूस की जा रही थी कि पुराने नियमों में बदलाव लाया जाए। फिलहाल, सरकार ने 20 मई तक लोगों और उद्योग से जुड़े पक्षों से सुझाव मांगे हैं। जाहिर है कि सरकार इस मामले में किसी जल्दबाजी में नहीं है, जो अच्छी बात है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मसौदे के लागू होने से गन्ने की उपलब्धता बेहतर होगी और किसानों को भी समय पर उचित कीमत मिल सकेगी। इससे मिलों के बीच प्रतिस्पर्धा के संतुलित होने और उद्योग में स्थिरता आने की भी उम्मीद है। चूंकि, गन्ना क्षेत्र में विभिन्न हितधारकों के हित कई बार एक-दूसरे से टकराते हैं, इसलिए, आवश्यक होगा कि सुधारों को लागू करते वक्त किसानों की आय सुरक्षा और मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता में संतुलन बनाकर रखा जाए।
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