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हवाई नक्शे पर सिक्किम

Wed, 26 Sep 2018 07:14 PM IST
subir bhowmik सुबीर भौमिक
Updated Wed, 26 Sep 2018 07:14 PM IST
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Sikkim on the air map
सुबीर भौमिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी सप्ताह सिक्किम में पाक्योंग हवाई अड्डे का उद्घाटन कर इस हिमालयी राज्य को उड्डयन के नक्शे में स्थापित कर दिया। यह सिक्किम का पहला और भारत का सौवां हवाई अड्डा है। इस हवाई अड्डे के निर्माण का काम मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में ही शुरू हो चुका था, लेकिन हाल के दौर में इसके निर्माण कार्य में काफी तेजी आई, क्योंकि मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नरेंद्र मोदी से खास रिश्ते हैं। यह हवाई अड्डा चीन से लगती हमारी सीमा से ज्यादा दूर नहीं है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, जब दोकलम में चीनी सैनिकों के जमावड़े से भारत और चीन के बीच तनातनी की स्थिति आ गई थी।

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एक समय था, जब दिल्ली स्थित हमारे नागरिक और सैन्य योजनाकार चीन से लगती सीमा पर ज्यादा ढांचागत विकास के खिलाफ थे। उनका मानना था कि वैसे में युद्ध की स्थिति में चीनी सैनिक इनका लाभ उठाकर भारतीय सीमा के अंदर तेजी से घुस आएंगे। हमारे योजनाकारों को बहुत देर से समझ में आया कि ढांचागत विकास के बिना हमारे सैनिक चीनी सैनिकों का मुकाबला कभी नहीं कर पाएंगे, जो अपने बेहतर ढांचागत विकास के कारण ही 72 घंटे में सेना का डिविजन कहीं भी तैनात कर देते हैं, जबकि भारत को ऐसा करने में इससे दोगुने से भी अधिक समय लगता है। पिछले कुछ साल में भारत ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में ढांचागत विकास को महत्व दिया है। इससे हमारे लिए भी सीमांत इलाकों में कम समय में सैन्य टुकड़ियों की तैनाती संभव होने लगी है।

पूर्वोत्तर भारत में सेना के लिए किए गए ढांचागत विकास से अंततः स्थानीय अर्थव्यवस्था को ही लाभ पहुंचता है। ब्रह्मपुत्र पर बने पुलों से इसके उत्तरी तट पर रहने वाली आबादी को फायदा हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में पूर्व से पश्चिम तक बनी सड़कों से वहां तक बाजार की पहुंच संभव हुई है। पूर्वोत्तर में ढांचागत विकास को मोदी सरकार ने पिछली किसी भी सरकार से भले अधिक तरजीह दी है, पर इसका नतीजा मिला-जुला है। जैसे, असम की ब्रह्मपुत्र से बराक घाटी तक रेल पटरियों को मीटरगेज से ब्रॉडगेज करने में मोदी सरकार के दौर में काफी तेजी आई, जबकि कांग्रेस सरकार के समय काम बहुत धीमा था, पर असम के ही सिल्चर से इंफाल तक यह काम लक्ष्य से तीन साल पीछे चल रहा है। मणिपुर में भाजपा की सरकार के आने का भी बहुत फायदा नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि उग्रवादी समूहों की सक्रियता के कारण ही, जो ठेकेदारों को निर्ममता से लूटते हैं, यह काम पूरा नहीं हो पा रहा। जबकि त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेल नेटवर्क से जुड़ पाया, क्योंकि पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार ने उग्रवादी समूहों के प्रति सख्ती दिखाई थी।

पूर्वोत्तर में ढांचागत विकास से ही मोदी सरकार की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी की, जिसके तहत देश को दक्षिण पूर्व एशिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ने का लक्ष्य है, सफलता सुनिश्चित है। ढाका की इसमें बड़ी भूमिका होगी, क्योंकि बांग्लादेश के जरिये पूर्वोत्तर से जुड़ना ज्यादा आसान है। शेख हसीना सरकार ने भारत को रेल, सड़क और बंदरगाहों से होकर पूर्वोत्तर तक पहुंचने की अनुमति दी है। 
ऐसे में, वहां के चुनाव में शेख हसीना का जीतना महत्वपूर्ण है, ताकि भारत के हित में यह नीति जारी रहे। लिहाजा भारत को बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर उन्हें असमंजस में डालने के बजाय उनके समर्थन में खड़े होना चाहिए, क्योंकि यह हमारे भी हित में होगा।  
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