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गणतंत्र दिवस: हम होंगे कामयाब!
Sun, 26 Jan 2020 07:14 AM IST
संजीव कुमार झा
पवन सिन्हा, आध्यात्मिक गुरु
पवन सिन्हा, आध्यात्मिक गुरु
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 26 Jan 2020 07:14 AM IST
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चुनौतियों के बीच भारत 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश के सम्मुख सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक विकास की है । गिरती अर्थव्यवस्था का संकेत है, व्यापार में कमी, मांग और आपूर्ति में कमी, बढ़ती कीमतें, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का बिकना, विकास योजनाओं के लागू होने में परेशानियां आना और नौकरियां कम होना, ये सब ऐसे समय में हो रहा है जब भारत विश्व का सबसे युवा देश होने वाला हैं यानी दायित्व और बढ़ने वाले हैं।
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भारत के आंतरिक तथा बाहरी दोनों मोर्चों पर खतरे बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से आंतरिक सुरक्षा के सम्मुख परेशानियां अधिक हैं। हम ऐसे दौर में आ खड़े हुए हैं जहां सुरक्षा बलों के साथ-साथ नागरिकों को स्वयं सुरक्षा व्यवस्था में हिस्सेदारी निभानी होगी। 'सोशल मीडिया भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। फेक न्यूज, अश्लीलता, इतिहास और धर्म की आड़ में कीचड़ उछालना, बिगड़ती हुई भाषा, हर मन पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ रही है।
इससे समाज में आक्रामकता, अवसाद बढ़ रहा है और रिश्ते टूट रहे हैं। सोशल मीडिया ना केवल भ्रम फैलाने की मशीन बन रहा है, बल्कि ज्ञान के अभाव में दुर्भावना से प्रेरित असभ्य संवाद देश की एकता के लिए भी खतरा बन रहा है। सोशल मीडिया के लिए सख्त कानून और त्वरित सजा समय की मांग है।
सार्थक युवा नीति एवं शिक्षा नीति इस समय सबसे बड़ी जरूरत है। युवा नीति के माध्यम से युवाओं को दिशा देना तथा शिक्षा नीति के माध्यम से ज्ञान और समरसता स्थापित करना, ये वो लक्ष्य हैं, जिन पर पूरी शक्ति से जुटना होगा। यूं तो राजनीति में वोट बैंक और ध्रुवीकरण सदा साथ ही चलते हैं, परन्तु इस दौर में जिस स्तर पर ध्रुवीकरण हो रहा है वो भविष्य में बहुत परेशानियां उत्पन्न करेगा।
यदि राजनीति में समावेशिता समाप्त हो जाए तो छोटे-मोटे लाभ के लिए ध्रुवीकरण चरम पर पहुंच जाएगा। ये देश की एकता और अखंडता के लिए एक बड़़ा खतरा बन सकता है।
अभी शिक्षा, न्याय व्यवस्था, नौकरशाही, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण आदि ऐसे बहुत सारे क्षेत्र हैं, जिसमें लोक हित में कार्य करने की आवश्यकता है।
जनाधार पर चलने वाली नौकरशाही आज भी देश की अधिकतर जनता को उपलब्ध नहीं है। आज भी अधिकतर राजनीतिक दलों के मेनिफेस्टो शपथ पत्र के रूप में नहीं लिए जाते, जिससे उत्तरदायी सरकार की स्थापना होने में बहुत कठिनाइयां होती हैं।
चुनौतियों के साथ हम गणतंत्र के एक और वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि हम होंगे कामयाब।