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सरकार की साख पर धब्बा
विजय गुप्ता
Updated Fri, 27 Sep 2013 08:55 PM IST
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दागी नेताओं को बचाने संबंधी अध्यादेश पर राहुल गांधी के तेवर पर यूपीए सरकार में कांग्रेस के सहयोगी दल भी सकते में हैं। इस संदर्भ में एनसीपी नेता और कृषि राज्यमंत्री तारिक अनवर से विजय गुप्ता ने बातचीत की-
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दागी मंत्रियों को बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अब बकवास करार दिया है। इस पर आपकी क्या राय है?
राहुल गांधी का बयान बहुत ही गंभीर है। उनके बयान से साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस और सरकार के बीच समन्वय की कमी है। चूंकि सरकार का नेतृत्व स्वयं कांग्रेस ही कर रही है, ऐसे में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने न सिर्फ सरकार को, बल्कि सहयोगी दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसी टिप्पणी क्यों की गई। क्या इस मामले में कांग्रेस में सर्वानुमति नहीं थी? क्या अध्यादेश लाते वक्त पार्टी को भरोसे में नहीं लिया गया था? ऐसेे कई सवाल अब पैदा हो रहे हैं।
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क्या सरकार ने सहयोगी दलों को विश्वास में लिए बगैर ही इस अध्यादेश को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी दिला दी है? हो सकता है, कुछ सहयोगी दलों की आपत्ति को देखते हुए राहुल गांधी ने अब यह मुद्दा उठाया हो?
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ऐसा कतई नहीं है। सच्चाई तो यह है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके पूर्व सरकार में शामिल सभी दलों ने इस अध्यादेश पर अपनी सहमति व्यक्त की थी। लिहाजा यह कहना, कि सहयोगी दलों को विश्वास में लिए बगैर ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस अध्यादेश को मंजूरी दे दी, सही नहीं है।
राहुल गांधी ने जिस तरह से इस अध्यादेश को फाड़कर फेंक देने की बात कही है, उससे लगता है कि कांग्रेस का एक बड़ा तबका इस अध्यादेश के पक्ष में नहीं है। तो क्या केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी कांग्रेस ने इसका विरोध किया था? अगर ऐसा नहीं है, तो अब ऐसा क्या हो गया कि पार्टी ने इसका ठीकरा सरकार पर फोड़ दिया है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कांग्रेस ने इस अध्यादेश का विरोध नहीं किया था। बल्कि आश्चर्य तो इस बात पर है कि अध्यादेश लाने का फैसला कांग्रेस का ही था। उसी ने इस बारे में सभी सहयोगी दलों से बात की थी। सभी पार्टियों द्वारा सहमति जताने के बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी।
विपक्षी दलों के विरोध के बाद कांग्रेस को कहीं ऐसा तो नहीं लगा कि इस अध्यादेश को लेकर जन विरोध का सामना करना पड़ सकता है? लेकिन सरकार को इस तरह सार्वजनिक रूप से कठघरे में खड़ा करने से तो सहयोगी दलों की छवि पर भी धब्बा लगा है। आपकी पार्टी अब क्या करेगी?
यदि कांग्रेस को ऐसा लग रहा है कि इस अध्यादेश से आम आदमी के बीच सरकार की छवि खराब हो रही है, तो वह इसे रुकवा सकती है। अभी अध्यादेश राष्ट्रपति के पास ही है। वैसे भी राष्ट्रपति ने सरकार से इस अध्यादेश को लाने का औचित्य पूछा है। लेकिन इस तरह से सरकार को कठघरे में खड़ा करना ठीक नहीं है। एनसीपी इस को लेकर विरोध दर्ज कराएगी, क्योंकि देशहित में सरकार जो भी फैसले करती है, वे सबकी सहमति से लिए जाते हैं।
अध्यादेश पर कांग्रेस के विरोध के बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार में शामिल दलों का अब सरकार पर विश्वास नहीं रह गया है। क्या यह सही है?
नहीं, ऐसा नहीं है। विपक्ष तो हमेशा ही किसी न किसी बात को मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग करता रहता है। यह उसकी पुरानी आदत है। लेकिन यह भी सही है कि राहुल गांधी ने जो मुद्दा उठाया है, वह बहुत गंभीर है और इससे सरकार की छवि और साख पर धब्बा लगा है। यह बात कोई और करता, तो मामला इतना गंभीर नहीं होता।