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सलाह: कर्ज लेकर घी न पीजिए, यह एक जाल; इससे निपटने के लिए जरूरी है ऋण पुनर्गठन पर मंथन

Narayan Krishnamurthy नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Tue, 22 Apr 2025 07:41 AM IST
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सार
कुछ दशक पहले तक बचत भारतीयों की ताकत मानी जाती थी, लेकिन अब इसमें कमी आ रही है। तिस पर संकट यह भी है कि भौतिक सुविधाओं के लिए ऋण लेने और उधार लेकर कर्ज चुकाने की बढ़ती प्रवृत्ति से ऋण-आधारित अर्थव्यवस्था बन जाने का संकट भी खड़ा हुआ है।
 
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savings was considered strength of Indians, but now it is decreasing
प्रतीकात्मक - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

एक समय था, जब भारतीय परिवारों को बचतकर्ता के रूप में जाना जाता था। यह कुछ दशक पहले की बात है, जब ब्याज दरें अधिक थीं और मुद्रास्फीति कम थी, इसलिए उच्च रिटर्न प्राप्त करने के लिए बैंक में पैसा जमा रखना समझदारी मानी जाती थी। जोखिम से बचने वाले कई भारतीयों के लिए शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता किए बिना अपने पैसे को निवेश करने का यह शानदार तरीका था।



हालांकि, हाल के वर्षों में यह प्रवृत्ति उलट गई है और रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, सकल घरेलू बचत में वित्त वर्ष 2024 में 18.1 फीसदी की गिरावट आई है, जो वित्त वर्ष 2023 में 18.6 फीसदी थी। इसके अलावा, इस महीने की शुरुआत में रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद, बैंकों ने बचत बैंक शेष राशि के साथ-साथ एफडी पर अपनी आधार ब्याज दरों में संशोधन किया है। कई बैंकों ने बचत खातों पर ब्याज दरों में कटौती की है, जो तीन फीसदी से नीचे 2.75 फीसदी हो गई है। एक साल तक की एफडी दरें 3.25 फीसदी से शुरू होती हैं। यह पांच फीसदी की मुद्रास्फीति दर से काफी कम है, जिसका मतलब है कि बैंक में पैसा अपनी कीमत भी नहीं बचा पा रहा है। एक विचारधारा यह भी है कि बचत दर में कमी का कारण कम ब्याज दरें हैं, जिसके कारण लोग बचत खाते से पैसा निकालकर निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।


जोखिम भरे शेयर बाजारों की ओर रुख का एक संकेत म्यूचुअल फंड और शेयर बाजारों में मासिक निवेश में लगातार वृद्धि है। रिजर्व बैंक की दिसंबर, 2024 के लिए वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, भारत का घरेलू ऋण जीडीपी का 42.9 फीसदी रहा है और इसमें बताया गया है कि हाल के वर्षों में उधारकर्ताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया और उपभोक्ता टिकाऊ ऋण में वृद्धि बढ़ रही है। खाद्य वितरण से लेकर उच्च श्रेणी के उपभोक्ता सामान तक पर ‘अभी खरीदें बाद में भुगतान करें’ (बीएनपीएल) योजनाएं आज हमारे जीवन की वास्तविकता हैं। गोल्ड लोन और निजी साहूकारों, जैसे गैर-बैंकिंग चैनलों से उधारी में भी वृद्धि हुई है। ये सभी ऋण उपभोग के लिए हैं, न कि संपत्ति निर्माण के लिए, जैसे कि गृह ऋण या शिक्षा ऋण। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि घरेलू बचत पर और अधिक असर पड़ा है और महामारी के वर्षों के बाद बचत में गिरावट आई है।

अब, यदि आप आंकड़ों को गहराई से खंगालें, तो यह दर्शाता है कि उधार में वृद्धि भी अधिक लोगों द्वारा उधार लेने से संबंधित है, न कि उन्हीं लोगों द्वारा अधिक पैसे उधार लेने से। इसे दो तरीकों से देखा जा सकता है-पहला, अधिक लोगों को अपने उपभोग के लिए पैसे की आवश्यकता है। दूसरा, जैसे-जैसे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, वे उधार लेकर अपनी आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होते हैं। चाहे जिस तरह से भी देखें, उधारी बढ़ गई है, बचत पर ब्याज दर कम हो गई है और कुल मिलाकर घरेलू बचत दर भी कम हो गई है। औसत परिवार के लिए इसका क्या मतलब है? औसत परिवारों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है-उनकी बचत बहुत ज्यादा नहीं है और उनकी बचत का मूल्य मुद्रास्फीति से मेल नहीं खाता है। उनके ऊपर कर्ज है, जो बढ़ता जा रहा है, जिससे उन्हें मौजूदा ऋणों को चुकाने के लिए ज्यादा उधार लेना पड़ रहा है।

आसान उपभोक्ता वित्त और भुगतान का उपयोग भी खर्च करने के मामले में वित्तीय विवेक को कम कर रहा है। विवेकाधीन और गैर-विवेकाधीन वस्तुओं पर खर्च करने पर बहुत कम नियंत्रण है, जिससे वित्तीय स्थिति कठिन हो जाती है। जो लोग बचत से हटकर शेयर बाजार में निवेश करने लगे हैं, उनके लिए अनिश्चितता तथा शेयर बाजार की अस्थिरता चिंता का विषय है। शेयर बाजार में निवेश करने वाले कई नए निवेशक अल्पकालिक निवेश मानसिकता के शिकार हो रहे हैं, जिसमें बाजार में तेजी के दौरान प्रवेश करने और बाजार में गिरावट आने पर बाहर निकलने के सभी जरूरी गुण हैं। बढ़ते खर्चों और अर्थव्यवस्था में समग्र बदलाव को देखते हुए, जहां लोगों पर केवल आय पर नहीं, बल्कि खर्च पर भी कर लगाया जा रहा है; वेतनभोगी और गिग इकनॉमी कर्मचारियों के लिए भविष्य के लिए बचत करने की बहुत कम गुंजाइश है। हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहां हम एक ऋण-चालित अर्थव्यवस्था बन जाएंगे, जहां ऋण की आसान उपलब्धता लोगों को रोजमर्रा के घरेलू सामान के साथ-साथ उच्च लागत वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए भी ऋण लेने को प्रेरित करेगी।

ऋण तब तक बुरा नहीं है, जब तक कोई इसे समय पर चुकाने में सक्षम है और उधार संपत्ति बनाने या महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए है। जैसे ही कोई असहनीय कर्ज में फंस जाता है, यह समस्या बन जाती है। इन दिनों कई ऐसे संगठन हैं, जो आपको कर्ज से बाहर निकलने में मदद करने के लिए उभरे हैं और लोगों को उनके कर्ज का प्रबंधन करने में भी मदद कर रहे हैं, खासकर तब, जब इसे प्रबंधित करना चुनौतीपूर्ण हो रहा हो।

ऋण प्रबंधन की बात करें, तो एक पुरानी और परखी हुई सलाह यह है कि सबसे पहले अपने सभी ऋणों की सूची बनाएं और इसे ऋण की अवधि और ऋण पर ब्याज दर के साथ चिह्नित करें। सबसे पहले आपको उच्च ब्याज वाले ऋणों का भुगतान करना शुरू करना चाहिए, जैसे कि क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत ऋण। आप दोस्तों और रिश्तेदारों से कर्ज लेने पर विचार कर सकते हैं, ताकि कम समय में उच्च ब्याज वाले ऋणों को चुकाया जा सके, बशर्ते कि उनके पास बाद में इन उधारदाताओं को चुकाने के लिए कुछ अनुशासन हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर कर्ज चुकाना बहुत मुश्किल हो रहा है, तो अपनी कुछ संपत्तियां बेचना या फिर अपने ऋणदाताओं के साथ संभव हो, तो ऋण पुनर्गठन पर चर्चा करना कोई बुरा कदम नहीं है। किसी भी परिस्थिति में मौजूदा ऋण चुकाने के लिए कर्ज न बढ़ाएं, क्योंकि यह एक ऋण जाल है, जहां आप अपनी सारी आय या एक महत्वपूर्ण हिस्सा कर्ज चुकाने में लगा देंगे। इन अनिश्चित समय से निपटने के लिए अपने घरेलू खर्चों और बचत क्षमता के बारे में कुछ कठोर निर्णय लेने के लिए तैयार रहें तथा इस पर सतर्क रहें कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है।  

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