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Russia vs Ukraine: राष्ट्रपति पुतिन और परमाणु युद्ध की पहेली; यूक्रेन और जेलेंस्की के सामने अस्तित्व की चुनौती

Mon, 18 Mar 2024 05:46 AM IST
Maroof Raza मारूफ रजा
Updated Mon, 18 Mar 2024 05:46 AM IST
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सार
रूसी सेना न केवल साजो-सामान संबंधी आपातकाल या रणनीतिक समस्या से जूझ रही है, बल्कि उसके मनोबल में भी गिरावट आ रही है। पुतिन के लिए देश, विदेश और सेना में समर्थन खत्म हो रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि रूस की परमाणु धमकी यूक्रेन को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की एक चाल है।
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Russia Ukraine Conflict President Vladimir Putin vs Volodymyr Zelensky Nuclear War Threat
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (फाइल) - फोटो : एएनआई-पीटीआई (फाइल)

विस्तार

इस हफ्ते की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन में युद्ध को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन में उनकी कार्रवाई को चुनौती दी गई, तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा। गौरतलब है कि रूस के पास सबसे बड़ा शस्त्रागार है, जो दुनिया को कई बार बर्बाद कर सकता है। इससे अमेरिका, नाटो और यूरोपीय देश चौंक गए। हालांकि वे जानते हैं कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल जल्दबाजी में करने की संभावना नहीं है।



ये हथियार अंतिम उपाय हैं। हालांकि पुतिन अपने ब्रीफकेस (संचार उपकरण, जिससे पुतिन अपने सभी शीर्ष सैन्य कमांडरों से बात कर सकते हैं) साथ लेकर चलते हैं, पर वह जानते हैं कि एक बार जब परमाणु हमला शुरू हो गया, तो फिर पीछे मुड़कर देखना मुश्किल हो जाएगा। परमाणु हथियारों का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब अमेरिकी नेतृत्व में नाटो का सैन्य हमला रूस के अस्तित्व के लिए खतरा हो। चूंकि पश्चिमी देशों ने रूस के विफल हमलों को देखा है, वे रूसी सैनिकों और संसाधनों को समाप्त करने के लिए गुप्त रूप से यूक्रेन को हथियार और सैनिकों की आपूर्ति करने की रणनीति जारी रखेंगे और तब तक युद्ध को नहीं बढ़ाएंगे, जब तक कि कीव का पतन न हो जाए।


पुतिन की यह धमकी तब आई है, जब कुछ ही दिनों में उन्हें अगले छह साल के लिए नया कार्यकाल मिलने वाला है। पुतिन ने यूक्रेन और पश्चिमी देशों को धमकाते हुए कहा कि नाटो समर्थित यूक्रेन के जवाबी हमलों से कब्जा किए गए यूक्रेनी क्षेत्रों सहित रूस की क्षेत्रीय अखंडता के लिए यदि जरूरी हुआ, तो रूस अपने परमाणु हथियारों का उपयोग करने में संकोच नहीं करेगा। इसके अलावा, उन्होंने रूस के सुरक्षा सिद्धांतों और कानूनों का हवाला दिया, जो उन्हें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में कोई भी रूसी नेता सांविधानिक रूप से उनके नतीजों को पलटने में सक्षम नहीं होगा। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि रूस के पास 'परमाणु सुरक्षा के लिए एक सिद्धांत है, जो कि एक खुला दस्तावेज है।'

एक इंटरव्यू में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि 'वह मानते हैं कि पुतिन झांसा नहीं दे रहे हैं। वह पूरी दुनिया को डराना चाहते हैं। ये उनके परमाणु ब्लैकमेल का पहला कदम है।' उनसे जब यह पूछा गया कि जब तक पुतिन सत्ता में हैं, क्या उन्हें यूरोप में स्थिरता दिख रही है, तो उनका स्पष्ट जवाब था-'नहीं। मेरे पास इस बारे में कहने के लिए और कुछ नहीं है। मेरी राय है कि नहीं। हमने वर्षों से इसे देखा है। हमें स्थिरता दिखाई नहीं देती।'

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, रूस सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागार का दावा करता है, जिसमें करीब 6,000 परमाणु हथियार हैं। उनमें से करीब 1,500 अभी तैनात हैं। 

आखिर पुतिन यह जोखिम क्यों ले रहे हैं? दरअसल, त्वरित सैन्य लाभ की उम्मीद में पुतिन ने खुद जनता का ध्यान शुरुआती कुछ महीनों में युद्ध की तरफ न जाने देने को प्रोत्साहित किया था। लेकिन अब उनके आक्रमण को रोक दिया गया है, जिससे रूस में असंतोष फैल गया है और इसलिए उन्होंने अपने देशवासियों के गिरते मनोबल को बढ़ाने के लिए अब परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी दी है।

जब दो वर्ष पहले 2022 में रूसी सैनिकों ने कुछ बढ़त हासिल की थी, तो उन्होंने लामबंदी का आदेश दिया था, लेकिन वह जानते थे कि इससे समाज में गंभीर असंतोष पैदा हो सकता है। इसलिए उन्होंने आंशिक लामबंदी का आदेश दिया।

टिप्पणीकार एनी अप्पलबाम ने अटलांटिक में लिखा, 'सेना के भीतर समस्या है।' और इसलिए 'रूसी सेना न केवल साजो-सामान संबंधी आपातकाल या रणनीतिक समस्या से जूझ रही है, बल्कि उसके मनोबल में भी गिरावट आ रही है। इसी वजह से पुतिन को और अधिक सैनिकों की आवश्यकता है और इसलिए, जैसा कि स्टालिन के समय में था, रूस ने अब स्वैच्छिक आत्मसमर्पण को अपराध घोषित कर दिया है, क्योंकि बड़े पैमाने पर रूसी सैनिकों ने अग्रिम पंक्ति छोड़ दी है। यदि आप डोनेट्स्क या खोरसान में अपनी चौकी छोड़ देते हैं या नागरिकों के कपड़े पहनकर भाग जाते हैं, जैसा कि पिछले कुछ हफ्तों में कुछ रूसी सैनिकों ने किया है, तो रूसी संसद द्वारा पारित कानून के अनुसार, आपको दस वर्षों के लिए जेल भेजा जा सकता है।' एप्पलबाम आगे कहती हैं, 'पुतिन के लिए देश, विदेश और सेना में समर्थन खत्म हो रहा है। जो कुछ भी उन्होंने कहा, वह इस गिरावट को रोकने के अलावा कुछ नहीं था।'

विश्लेषकों का कहना है कि क्रेमलिन की परमाणु धमकी यूक्रेन को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की एक चाल है। राजनीतिक विश्लेषक तातियाना स्टैनोवाया ने वर्ष 2022 में कहा था, 'यह रूस की ओर से यूक्रेन और पश्चिम के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है : या तो यूक्रेन पीछे हट जाएगा या परमाणु युद्ध होगा।'

यह स्पष्ट नहीं है कि इस लामबंदी का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 3,00,000 लोगों को प्रशिक्षित करने, उन्हें हथियारबंद करने और मोर्चे पर भेजने की चुनौती बहुत बड़ी थी, खासकर तब, जब रूस ने पहले ही अपने सबसे अनुभवी सैनिकों को तैनात कर दिया था। फिर भी, रूस ने यूक्रेन में सैन्य नुकसान की कुछ दुर्लभ स्वीकारोक्ति की। स्टैनोवाया ने कहा, 'सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से, लगभग कुछ भी योजना के अनुसार नहीं हुआ है।' विशेषज्ञों के अनुसार, रूसी परमाणु हमले का जवाब पारंपरिक सैन्य या कूटनीतिक तरीके से देना और यूक्रेन को अधिक शक्तिशाली हथियार प्रदान करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, ताकि वह रूस पर हमला कर सके।

रूसी लामबंदी रूसी शहरों में विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा दे रही है। यह यूरोप में इस बात को लेकर भी मतभेद पैदा कर रही है कि क्या बड़ी संख्या में युद्ध से भागे रूसी पुरुषों का स्वागत किया जाना चाहिए या उन्हें भगा देना चाहिए। यूक्रेनी और रूसी सैन्य योजनाकारों के लिए लड़ाई को और अधिक जटिल बनाने की घड़ी आगे बढ़ती जा रही है। हालांकि यह एक पेचीदा सवाल है, लेकिन नाटो और अमेरिका किसी अंतर्निहित परमाणु खतरे के लिए तैयार नहीं दिखना चाहते हैं। विकल्प कठिन हैं, और पश्चिम ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह रणनीतिक परमाणु हमले पर कैसी प्रतिक्रिया देगा।

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