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एक अनूठे कवि की याद में

Sat, 01 Jun 2013 09:31 PM IST
नवल किशोरी
नवल किशोरी Updated Sat, 01 Jun 2013 09:31 PM IST
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rakesh wats poems
अंधेरा
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शिखर दोपहरी में
अगर तुम
अंधेरे का जिक्र करोगे
लोग तुम्हें अंधा समझेंगे
मजाक उड़ाएंगे तुम्हारा
लेकिन तब तुम्हें
शिद्दत से याद करेंगे
जब गिरोगे ठोकर खाकर
किसी पत्थर से।

वक्त
मत पूछो इस वक्त से
किसका हाथ थामकर
चल रहा है वह
किसने पकड़ी हुई है
उसके हाथ की लाठी
भिखमंगा नहीं है वक्त
इंसान का सताया हुआ है
उम्र से पहले हो गया है बूढ़ा
उसके लिए अब अंधेरा ही अंधेरा है।

राकेश वत्स
जन्म-13.10.1941, निधन-05.07.2007
राकेश वत्स के शब्दों में सूक्ष्मता और सौंदर्यबोध के साथ-साथ साधारण के प्रति एक उत्सुकता भी झलकती है। इनका आसपास इतना उदार है कि हर कोई एक सम्मोहन में बंध जाता है।
प्रस्तुति-नवल किशोरी

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