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मुझे भी मां के दर्शन कराओ

Thu, 18 Jul 2013 10:09 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Thu, 18 Jul 2013 10:09 PM IST
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राक्षसराज रावण के वध के बाद विभीषण को लंका सौंपने के उपरांत श्रीराम, लक्ष्मण, सीता जी और हनुमान सहित अवधपुरी के लिए रवाना हुए। पुष्पक विमान को कुछ समय के लिए किष्किंधा में रोका गया, तो हनुमान ने श्रीराम से कहा, प्रभु आज्ञा हो, तो मैं पास की पहाड़ी पर रहने वाली अपनी माता के दर्शन कर आऊं।

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प्रभु श्रीराम ने कहा, हनुमंत, हमने ऐसा कौन-सा अपराध किया है, जो तुम हमें अपनी माताजी के दर्शन से वंचित रखना चाहते हो? अंजना तुम्हारी ही नहीं, हम सबकी माता हैं। यह सुनते ही हनुमान गद्गद हो उठे। उसके बाद सभी माता अंजना के पास पहुंचे। हनुमान ने माता के चरणों में सिर रखकर प्रणाम किया और परिचय देते हुए कहा, मां, ये भगवान श्रीराम और माता जानकी हैं। साथ में लक्ष्मण जी भी हैं। रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। हम सब रावण और उसके पुत्रों को मारकर माता सीता को मुक्त कराकर लौट रहे हैं।
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माता अंजना ने कहा, अरे हनुमान, तूने मेरे दूध को लज्जित कर दिया। क्या तुझमें सामर्थ्य नहीं थी कि अकेले ही उस राक्षस को पकड़ लाता? क्या तुम लंकापुरी को अकेले ही नष्ट नहीं कर सकते थे, जो तुमने भगवान श्रीराम को कष्ट दिया?
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श्रीराम ने कहा, हनुमान अकेले ही सब कुछ कर सकते थे, किंतु हम दोनों भाई रावण वध का श्रेय लेना चाहते थे। इसलिए उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।

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