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नाकाम रफूगर

Sun, 15 Feb 2015 12:10 AM IST
धमेंद्र गुप्त साहिल
धमेंद्र गुप्त साहिल Updated Sun, 15 Feb 2015 12:10 AM IST
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sahil poetry.

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रिश्तों की फटी चादर की सिलाई
मुकम्मल न हो सकी।

जब एक फटे को सिलता,
तो दूसरा नजर आता।

और जब उसे सिल देता,
तो पता नहीं कैसे?
तीसरा फटा नजर आने लगता।

इस तरह मैं
एक नाकाम रफूगर/दर्जी
साबित हुआ।
------------------
अपने हिस्से के
जमीन-आसमान संभाले था।

पर रिश्तों ने जमीन छीन ली,
छोड़ दिया आसमान मेरे लिए।

और जब रिश्तों से मुक्त हुआ,
तो पाया, कि आसमान भी मेरा न रहा।
----------------------------
धूप से तपती है,
सबसे ऊपर की पत्तियां।

नीचे की कुछ कम,
सबसे नीचे की बहुत कम।

नहीं के बराबर
शायद इसलिए,

पत्तियों की आवश्यकता पड़ने पर
सबसे पहले तोड़ी जाती हैं
सबसे नीचे की पत्तियां।

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