फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Round of purification of the property market

प्रॉपर्टी बाजार की शुद्धि का दौर

Mon, 28 Nov 2016 06:23 PM IST
मधुरेंद्र सिन्हा
मधुरेंद्र सिन्हा Updated Mon, 28 Nov 2016 06:23 PM IST
विज्ञापन
 Round of purification of the property market
मधुरेंद्र सिन्हा

देश में काला धन अगर सबसे ज्यादा किसी क्षेत्र में है, तो वह है रियल एस्टेट। मंदी से जूझते रियल एस्टेट के सामने नोटबंदी एक भूचाल की तरह है। यहां लाखों मकान अनबिके पड़े हैं और बाकी सभी की कीमतों में गिरावट आई है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यह गिरावट कम से कम 30 प्रतिशत तक है। सिर्फ इतना ही नहीं, नए मकानों की रजिस्ट्री बंद पड़ी है और सरकारों को भी भारी चोट सहनी पड़ रही है। उम्मीद यह की जा रही थी कि अगले साल के अंत तक प्रॉपर्टी के बाजार में हरियाली लौटेगी। लेकिन उस पर तो अब पूरी तरह से पानी पड़ गया है। अभी तो उसे मूर्च्छा से बाहर आने में ही समय लगेगा। उसके बाद भी प्रॉपर्टी बाजार सामान्य स्थिति में कब आ पाएगा, इस प्रश्न का जवाब किसी के पास नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में प्रॉपर्टी बाजार में ओवर सप्लाई की स्थिति बनती चली गई और सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में ही चार लाख मकान अनबिके रह गए।

विज्ञापन


माना जाता है कि एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार में 35 से 40 प्रतिशत तक धन काला धन ही है। अब यह गायब हो गया है। नोटबंदी का असर यह हुआ है कि इनकी पूछताछ भी बंद हो गई है। यहां तक कि जो लोग कुल कीमत का 30 से 40 प्रतिशत तक नकद में देने की मंशा रखते थे, अब बाहर हो गए हैं और वे अपनी बुकिंग भी कैंसल करा रहे हैं। नकदी पर आधारित बिक्री तो जैसे छूमंतर हो गई है। ग्राहकों को अब कोई जल्दी नहीं है और वे बाजार के और गिरने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें पता है कि बाजार में मकानों की असली कीमतें दिखने लगेंगी। बढ़ा-चढ़ाकर रखी गई कीमतों पर अब कोई खरीदार नहीं है। ऐसे में, मकानों की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं। अब सिर्फ जरूरतमंद ग्राहक ही बाजार में आएंगे और वे भी समझदारी से खरीदारी करेंगे, यानी भारी मोलभाव करने के बाद ही। यह बात दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में पूरी तरह लागू होती है, जहां काला धन बड़े पैमाने पर लगा हुआ है। लेकिन दक्षिण भारत के बाजार, जैसे कि हैदराबाद या चेन्नई को इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। फिर भी नोटबंदी के दूरगामी प्रभाव प्रॉपर्टी बाजार पर पड़ेंगे और फिलहाल इसमें मंदी का माहौल बना रहेगा।
विज्ञापन


लेकिन इन सबसे बढ़कर रियल एस्टेट को चिंता जिस कानून की है, वह है परिवर्तित बेनामी प्रॉपर्टीज ऐक्ट की, जो इस महीने की पहली तारीख से लागू हो गया है। अब यह काफी प्रभावशाली हो गया है। इसमें जेल की सजा भी बढ़ा दी गई है और जुर्माना भी। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि वह देश में बेनामी प्रॉपर्टी की व्यवस्था को खत्म कर देंगे। यह कानून देश में काला धन रखने वालों के लिए ही बनाया गया है, जो अपना काला धन दूसरों के नाम मकान बनाकर या खरीद कर छिपाए बैठे हैं। नए कानून के प्रावधान इतने सख्त हैं कि बेनामी प्रॉपर्टी रखना बेहद खतरनाक हो जाएगा। यह कानून इतना व्यापक है कि इसके दायरे में कोई भी आ सकता है। मसलन, पत्नी या बच्चों के नाम खरीदी गई संपत्ति भी बेनामी मानी जाएगी। जिन लोगों ने माता-पिता के नाम संपत्ति खरीद रखी है, वे भी इसके दायरे में आते हैं। सीधी-सी बात यह है कि जो प्रॉपर्टी उस धन से खरीदी गई है, जिसमें टैक्स नहीं दिया गया है, वह इस कानून के दायरे में आएगी। अब तक यह काला धन कानूनी ढंग से रखने का एक प्रभावी जरिया था। लेकिन नए प्रावधानों ने इस पर चोट पहुंचा दी है। ऐसी किसी भी संपत्ति का पता चलने पर उसे न केवल जब्त किया जा सकेगा, बल्कि सभी जिम्मेदार लोगों को जेल जाना पड़ेगा। भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों ने बेनामी प्रॉपर्टीज में अपना काला धन बड़े पैमाने पर लगा रखा है। अब उन पर गहरी चोट पड़ेगी। हालांकि इस तरह की संपत्ति का पता लगाना आसान नहीं है, फिर भी इसका असर काफी पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


मगर बुरा वक्त अपने साथ अच्छा वक्त भी लाता है। प्रॉपर्टी बाजार का गिरना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसके बाद आने वाला समय बढ़िया होगा, क्योंकि भविष्य में लोग इसमें काला धन लगाने से बचेंगे। बैंक अपने भारी कर्जों को डूबने से बचाने के लिए ब्याज दरों में कटौती भी करेंगे। अब भी भारत में कर्ज पर ब्याज की दर दुनिया में सबसे ज्यादा वाले देशों में है। ब्याज दरों की मार से न केवल ग्राहक हैरान होते हैं, बल्कि बैंकों के पैसे भी डूबते हैं। बैंकों के एनपीए बढ़ने का एक कारण यह भी रहा कि बढ़ी हुई ब्याज दरों पर लोन चुकाने में खरीदार बड़ी तादाद में नाकाम रहे। यह राशि इतनी बड़ी है कि बैंकों के सामने ब्याज दर घटाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। वैसे भी पूंजी बाजार में बड़े पैमाने पर काला धन हटने से मकानों की कीमतों में स्थिरता आएगी और वे तार्किक स्तर से ऊपर नहीं जाएंगे। इसका लाभ खरीदारों को मिलेगा। इससे बाज़ार में पारदर्शिता आएगी। भारत में प्रॉपर्टी बाजार काला धन लगाने और कमाने का एक बहुत बड़ा जरिया बना हुआ है। राजनेताओं और अफसरों की मिलीभगत से जमीन के आवंटन से लेकर मकानों की खरीद-बिक्री तक काला धन इस्तेमाल होता रहा। बिल्डरों को अवैध रूप से जमीन दिलाने में बड़ी भारी राशि का लेन-देन होता है, जो काला धन के रूप में होता है।


अपने यहां एक परियोजना पास कराने से लेकर कम्पीलशन सर्टिफिकेट देने तक में 58 तरह की औपचारिकताएं हैं और कमोबेश सभी में संबद्ध अधिकारियों की जेब गर्म करनी होती है। इसमें तो सफेद धन भी काला हो जाता है। भ्रष्टाचार का ही नतीजा है कि रियल एस्टेट में काला धन सर्वत्र है। जाहिर है, बिल्डर जब काला धन देगा, तो ग्राहक से लेगा भी। यह एक दुश्चक्र-सा है और इसके बुरे परिणाम देखने को मिलते हैं। पर अब इसमें रोक लगेगी और बिल्डरों के लिए भी काम करना आसान होगा। नोटबंदी प्रॉपर्टी बाजार के लिए आने वाले समय में एक शुद्धिकरण का जरिया होगी, जिससे कीमतों में अनाप-शनाप बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed